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Siddharthnagar News: किशोर की मौत के बाद परिजनों ने इमरजेंसी गेट पर जड़ा ताला
Mon, 07 Aug 2023 12:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 07 Aug 2023 12:29 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में बच्चे की मौत के बाद हुए हंगामे के दौरान बंद कर दिया गया इमरज
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के जनरल वार्ड में शनिवार रात 9:45 बजे किशोर की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने हंगामा कर दिया। उन्होंने इमरजेंसी गेट बंद कर ताला जड़ दिया। उसके बाद डॉक्टर-स्वास्थ्य कर्मी मौके से दूर हट गए। आधा घंटे तक अफरा तफरी का माहौल रहा, उसके बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाकर वापस भेजा। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन परिजनों ने इन्कार कर दिया।
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के भटपुरवा गांव निवासी 15 वर्षीय सुरेश पुत्र सवारे को उल्टी दस्त की शिकायत पर परिजनों ने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में शाम 4:15 बजे भर्ती कराया था। रात में किशोर की तबीयत बिगड़ने लगी, वार्ड में कोई डॉक्टर नहीं मौजूद नहीं था। स्टॉफ नर्स ऋचा जायसवाल ने बताया कि रात तबीयत बिगड़ी तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर से परामर्श लेने गई, जब वह वापस आई तो मरीज की तबीयत और गंभीर हो गई, उसके बाद फिर उसने डॉक्टर को बुलाया, लेकिन सारी कोशिश के बावजूद भी किशोर की मौत हो गई। उसके बाद गुस्साए परिजनों ने स्टॉफ नर्स को खरी खोटी सुनाई। जब वे जाने लगे तो इमरजेंसी गेट बंद कर व्यवस्था पर सवाल उठाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार सिंह ने बताया कि परिजन को समझा बुझाकर घर भेज दिया गया।
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वार्ड में थे 20 मरीज और इकलौती नर्स
जनरल वार्ड में 20 मरीज भर्ती थे, लेकिन इकलौती ऋचा जायसवाल ही ड्यूटी पर थीं। नियम के अनुसार वार्ड में एक जूनियर डॉक्टर, दो स्टॉफ नर्स व एक वार्ड ब्वाय की ड्यूटी होनी चाहिए। लेकिन शनिवार रात 11:40 बजे इस वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
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सीसीटीवी नहीं, कैसे होगी पहचान
मेडिकल काॅलेज में लगे एनएमसी के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्डिंग नहीं होती है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से कैमरे नहीं लगवाए हैं। ऐसी स्थिति में मारपीट या विवाद के दौरान साक्ष्य मिलना मुश्किल हो जाता है, जबकि यह भी प्रमाणित नहीं हो पाता है कि डॉक्टर ड्यूटी पर थे या नहीं।
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रात में वार्ड ब्वॉय के भरोसे थे वार्ड
किशोर की मौत के बाद हंगामा हुआ, इसके बावजूद रात में वार्डों में जूनियर डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिले। रात करीब 12 बजे मेडिसिन वार्ड में एक कैदी की सुरक्षा में दो पुलिस कर्मी थे, लेकिन जूनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। एक वार्ड ब्वाय ने बताया कि डॉक्टर साहब कुछ देर पहले ही गए हैं। इसी प्रकार सर्जिकल वार्ड में स्टॉफ नर्स एवं वार्ड ब्वाय ने बताया कि जब जरूरत पड़गी तो डॉक्टर साहब को बुलाया जाएगा। आर्थों सर्जरी वार्ड में वार्ड ब्वाय नहीं बता पाया कि डॉक्टर कहां हैं? हालांकि, पीआईसीयू वार्ड में डॉक्टर मौजूद थे।
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वर्जन
मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, पोस्टमार्टम होता तो मौत का कारण पता स्पष्ट होता। मेडिकल कॉलेज के कैमरे लगाने के लिए पत्र भेजा गया है। वार्ड में जूनियर डॉक्टरों के गायब रहने के मामले में जांच की जाएगी।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के भटपुरवा गांव निवासी 15 वर्षीय सुरेश पुत्र सवारे को उल्टी दस्त की शिकायत पर परिजनों ने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में शाम 4:15 बजे भर्ती कराया था। रात में किशोर की तबीयत बिगड़ने लगी, वार्ड में कोई डॉक्टर नहीं मौजूद नहीं था। स्टॉफ नर्स ऋचा जायसवाल ने बताया कि रात तबीयत बिगड़ी तो इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर से परामर्श लेने गई, जब वह वापस आई तो मरीज की तबीयत और गंभीर हो गई, उसके बाद फिर उसने डॉक्टर को बुलाया, लेकिन सारी कोशिश के बावजूद भी किशोर की मौत हो गई। उसके बाद गुस्साए परिजनों ने स्टॉफ नर्स को खरी खोटी सुनाई। जब वे जाने लगे तो इमरजेंसी गेट बंद कर व्यवस्था पर सवाल उठाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया। प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार सिंह ने बताया कि परिजन को समझा बुझाकर घर भेज दिया गया।
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वार्ड में थे 20 मरीज और इकलौती नर्स
जनरल वार्ड में 20 मरीज भर्ती थे, लेकिन इकलौती ऋचा जायसवाल ही ड्यूटी पर थीं। नियम के अनुसार वार्ड में एक जूनियर डॉक्टर, दो स्टॉफ नर्स व एक वार्ड ब्वाय की ड्यूटी होनी चाहिए। लेकिन शनिवार रात 11:40 बजे इस वार्ड में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
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सीसीटीवी नहीं, कैसे होगी पहचान
मेडिकल काॅलेज में लगे एनएमसी के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्डिंग नहीं होती है, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से कैमरे नहीं लगवाए हैं। ऐसी स्थिति में मारपीट या विवाद के दौरान साक्ष्य मिलना मुश्किल हो जाता है, जबकि यह भी प्रमाणित नहीं हो पाता है कि डॉक्टर ड्यूटी पर थे या नहीं।
रात में वार्ड ब्वॉय के भरोसे थे वार्ड
किशोर की मौत के बाद हंगामा हुआ, इसके बावजूद रात में वार्डों में जूनियर डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं मिले। रात करीब 12 बजे मेडिसिन वार्ड में एक कैदी की सुरक्षा में दो पुलिस कर्मी थे, लेकिन जूनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। एक वार्ड ब्वाय ने बताया कि डॉक्टर साहब कुछ देर पहले ही गए हैं। इसी प्रकार सर्जिकल वार्ड में स्टॉफ नर्स एवं वार्ड ब्वाय ने बताया कि जब जरूरत पड़गी तो डॉक्टर साहब को बुलाया जाएगा। आर्थों सर्जरी वार्ड में वार्ड ब्वाय नहीं बता पाया कि डॉक्टर कहां हैं? हालांकि, पीआईसीयू वार्ड में डॉक्टर मौजूद थे।
वर्जन
मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, पोस्टमार्टम होता तो मौत का कारण पता स्पष्ट होता। मेडिकल कॉलेज के कैमरे लगाने के लिए पत्र भेजा गया है। वार्ड में जूनियर डॉक्टरों के गायब रहने के मामले में जांच की जाएगी।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य