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रेकी कर भैंस चोरी करने वाले गिरोह का एक सदस्य गिरफ्तार
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रेकी कर भैंस चोरी करने वाले गिरोह का एक सदस्य गिरफ्तार
- व्यापारी बन दिन में देखते थे भैंस, रात को चोरी कर भेज देते थे नेपाल
- ढेबरुआ थाने की पुलिस ने क्षेत्र के औरहवा गांव के पास से पकड़ा
परसा(सिद्धार्थनगर)। व्यापारी बनकर दिन में सीमावर्ती गांवों में घूमकर भैंस का मोलभाव और रात में चोरी कर नेपाल भेजने वाले गिरोह के एक सदस्य को ढेबरुआ पुलिस ने मंगलवार सुबह औरहवा से दबोच लिया। उसके कब्जे से चाकू बरामद हुआ है। पूछताछ करने के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में भैंस की चोरी करता है और नेपाल में ले जाकर बेच देता है।
एसओ ढेबरुआ जीवन त्रिपाठी ने बताया कि पांच मई की रात एक गांव में भैंस चोरी करके ले जाने लगे। इसी बीच पशु पालक जग गया और चोर भैंस को छोड़कर भाग गए थे। मामले की जानकारी थाने को मिली। इसके बाद पुलिस टीम अलर्ट हो गई। पुलिस को जानकारी मिली की कुछ लोग व्यापारी बनकर दिन क्षेत्र के गांवों में पशु पालकों से मोलभाव करते हैं और रात में भैंस की चोरी करके नेपाल के चंद्ररौटा बाजार में पहुंचकर बेचते हैं। पुलिस टीम छानबीन में लगी थी, तभी मंगलवार सुबह सूचना मिली की भैंस चोरी करने वाले गिरोह का एक सदस्य क्षेत्र के औरहवा गांव के पास मौजूद है। सूचना को संज्ञान में लेते हुए टीम मौके पर पहुंच गई। यहां एक संदिग्ध दिखा जो पुलिस को देखकर भागने लगा। जवानों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम रफीक निवासी बसंतपुर थाना शोहरतगढ़ बताया। लिखापढ़ी करके उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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पूछताछ में दी यह जानकारी
पूछताछ में पकड़े गए शातिर ने बताया गया कि हम लोग दिन में घूम कर रेकी करते हैं, जो भैंस बाहर बंधी रहती है उनको खोलकर पैदल रास्ते से नेपाल में ले जाकर चंद्ररौटा में अच्छे दाम पर बेचकर अपना शौक पूरा करते हैं। इसमें किसी प्रकार का खतरा भी नहीं है।
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अपराध छोटा, पशु पालकों की टूट जाती है कमर
पशु की चोरी पुलिस और आम जनता के लिए बहुत छोटा अपराध लगता है। लेकिन पशु पालक भगत, रामभुआल आदि का कहना है कि एक भैंस अगर स्वस्थ्य है और दूध दे रही तो कम से कम उसकी कीमत 70 हजार और अधिकमत सवा लाख रुपये तक हो गई है। चोरी होने पर पशु पालक भटककर शांत हो जाता है, लेकिन उसकी आर्थिक रूप से कमर टूट जाती है। इस प्रकार के अपराध को नजरअंदाज करने के बजाए, उस पर कार्रवाई की जरूरत है।
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- व्यापारी बन दिन में देखते थे भैंस, रात को चोरी कर भेज देते थे नेपाल
- ढेबरुआ थाने की पुलिस ने क्षेत्र के औरहवा गांव के पास से पकड़ा
परसा(सिद्धार्थनगर)। व्यापारी बनकर दिन में सीमावर्ती गांवों में घूमकर भैंस का मोलभाव और रात में चोरी कर नेपाल भेजने वाले गिरोह के एक सदस्य को ढेबरुआ पुलिस ने मंगलवार सुबह औरहवा से दबोच लिया। उसके कब्जे से चाकू बरामद हुआ है। पूछताछ करने के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में भैंस की चोरी करता है और नेपाल में ले जाकर बेच देता है।
एसओ ढेबरुआ जीवन त्रिपाठी ने बताया कि पांच मई की रात एक गांव में भैंस चोरी करके ले जाने लगे। इसी बीच पशु पालक जग गया और चोर भैंस को छोड़कर भाग गए थे। मामले की जानकारी थाने को मिली। इसके बाद पुलिस टीम अलर्ट हो गई। पुलिस को जानकारी मिली की कुछ लोग व्यापारी बनकर दिन क्षेत्र के गांवों में पशु पालकों से मोलभाव करते हैं और रात में भैंस की चोरी करके नेपाल के चंद्ररौटा बाजार में पहुंचकर बेचते हैं। पुलिस टीम छानबीन में लगी थी, तभी मंगलवार सुबह सूचना मिली की भैंस चोरी करने वाले गिरोह का एक सदस्य क्षेत्र के औरहवा गांव के पास मौजूद है। सूचना को संज्ञान में लेते हुए टीम मौके पर पहुंच गई। यहां एक संदिग्ध दिखा जो पुलिस को देखकर भागने लगा। जवानों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम रफीक निवासी बसंतपुर थाना शोहरतगढ़ बताया। लिखापढ़ी करके उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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पूछताछ में दी यह जानकारी
पूछताछ में पकड़े गए शातिर ने बताया गया कि हम लोग दिन में घूम कर रेकी करते हैं, जो भैंस बाहर बंधी रहती है उनको खोलकर पैदल रास्ते से नेपाल में ले जाकर चंद्ररौटा में अच्छे दाम पर बेचकर अपना शौक पूरा करते हैं। इसमें किसी प्रकार का खतरा भी नहीं है।
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अपराध छोटा, पशु पालकों की टूट जाती है कमर
पशु की चोरी पुलिस और आम जनता के लिए बहुत छोटा अपराध लगता है। लेकिन पशु पालक भगत, रामभुआल आदि का कहना है कि एक भैंस अगर स्वस्थ्य है और दूध दे रही तो कम से कम उसकी कीमत 70 हजार और अधिकमत सवा लाख रुपये तक हो गई है। चोरी होने पर पशु पालक भटककर शांत हो जाता है, लेकिन उसकी आर्थिक रूप से कमर टूट जाती है। इस प्रकार के अपराध को नजरअंदाज करने के बजाए, उस पर कार्रवाई की जरूरत है।