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Siddharthnagar News: मिलावटी पनीर आपूर्ति रैकेट का खुलासा
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दूध से बनता पनीर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी गांव में पुलिस ने बड़े पनीर आपूर्ति के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। बेहद सस्ते दाम पर पनीर की आपूर्ति करने वाला यह गिरोह लंबे समय से जिले में सक्रिय था। शादी-समारोह, होटल-ढाबों से लेकर किराने की दुकानों तक इसकी आपूर्ति पहुंच रही थी।
मौके से पकड़े गए केमिकल, मिलावटी सामग्री और बड़ी मात्रा में तैयार पनीर ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है। पनीर की बरामदगी ने इस बात की पुष्टि की है कि जनपद में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल होता है।
आसपास के लोगों से जब इस बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि यह धंधा तकरीबन चार साल से चल रहा था। लगन शुरू होने के बाद से रफ्तार पकड़ लेता और दिन रात काम होता था। इसमें चुनिंदा लोग जुड़े थे जो आपूर्ति करते थे। क्योंकि, फैक्टरी तक खरीदार को नहीं लाया जाता था। अंदर उसकी नजर पड़ती तो धंधे पर ग्रहण लग जाता। इसलिए, मालिक, कॅरियर, काम करने वाले अन्य लोगों के अलावा यहां कोई नहीं आता था।
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डिमांड कितनी भी हो, पूरी हो जाती थी। सूत्रों की माने तो लगन में 25 से 35 क्विंटल की खपत थी। वहीं, नेटवर्क की बात करें तो जनपद के इटवा, डुमरियागंज, उतरौला, रुधौली और बांसी तहसील तक फैला हुआ था।
पैठ और कारोबार का दायरा बढ़ाने में सबसे अधिक सहयोग बावर्ची करते थे। जो कुछ तो दिल्ली में रहते हैं जो लगन शुरु होते ही आ जाते और कुछ नियमित यहीं रहते हैं। जहां उनका सट्टा होता है, मालिक से कहते हैं कि हमारे यहां अच्छा और सस्ता पनीर मिल जाएगा। क्वालिटी अच्छी रहेगी। इस प्रकार सप्लाई और बढ़ जाती है।
वहीं, जनपद की बात करें तो प्रतिदिन इस लगन में 100 क्विंटल से अधिक पनीर की खपत है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस वस्तु को मिलाकर यह पनीर तैयार की गई है, वह सेहत के लिए नुकसानदेह है और किडनी तक को प्रभावित कर सकता है।
कैसे चलता था गिरोह का नेटवर्क: गिरोह सबसे पहले छोटे-बड़े दुकानदारों से संपर्क करता और आधे दाम पर पनीर आपूर्ति का झांसा देता था। 360–400 रुपये किलो बिकने वाला पनीर यह लोग 200 रुपये किलो में देने का दावा करते थे।
लालच में आकर कई दुकानदार नियमित खरीदार बन चुके थे। क्याेंकि, मिलावट के इस खेल में उनका मुनाफा अधिक हो जाता है। बाकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा, इससे दुकानदारों को लेनादेना नहीं है। इसलिए मिलावट का धंधा पैर पसार रहा था।
केमिकल से तैयार पनीर– लागत बेहद कम, मुनाफा कई गुना: जांच में सामने आया कि यह पनीर रासायनिक मिश्रण, सिंथेटिक फैट, स्टार्च, यूरिया और डिटर्जेंट जैसे घातक पदार्थों से तैयार किया जाता था।
दूध का इस्तेमाल बहुत कम या नगण्य हाइड्रोजनाइज्ड फैट, आर्टिफिशियल थिकनर, सफेदी के लिए ब्लिचिंग सामग्री, जमाने के लिए केमिकल का उपयोग करते थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सेवन बहुत ही घातक है।
कैसे पकड़ा गया पूरा गिरोह: मिश्रौलिया थाने की पुलिस को शिकायत मिल रही थी कि जिले में बेहद सस्ता पनीर आपूर्ति हो रहा है, जिसकी क्वालिटी बेहद खराब है। निगरानी के बाद पुलिस ने नागचौरी गांव में छापा मारा।
मौके से दर्जनों किलो नकली पनीर, केमिकल, कोयला भट्ठी और सिंथेटिक फैट के डिब्बे बरामद हुए। दो कॅरियर और मुख्य सप्लायर को हिरासत में लिया गया। लैब रिपोर्ट के लिए सैंपल भेजा गया है।
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सिद्धार्थनगर। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी गांव में पुलिस ने बड़े पनीर आपूर्ति के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। बेहद सस्ते दाम पर पनीर की आपूर्ति करने वाला यह गिरोह लंबे समय से जिले में सक्रिय था। शादी-समारोह, होटल-ढाबों से लेकर किराने की दुकानों तक इसकी आपूर्ति पहुंच रही थी।
मौके से पकड़े गए केमिकल, मिलावटी सामग्री और बड़ी मात्रा में तैयार पनीर ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है। पनीर की बरामदगी ने इस बात की पुष्टि की है कि जनपद में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल होता है।
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आसपास के लोगों से जब इस बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि यह धंधा तकरीबन चार साल से चल रहा था। लगन शुरू होने के बाद से रफ्तार पकड़ लेता और दिन रात काम होता था। इसमें चुनिंदा लोग जुड़े थे जो आपूर्ति करते थे। क्योंकि, फैक्टरी तक खरीदार को नहीं लाया जाता था। अंदर उसकी नजर पड़ती तो धंधे पर ग्रहण लग जाता। इसलिए, मालिक, कॅरियर, काम करने वाले अन्य लोगों के अलावा यहां कोई नहीं आता था।
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डिमांड कितनी भी हो, पूरी हो जाती थी। सूत्रों की माने तो लगन में 25 से 35 क्विंटल की खपत थी। वहीं, नेटवर्क की बात करें तो जनपद के इटवा, डुमरियागंज, उतरौला, रुधौली और बांसी तहसील तक फैला हुआ था।
पैठ और कारोबार का दायरा बढ़ाने में सबसे अधिक सहयोग बावर्ची करते थे। जो कुछ तो दिल्ली में रहते हैं जो लगन शुरु होते ही आ जाते और कुछ नियमित यहीं रहते हैं। जहां उनका सट्टा होता है, मालिक से कहते हैं कि हमारे यहां अच्छा और सस्ता पनीर मिल जाएगा। क्वालिटी अच्छी रहेगी। इस प्रकार सप्लाई और बढ़ जाती है।
वहीं, जनपद की बात करें तो प्रतिदिन इस लगन में 100 क्विंटल से अधिक पनीर की खपत है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस वस्तु को मिलाकर यह पनीर तैयार की गई है, वह सेहत के लिए नुकसानदेह है और किडनी तक को प्रभावित कर सकता है।
कैसे चलता था गिरोह का नेटवर्क: गिरोह सबसे पहले छोटे-बड़े दुकानदारों से संपर्क करता और आधे दाम पर पनीर आपूर्ति का झांसा देता था। 360–400 रुपये किलो बिकने वाला पनीर यह लोग 200 रुपये किलो में देने का दावा करते थे।
लालच में आकर कई दुकानदार नियमित खरीदार बन चुके थे। क्याेंकि, मिलावट के इस खेल में उनका मुनाफा अधिक हो जाता है। बाकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा, इससे दुकानदारों को लेनादेना नहीं है। इसलिए मिलावट का धंधा पैर पसार रहा था।
केमिकल से तैयार पनीर– लागत बेहद कम, मुनाफा कई गुना: जांच में सामने आया कि यह पनीर रासायनिक मिश्रण, सिंथेटिक फैट, स्टार्च, यूरिया और डिटर्जेंट जैसे घातक पदार्थों से तैयार किया जाता था।
दूध का इस्तेमाल बहुत कम या नगण्य हाइड्रोजनाइज्ड फैट, आर्टिफिशियल थिकनर, सफेदी के लिए ब्लिचिंग सामग्री, जमाने के लिए केमिकल का उपयोग करते थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सेवन बहुत ही घातक है।
कैसे पकड़ा गया पूरा गिरोह: मिश्रौलिया थाने की पुलिस को शिकायत मिल रही थी कि जिले में बेहद सस्ता पनीर आपूर्ति हो रहा है, जिसकी क्वालिटी बेहद खराब है। निगरानी के बाद पुलिस ने नागचौरी गांव में छापा मारा।
मौके से दर्जनों किलो नकली पनीर, केमिकल, कोयला भट्ठी और सिंथेटिक फैट के डिब्बे बरामद हुए। दो कॅरियर और मुख्य सप्लायर को हिरासत में लिया गया। लैब रिपोर्ट के लिए सैंपल भेजा गया है।