फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   ग्लैंडर्स पीड़ित दो घोड़ों को मौत की नींद सुलाया

ग्लैंडर्स पीड़ित दो घोड़ों को मौत की नींद सुलाया

Sat, 19 May 2018 11:28 PM IST
siddharthnagar
siddharthnagar Updated Sat, 19 May 2018 11:28 PM IST
विज्ञापन
ग्लैंडर्स पीड़ित दो घोड़ों को मौत की नींद सुलाया
सिद्धार्थनगर।अश्व प्रजाति के लिए जानलेवा साबित होने वाले ग्लैंडर्स फार्सी का संक्रमण जिले तक पहुंच गया है। जिले में तीन घोड़ों में इसकी पुष्टि होने पर दो को मौत की नींद सुला दिया गया, जबकि एक की पहले की मौत हो चुकी है। ये सभी घोड़े जिले के बांसी तहसील के मिठवल ब्लॉक के करही ईंट काम करते थे। जिले में इस बीमारी की पुष्टि होने पर पशुपालकों में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करही भट्ठे से तीन किलोमीटर के दायरे में आ रहे सभी ईंट-भट्ठों के घोड़ों-खच्चरों पर नजर रखी जा रही है। इनके रक्त के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे।
विज्ञापन


पशु विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में घोड़ा व खच्चर की संख्या लगभग तीन हजार के करीब है। यहां गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, बरेली, मेरठ, बुलंदशहर के घोड़े आते हैं। जो अक्टूबर से जून तक भट्ठों पर काम करते हैं। करही ईंट भट्ठे के तीन घोड़ों में लक्षण दिखने पर रक्त का नमूना जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी पुष्टि हुई। दो घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया गया है। ये दोनों घोड़े बहराइच जिले के निवासी रईस के थे। वहीं बहराइच जनपद निवासी रहीम के घोड़े की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं पशु चिकित्सक बीमारी का संक्रमण मिलने के बाद अन्य घोड़ों की जांच में जुट गए हैं। 16 मई को मिठवल क्षेत्र के ही रामनगर ईंट भट्ठे के घोड़ों का ब्लड सेंपल भेजा गया है। वहीं शनिवार मिठवल क्षेत्र के रमवापुर10 घोड़े- खच्चरों के रक्त के नमूने लिए गए।
विज्ञापन



इंसान भी आ सकता है ग्लैडर्स की चपेट में
सिद्धार्थनगर। पशु चिकित्सकों की माने तो यह बीमारी संक्रमित है। आस-पास रहने पर भी हो जाती है। इस बीमारी की चपेट में घोड़ा, खच्चर के साथ इंसान भी आ सकता है। चिकित्सकों की माने तो इस बीमारी पर काबू पाने के लिए अब तक कोई दवा तैयार नहीं हो पाई है। बीमारी की पुष्टि होने के बाद घोड़े या अश्व प्रजाति के पशु को इंजेक्शन देकर मार दिया जाता है। नहीं तो अन्य लोगों में भी बीमारी हो जाता है। वर्ष 2000 में पहली बार अमेरिका में पाया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


बीमारी के लक्षण
पशु विभाग के अनुसार ग्लैंडर्स बीमारी होने पर घोड़ों या अश्व प्रजाति पशुओं की नाक से हरे व पीले रंग का पानी निकलता है। शरीर के पूरे हिस्से पर गांठ बन जाती है और उससे पानी निकलने लगता है। यही प्रमुख लक्षण है। स्वास्थ्य बहुत तेजी से गिरता है। मगर अखिरी सांस तक वह भोजन नहीं छोड़ता है।


घोड़ों पर रखी जा रही नजर
तीन घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी की पुष्टि हुई थी, जिसमें एक की मौत हो गई थी। जबकि दो को इंजेक्शन देकर मार दिया गया। क्षेत्र के अन्य भट्ठों पर काम करने वाले घोड़ों पर नजर रखी जा रही है। इनके रक्त के नमूने लिए जाएंगे।

डॉ. फणीश सिंह सीवीओ सिद्धार्थनगर।

नमूने जांच को भेजे गए
सिद्धार्थनगर। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उदय भान गौड़ ने बताया कि क्षेत्र के अन्य भट्ठों के घोड़ों के रक्त के नमूने जांच के लिए अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार (हरियाणा) में भेजे गए हैं। विभागीय टीम निगरानी कर रही है। यहां से रिपोर्ट आने में 15 दिन का समय लगता है। इसके अलावा इस बीमारी की जांच कहीं नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed