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Siddharthnagar News: इलाज में देरी पड़ सकती है भारी, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
Thu, 23 Jul 2026 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:22 AM IST
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सिद्धार्थनगर। मानसून के सक्रिय होने के साथ ही जिले में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया और दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि शुरुआती बुखार को सामान्य वायरल समझकर इलाज में देरी करना गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों, गर्भवतियों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
बारिश के कारण जलभराव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और दूषित पानी के सेवन से संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग भी लोगों से बुखार, सांस लेने में तकलीफ, तेज सिरदर्द, शरीर पर चकत्ते, उल्टी या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील कर रहा है।
डॉ. गौरव दुबे के अनुसार इस समय सबसे अधिक वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया, फूड पॉइजनिंग और दस्त के मरीज आ रहे हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने, मलेरिया में तेज ठंड के साथ बुखार और निमोनिया में सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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डॉ. आशुतोष शुक्ल के अनुसार बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। वहीं गर्भवतियों में बुखार और संक्रमण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
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बुखार के पहले दिन से सातवें दिन तक क्या करें
- पहला-दूसरा दिन तापमान नोट करें।
- पर्याप्त पानी और ओआरएस लें।
- डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल लें।
- बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें।
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तीसरा-चौथा दिन
- बुखार बना रहे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
- डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड की जांच जरूरत अनुसार कराएं।
- आराम करें और हल्का भोजन लें।
पांचवां-सातवां दिन
- लगातार बुखार, सांस फूलना, प्लेटलेट्स घटना, बेहोशी, तेज कमजोरी या खून आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
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बच्चों, गर्भवतियों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी
- मच्छरदानी और पूरे कपड़ों का प्रयोग करें।
- उबला या साफ पानी ही पिएं।
- बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
- बच्चों में सुस्ती, दूध न पीना या तेज सांस चलना दिखे तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- गर्भवतियों में किसी भी प्रकार के बुखार को नजरअंदाज न करें।
- बुजुर्गों की शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें।
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इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- तीन दिन से अधिक तेज बुखार
- सांस लेने में तकलीफ
- लगातार उल्टी या दस्त
- शरीर पर लाल चकत्ते
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- तेज सिरदर्द और गर्दन में अकड़न
- बेहोशी या अत्यधिक सुस्ती
- पेशाब कम होना या अत्यधिक कमजोरी
(सभी सुझाव मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के अनुसार)
बारिश के कारण जलभराव, मच्छरों की बढ़ती संख्या और दूषित पानी के सेवन से संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग भी लोगों से बुखार, सांस लेने में तकलीफ, तेज सिरदर्द, शरीर पर चकत्ते, उल्टी या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील कर रहा है।
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डॉ. गौरव दुबे के अनुसार इस समय सबसे अधिक वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, निमोनिया, फूड पॉइजनिंग और दस्त के मरीज आ रहे हैं। डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने, मलेरिया में तेज ठंड के साथ बुखार और निमोनिया में सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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डॉ. आशुतोष शुक्ल के अनुसार बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। वहीं गर्भवतियों में बुखार और संक्रमण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
बुखार के पहले दिन से सातवें दिन तक क्या करें
- पहला-दूसरा दिन तापमान नोट करें।
- पर्याप्त पानी और ओआरएस लें।
- डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल लें।
- बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें।
तीसरा-चौथा दिन
- बुखार बना रहे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
- डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड की जांच जरूरत अनुसार कराएं।
- आराम करें और हल्का भोजन लें।
पांचवां-सातवां दिन
- लगातार बुखार, सांस फूलना, प्लेटलेट्स घटना, बेहोशी, तेज कमजोरी या खून आने जैसे लक्षण हों तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
बच्चों, गर्भवतियों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी
- मच्छरदानी और पूरे कपड़ों का प्रयोग करें।
- उबला या साफ पानी ही पिएं।
- बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
- बच्चों में सुस्ती, दूध न पीना या तेज सांस चलना दिखे तो तुरंत अस्पताल जाएं।
- गर्भवतियों में किसी भी प्रकार के बुखार को नजरअंदाज न करें।
- बुजुर्गों की शुगर और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें।
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
- तीन दिन से अधिक तेज बुखार
- सांस लेने में तकलीफ
- लगातार उल्टी या दस्त
- शरीर पर लाल चकत्ते
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- तेज सिरदर्द और गर्दन में अकड़न
- बेहोशी या अत्यधिक सुस्ती
- पेशाब कम होना या अत्यधिक कमजोरी
(सभी सुझाव मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों के अनुसार)