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Siddharthnagar News: खामेनेई की मौत पर हटवा बुजुर्ग में निकाला कैंडल मार्च
Thu, 05 Mar 2026 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:59 PM IST
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डुमरियागंज क्षेत्र के हटवा बुज़ुर्ग में निकाला गया कैंडल मार्च। संवाद
भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के हटवा बुजुर्ग में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर बुधवार की रात कैंडल मार्च निकाला गया।
हटवा के जांबाज हुसैन इमाम बारगाह से मौलाना सलीम रजा की अगुवाई में शुरू हुआ मार्च गांव के अंदर भ्रमण करते हुए कर्बला तक पंहुचा, जहां यह एक सभा में बदल गया।
जुलूस में सैकड़ों की संख्या में बच्चे, बूढ़े और जवान शामिल थे। सभी के हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां और अपने कौम के रहबर अली खामेनेई की तस्वीरें थीं।
मौलाना जमाल हैदर रिजवी ने कहा अली खामेनेई ने कर्बला वालों की तरह जिंदगी बिताई और कर्बला वालों की तरह शहीद होकर ये साबित कर दिया की अली वाले मौत से नहीं डरते बल्कि मौत को गले लगाते है। खामेनेई इंसानियत और मानवता के सबसे बड़े हितैषी और शुभचिंतक थे। फिलस्तीन, लेबनान, बहरैन, सीरिया सहित कही भी निर्दोष लोगों पर जुल्म और अत्याचार होता था तो वे न सिर्फ विरोध जताते थे और बेकसूर बच्चों और महिलाओं की रक्षा करते थे। आज भी सभी के दिलों में जिंदा हैं। इंजीनियर इमरान लतीफ ने कहा कि आज पूरी दुनिया के हक पसंदों के लिए यह शोक की घड़ी है।
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इस दौरान इंतजार हुसैन रिजवी, गुलाम हुसैन, अंसार हुसैन, बशारत हुसैन, अजीम हल्लौरी आदि मौजूद रहे।
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हटवा के जांबाज हुसैन इमाम बारगाह से मौलाना सलीम रजा की अगुवाई में शुरू हुआ मार्च गांव के अंदर भ्रमण करते हुए कर्बला तक पंहुचा, जहां यह एक सभा में बदल गया।
जुलूस में सैकड़ों की संख्या में बच्चे, बूढ़े और जवान शामिल थे। सभी के हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां और अपने कौम के रहबर अली खामेनेई की तस्वीरें थीं।
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मौलाना जमाल हैदर रिजवी ने कहा अली खामेनेई ने कर्बला वालों की तरह जिंदगी बिताई और कर्बला वालों की तरह शहीद होकर ये साबित कर दिया की अली वाले मौत से नहीं डरते बल्कि मौत को गले लगाते है। खामेनेई इंसानियत और मानवता के सबसे बड़े हितैषी और शुभचिंतक थे। फिलस्तीन, लेबनान, बहरैन, सीरिया सहित कही भी निर्दोष लोगों पर जुल्म और अत्याचार होता था तो वे न सिर्फ विरोध जताते थे और बेकसूर बच्चों और महिलाओं की रक्षा करते थे। आज भी सभी के दिलों में जिंदा हैं। इंजीनियर इमरान लतीफ ने कहा कि आज पूरी दुनिया के हक पसंदों के लिए यह शोक की घड़ी है।
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इस दौरान इंतजार हुसैन रिजवी, गुलाम हुसैन, अंसार हुसैन, बशारत हुसैन, अजीम हल्लौरी आदि मौजूद रहे।