फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   After the announcement of the candidates, the political battle in Etawa intensified

प्रत्याशियों की घोषणा के बाद इटवा में सियासी जंग तेज

Thu, 03 Feb 2022 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 11:12 PM IST
विज्ञापन
After the announcement of the candidates, the political battle in Etawa intensified
प्रत्याशियों की घोषणा के बाद इटवा में सियासी जंग तेज
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। जिले की वीआईपी सीट में शुमार इटवा विधानसभा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख दलों से प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कवायद जोरों पर है।
पिछले चुनाव में हार का मुंह देखने वाले सपाई दिग्गज माता प्रसाद पांडेय इस बार फिर मैदान में हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री पद संभाल रहे डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी पर एक बार फिर दांव लगाया है। भाजपा से बागी हुए हरिशंकर सिंह, बसपा के प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। अरशद खुर्शीद, कांग्रेस का झंडा थामकर चुनावी समर में उतरे हैं।
विज्ञापन

सपा के बड़े नेता और मुलायम सिंह यादव के करीबी माता प्रसाद पांडेय एक बार फिर इटवा विधानसभा सीट से जोर-आजमाइश कर रहे हैं। इस सीट से वह जीत की दो हैट्रिक लगाकर, कुल छह बार चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 1980 में माता प्रसाद ने जनता पार्टी (सेक्यूलर) के टिकट पर पहली जीत दर्ज कर की थी। वर्ष 1985 में लोकदल और वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर लगातार कामयाबी हासिल कर उन्होंने जीत की पहली हैट्रिक लगाई। उसके बाद वर्ष 1991, 1993 और 1996 के चुनाव में उनकी हार की भी हैट्रिक लगी। जीत-हार की हैट्रिक लगाने के बाद एक बार फिर उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए सपा के टिकट से वर्ष 2002, 2007 और 2012 में कामयाबी का सिलसिला कायम रख, जीत की दूसरी हैट्रिक लगाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि, मोदी लहर में उन्हें पिछले वर्ष 2017 में हुए चुनाव में शिकस्त मिली और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए। इस सीट से पहली बार चुनाव लड़े, भाजपा के डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी विजई रहे। इस बड़ी जीत का इनाम भी डॉ. सतीश को मिला और उन्हें बेसिक शिक्षा, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया। भाजपा ने इस चुनाव में एक बार फिर डॉ. सतीश को अपना प्रत्याशी बनाया है। मोदी-योगी सरकार की नीतियों और क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की बदौलत एक बार फिर वह पूरी शिद्दत से चुनावी मैदान में डटे हुए हैं। वहीं बसपा ने भाजपा से आए हरिशंकर सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। उनकी गिनती विधानसभा के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में होती थी और वह पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।
पंचायत चुनाव में हुई उपेक्षा से नाराज हरिशंकर सिंह, बसपा से टिकट मिलने के बाद क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हैं। चुनावी जंग के बीच कांग्रेस पार्टी ने अरशद खुर्शीद पर दांव लगा कर लड़ाई और भी रोचक बना दिया है। पिछले चुनाव में अरशद ने बसपा के चुनाव पर टिकट लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। फिलहाल इटवा विधानसभा की जंग दिलचस्प होने वाली है और सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार, मतदाताओं को लुभाने के लिए हर संभव कोशिश करने में लगे हुए हैं।
अब तक नहीं खुला बसपा का खाता
सिद्धार्थनगर। इटवा विधानसभा में अब तक हुए चुनावों में बसपा का खाता नहीं खुला। पहली जीत दर्ज करने की कोशिश में वर्ष 2012, 2017 के चुनावों में बसपा यहां मजबूती से लड़ी तो, लेकिन जीत नहीं दर्ज कर पाई, लेकिन दूसरे स्थान पर जरूर रही।

सपा की प्रतिष्ठा से जुड़ी है इटवा सीट
सिद्धार्थनगर। सपा के लिए इटवा की सीट हमेशा प्रतिष्ठा का विषय रही है। छह बार विधायक रहे माता प्रसाद पांडेय, मंत्री पदों पर रहने के साथ सपा सरकार में दो बार विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भी संभाल चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed