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नियति का था फैसला, औरों के लिए बन गई हौसला
Wed, 23 Jan 2019 10:34 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Wed, 23 Jan 2019 10:34 PM IST
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नीतू सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिले की अपराजिता को क्या आप जानते हैं? अगर नहीं तो हम आपका उनसे परिचय करा देते हैं। नाम है नीतू सिंह, उम्र 22 साल और पेशे से हैं किसान। जी हां, वह दम भरती हैं उनके सपनों में, जिन्हें अपने भविष्य की राह धुंधली नजर आती है। यही नहीं, उन्होंने जिद ठान रखी है आसमान छूने की और कायमाबी के सितारों को अपनी झोली में भरने की। इस अपराजिता को प्रदेश सरकार सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं।
उसका ब्लॉक क्षेत्र के बसावनपुर गांव की नीतू सिंह नई पौध तैयार कर रही हैं। यह पौध ऐसी है जो लोगों को अपराजिता बनाने में जुटी है। खुद नीतू आधुनिक खेती कर परिवार को मजबूत बनाने में जुटी हैं। वह कहती हैं कि खेती आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है। उनके लिए खेती चुनने की राह आसान नहीं थी, लेकिन तीन साल की उम्र में पिता ओंकार सिंह का निधन और मां सुनैना सिंह पर आई घर की जिम्मेदारी ने मेरा बचपन किसानी की तरफ मोड़ दिया। मां को खेतों में काम करता देख खुद भी जुट गई। पहले गेहूं और धान की खेती में हाथ आजमाया, लेकिन जब लगा कि आमदनी वाली खेती करनी चाहिए तो अरहर की खेती शुरू कर दी। नीतू के कदम यही नहीं रुके बल्कि क्षेत्र के किसानों को आधुनिक खेती के लिए जागरूक करते हुए वह उनकी ट्रेनर बन गईं। अब वह गांव-गांव जाकर चौपाल के जरिए महिलाओं और पुरुषों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करती हैं।
286 किसानों को कर चुकी हैं प्रोत्साहित
नीतू अब तक 286 किसानों को प्रोत्साहित कर चुकी हैं। उन्हीं की देन है कि कई किसानों ने गेहूं और धान के अलावा, सब्जी, हल्दी और अरहर तक की खेती शुरू कर दी है। वर्तमान समय में वह बलरामपुर में एक संस्था से जुड़कर किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक कर रही हैं। दो दिसंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ में ‘बेस्ट किसान ट्रेनर’ के रूप में नीतू को सम्मानित कर चुके हैं। कृषि विभाग की ओर से कपिलवस्तु महोत्सव में डीडी एग्रीकल्चर और डीआईजी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
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‘हर घर से एक बेटी और एक बेटा किसान निकले’
नीतू कहती हैं कि कोई राह आसान नहीं होती। खुद को आत्मनिर्भर बनाना आसान है, लेकिन दूसरों को आत्मनिर्भर बनाने में जो खुशी मिलती है, वह कहीं नहीं है। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक हर घर से एक बेटी और एक बेटा किसान नहीं निकलेगा, तब तक देश तरक्की की राह पर आगे नहीं जाएगा।
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उसका ब्लॉक क्षेत्र के बसावनपुर गांव की नीतू सिंह नई पौध तैयार कर रही हैं। यह पौध ऐसी है जो लोगों को अपराजिता बनाने में जुटी है। खुद नीतू आधुनिक खेती कर परिवार को मजबूत बनाने में जुटी हैं। वह कहती हैं कि खेती आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है। उनके लिए खेती चुनने की राह आसान नहीं थी, लेकिन तीन साल की उम्र में पिता ओंकार सिंह का निधन और मां सुनैना सिंह पर आई घर की जिम्मेदारी ने मेरा बचपन किसानी की तरफ मोड़ दिया। मां को खेतों में काम करता देख खुद भी जुट गई। पहले गेहूं और धान की खेती में हाथ आजमाया, लेकिन जब लगा कि आमदनी वाली खेती करनी चाहिए तो अरहर की खेती शुरू कर दी। नीतू के कदम यही नहीं रुके बल्कि क्षेत्र के किसानों को आधुनिक खेती के लिए जागरूक करते हुए वह उनकी ट्रेनर बन गईं। अब वह गांव-गांव जाकर चौपाल के जरिए महिलाओं और पुरुषों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करती हैं।
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286 किसानों को कर चुकी हैं प्रोत्साहित
नीतू अब तक 286 किसानों को प्रोत्साहित कर चुकी हैं। उन्हीं की देन है कि कई किसानों ने गेहूं और धान के अलावा, सब्जी, हल्दी और अरहर तक की खेती शुरू कर दी है। वर्तमान समय में वह बलरामपुर में एक संस्था से जुड़कर किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक कर रही हैं। दो दिसंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ में ‘बेस्ट किसान ट्रेनर’ के रूप में नीतू को सम्मानित कर चुके हैं। कृषि विभाग की ओर से कपिलवस्तु महोत्सव में डीडी एग्रीकल्चर और डीआईजी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
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‘हर घर से एक बेटी और एक बेटा किसान निकले’
नीतू कहती हैं कि कोई राह आसान नहीं होती। खुद को आत्मनिर्भर बनाना आसान है, लेकिन दूसरों को आत्मनिर्भर बनाने में जो खुशी मिलती है, वह कहीं नहीं है। उनका स्पष्ट मानना है कि जब तक हर घर से एक बेटी और एक बेटा किसान नहीं निकलेगा, तब तक देश तरक्की की राह पर आगे नहीं जाएगा।