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Siddharthnagar News: 86 नए स्वास्थ्य उपकेंद्र बनेंगे, घर के पास मिलेगा इलाज

Tue, 18 Feb 2025 10:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Feb 2025 10:45 PM IST
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86 new health sub-centres will be built, treatment will be available near home
भनवापुर के बिजवार बढ़ई स्थित आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर में मरीज का इलाज करती सीएचओ विंदू शुक्ला।
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। जल्द ही जिले की तकरीबन पांच लाख की आबादी को सामान्य बीमारी होने पर घर के पास ही इलाज की सुविधा मिलेगी। इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। क्योंकि निचले स्तर पर स्वास्थ्य का ढांचा मजबूत बनाने के लिए एक साथ 86 स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
इसमें कागजी काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही यह उपकेंद्र बीमार लोगों के लिए अस्तित्व में आ जाएंगे। यह जांच की सुविधाओं से लैस होगा। यहां शुगर, बीपी, ओरल कैंसर, टायफायड, डेंगू, मलेरिया आदि निशुल्क जांच की सुविधा रहेगी। मरीज की जांच करके दवाएं दी जाएंगी।
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माना जा रहा है कि इसका संचालन होने से बड़े अस्पतालों में मरीजों का बोझ कम होगा। वहीं, सामान्य बुखार और अन्य छोटी स्वास्थ्य समस्या होने पर मरीजों को भी बड़े अस्पताल के चक्कर में पूरे दिन परेशान नहीं होना पड़ेगा। आबादी बढ़ने के साथ- साथ बीमार होने वालों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।
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ऐसे में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की भारी भीड़ हो रही है। हाल यह हो जाता है कि न तो मरीजों का समय से इलाज हो पाता है और न ही समय से जांच।
सामान्य बीमारी जैसे बुखार, उल्टी दस्ता, शुगर और ब्लड प्रेशर होने, सिर दर्द वाले मरीज भी पहुंच जाते हैं। इस वजह से इलाज में आपाधापी वाली स्थिति बन जाती है। मरीजों को परेशानी होती ही है। साथ ही जांच और इलाज में मुसीबत बढ़ जाती है।
बड़े अस्पतालों पर मरीजों की भीड़ कम हो और घर के नजदीक मरीज का आसानी से इलाज हो सके। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा उपकेंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें एक उपकेंद्र पांच से सात हजार की आबादी के इलाज का जिम्मा है।
यह शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण तक के लिए व्यवस्था की गई है। सरकारी भवन नहीं है तो निजी भवन में संचालित करने की व्यवस्था है। जनपद की आबादी तकरीबन 30 के करीब पहुंच चुकी है।
शासन के नियम के अनुसार जनपद में 600 उपकेंद्र की जरूरत है। मौजूदा समय में 314 संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य का ढांचा मजबूत करने के लिए एक साथ 86 उप केंद्र बनाने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अस्तित्व में आने से लगभग पांच लाख की आबादी को सामान्य बीमारी होने पर घर के नजदीक इलाज मिल सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एक केंद्र को चालू करने में पहले चरण में भवन और अन्य संसाधन पर 11 लाख रुपये से अधिक खर्च किया जाना है। इसमें कई करोड़ रुपये खर्च होंगे। विभागीय कार्य आखिरी चरण में है। माना जा रहा है कि जल्द ही उपकेंद्र शुरू हो जाएंगे। इससे जनपद की बड़ी आबादी को इलाज में सहूलियत मिलेगी।
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