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मांस-मदिरा के सेवन से बचने की अपील
Siddhartha nagar
Updated Mon, 17 Nov 2014 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जिला जेल के सामने स्थित मैदान में बाबा जय गुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी संत उमाकांत ने रविवार को लोगों शाकाहार के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान लोगों की भारी भीड़ जुटी।
संत उमाकांत ने कहा कि मनुष्य का जीवन मिला है तो अच्छे कार्य करने चाहिए। जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए। लोगों की सहायता करनी चाहिए। जीवन में असहाय प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए। मांस, मदिरा का सेवन करने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। इसलिए अच्छे मार्ग पर चलकर जीवन को सुखमय बनना चाहिए। मांस का भक्षण करने से बुद्धि के साथ शरीर में कई प्रकार की विकृति आती है। सदा जीव की रक्षा करनी चाहिए। इससे जीवन सुखमय होता है। मनुष्य का जीवन बहुत पुण्य करने के बाद ही मिलता है। इसलिए जीव की रक्षा करने का संकल्प लेकर ही जाएं। उन्होंने कहा कि शाकाहारी भोजन के करने से आत्मा को शांति मिलती है। किसी प्रकार की हानि नहीं होती। मनुष्य को भजन-कीर्तन में आस्था रखनी चाहिए। संतों के प्रवचन में जाकर ज्ञाप की प्राप्ति करनी चाहिए। हर प्राणी को अच्छे कर्म के रास्ते पर चलकर परमात्मा के ध्यान में लीन रहना चाहिए। इससे अच्छाई का मार्ग मिलता है। इस दौरान सत्यदेव पाठक, सत्यजीत सिंह देशमुख, जगदीश प्रसाद शर्मा, वरुणेंद्र प्रताप सिंह, मोतीलाल शर्मा, सुनील कौशिक और कमला प्रसाद त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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संत उमाकांत ने कहा कि मनुष्य का जीवन मिला है तो अच्छे कार्य करने चाहिए। जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए। लोगों की सहायता करनी चाहिए। जीवन में असहाय प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए। मांस, मदिरा का सेवन करने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। इसलिए अच्छे मार्ग पर चलकर जीवन को सुखमय बनना चाहिए। मांस का भक्षण करने से बुद्धि के साथ शरीर में कई प्रकार की विकृति आती है। सदा जीव की रक्षा करनी चाहिए। इससे जीवन सुखमय होता है। मनुष्य का जीवन बहुत पुण्य करने के बाद ही मिलता है। इसलिए जीव की रक्षा करने का संकल्प लेकर ही जाएं। उन्होंने कहा कि शाकाहारी भोजन के करने से आत्मा को शांति मिलती है। किसी प्रकार की हानि नहीं होती। मनुष्य को भजन-कीर्तन में आस्था रखनी चाहिए। संतों के प्रवचन में जाकर ज्ञाप की प्राप्ति करनी चाहिए। हर प्राणी को अच्छे कर्म के रास्ते पर चलकर परमात्मा के ध्यान में लीन रहना चाहिए। इससे अच्छाई का मार्ग मिलता है। इस दौरान सत्यदेव पाठक, सत्यजीत सिंह देशमुख, जगदीश प्रसाद शर्मा, वरुणेंद्र प्रताप सिंह, मोतीलाल शर्मा, सुनील कौशिक और कमला प्रसाद त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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