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Siddharthnagar News: हजरत मुस्लिम के शहादत दिवस पर निकाला गया अलम-ताबूत का जुलूस
Mon, 17 Jun 2024 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 17 Jun 2024 01:08 AM IST
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फोटो- है
- आयोजित हुई मरसिया मजलिस अकीदतमंदों ने नौहा के साथ किया मातम
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन के चचेरे भाई और उनके प्रतिनिधि हजरत मुस्लिम की कूफा में हुई शहादत की याद में डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर कस्बा में शनिवार और रविवार को मरसिया मजलिस का आयोजन किया गया। अकीदतमंदों ने नौहा-मातम किया। उनकी शहादत के गम में शिया समुदाय के लोग गमगीन रहे।
डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर स्थित रिफाकत मंजिल में शनिवार की शाम ताजिया व ताबूत रखकर मजलिस-मातम का सिलसिला पूरी रात चला। रविवार शाम पांच बजे मजलिस को जाकिर, अहलेबैत जमाल हैदर ने शोहदा-ए-कर्बला के बताए हुए रास्ते पर अमल करते हुए जिंदगी गुजारने की बात कही। जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि इमाम हुसैन अ स के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम बिन अकील थे। उनको इमाम हुसैन ने अपना सफीर यानी प्रतिनिधि बनाकर भेजा था। इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठा रहे थे। कूफे वालों ने इमाम हुसैन को खत भेजकर बुलवाया था। अकेले हजरत मुस्लिम ने इब्ने ज्याद की फौजों से लड़ते हुए शहीद हुए। यह कर्बला की घटना की पहली शहादत थी। मजलिस से पूर्व खुर्शीद आरके व उनके सहयोगी ने हजरत मुस्लिम से मंसूब मरसिया पेश किया। मजलिस के बाद लोगो ने ताबूत व ताजिया उठाया और नौहा मातम करते हुए कर्बला पर ले जाकर ताजियों को दफन किया गया। मजलिस को जाकिर काजिम करबलाई ने संबोधित किया। इस दौरान खुशनेहाल गुड्डू, साजिद मंटू, तसकीन हैदर, काजिम रजा, नफीसुल आफताब, कैफी रिजवी आदि मौजूद रहे।
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- आयोजित हुई मरसिया मजलिस अकीदतमंदों ने नौहा के साथ किया मातम
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन के चचेरे भाई और उनके प्रतिनिधि हजरत मुस्लिम की कूफा में हुई शहादत की याद में डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर कस्बा में शनिवार और रविवार को मरसिया मजलिस का आयोजन किया गया। अकीदतमंदों ने नौहा-मातम किया। उनकी शहादत के गम में शिया समुदाय के लोग गमगीन रहे।
डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर स्थित रिफाकत मंजिल में शनिवार की शाम ताजिया व ताबूत रखकर मजलिस-मातम का सिलसिला पूरी रात चला। रविवार शाम पांच बजे मजलिस को जाकिर, अहलेबैत जमाल हैदर ने शोहदा-ए-कर्बला के बताए हुए रास्ते पर अमल करते हुए जिंदगी गुजारने की बात कही। जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि इमाम हुसैन अ स के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम बिन अकील थे। उनको इमाम हुसैन ने अपना सफीर यानी प्रतिनिधि बनाकर भेजा था। इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठा रहे थे। कूफे वालों ने इमाम हुसैन को खत भेजकर बुलवाया था। अकेले हजरत मुस्लिम ने इब्ने ज्याद की फौजों से लड़ते हुए शहीद हुए। यह कर्बला की घटना की पहली शहादत थी। मजलिस से पूर्व खुर्शीद आरके व उनके सहयोगी ने हजरत मुस्लिम से मंसूब मरसिया पेश किया। मजलिस के बाद लोगो ने ताबूत व ताजिया उठाया और नौहा मातम करते हुए कर्बला पर ले जाकर ताजियों को दफन किया गया। मजलिस को जाकिर काजिम करबलाई ने संबोधित किया। इस दौरान खुशनेहाल गुड्डू, साजिद मंटू, तसकीन हैदर, काजिम रजा, नफीसुल आफताब, कैफी रिजवी आदि मौजूद रहे।
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