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कांग्रेस ने युवा चेहरे पर भरोसा जताया
Siddhartha nagar
Updated Fri, 14 Mar 2014 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज संसदीय सीट से कांग्रेस ने गोंडा निवासी 34 वर्षीय तरुण पटेल को उम्मीदवार बनाकर युवा चेहरे पर भरोसा जताया है। तरुण एनएसयूआई में कई अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। तरुण की ननिहाल जिले के इटवा तहसील में है।
जगदंबिका पाल के पार्टी छोड़ने के बाद डुमरियागंज सीट से कांग्रेस ने तरुण को बड़ी जिम्मेदारी दी है। वह गोंडा जिले के ग्राम पंचायत घारीघाटी के रहरवा गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता श्रीराम चौधरी ग्राम प्रधान रह चुके हैं। वह सैदुल्लाह नगर विधानसभा क्षेत्र (अब गौरा विधानसभा सीट) से चुनाव भी लड़ चुके हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति के जरिये सियासी सफर शुरू करने वाले तरुण 2004-05 में कला संकाय प्रतिनिधि और 2005-06 में जूनियर लाइब्रेरियन रह चुके हैं। मायावती ने जब छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाया तो 2007 में विरोध करने पर इन्हें 17 दिन जेल काटनी पड़ी। इसके बाद 2008 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ बहाली के लिए संघर्ष को लेकर जेल जाना पड़ा था।
वह एनएसयूआई से जुड़े रहे। छात्रसंघ के लिए प्रदेश सरकार के खिलाफ उनके संघर्ष को देखते हुए 2007 से 2010 तक एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिली। तरुण 30 जुलाई 2010 से 16 मार्च 2013 तक मध्य जोन के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष रहे। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव की जिम्मेदारी भी संभाले हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से कांग्रेस जहां युवाओं को खुद से जोड़ने की कोशिश करेगी, वहीं पिछड़े वर्ग के वोट जुटाने में भी मदद मिल सकती है।
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तरुण ने फोन पर बातचीत में कहा कि पार्टी के विश्वास और मतदाताओं की इच्छाओं पर खरा उतरना पहली प्राथमिकता होगी।
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जगदंबिका पाल के पार्टी छोड़ने के बाद डुमरियागंज सीट से कांग्रेस ने तरुण को बड़ी जिम्मेदारी दी है। वह गोंडा जिले के ग्राम पंचायत घारीघाटी के रहरवा गांव के रहने वाले हैं। इनके पिता श्रीराम चौधरी ग्राम प्रधान रह चुके हैं। वह सैदुल्लाह नगर विधानसभा क्षेत्र (अब गौरा विधानसभा सीट) से चुनाव भी लड़ चुके हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी से छात्र राजनीति के जरिये सियासी सफर शुरू करने वाले तरुण 2004-05 में कला संकाय प्रतिनिधि और 2005-06 में जूनियर लाइब्रेरियन रह चुके हैं। मायावती ने जब छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाया तो 2007 में विरोध करने पर इन्हें 17 दिन जेल काटनी पड़ी। इसके बाद 2008 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ बहाली के लिए संघर्ष को लेकर जेल जाना पड़ा था।
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वह एनएसयूआई से जुड़े रहे। छात्रसंघ के लिए प्रदेश सरकार के खिलाफ उनके संघर्ष को देखते हुए 2007 से 2010 तक एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिली। तरुण 30 जुलाई 2010 से 16 मार्च 2013 तक मध्य जोन के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष रहे। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सचिव की जिम्मेदारी भी संभाले हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से कांग्रेस जहां युवाओं को खुद से जोड़ने की कोशिश करेगी, वहीं पिछड़े वर्ग के वोट जुटाने में भी मदद मिल सकती है।
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तरुण ने फोन पर बातचीत में कहा कि पार्टी के विश्वास और मतदाताओं की इच्छाओं पर खरा उतरना पहली प्राथमिकता होगी।