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नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में बढ़ा बाढ़ का खतरा

Mon, 10 Jul 2017 10:31 PM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 10:31 PM IST
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नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में बढ़ा बाढ़ का खतरा
सिद्धार्थनगर। पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश से जिले की सभी नदियां उफना गई हैं। सर्वाधिक असर बूढ़ी राप्ती और कूड़ा के जलस्तर पर पड़ा है। दोनों ही नदियां तटवर्ती गांवों के करीब तक पहुंच गई है। ककरहीं घाट के पास बूढ़ी राप्ती के जलस्तर में दो मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कूड़ा नदी भी डेढ़ मीटर तक चढ़ गई है। राप्ती, घोघी नदी के साथ जमुआर और तेलार नाले का जलस्तर भी बढ़ा है। उधर, बानगंगा बैराज की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सभी फाटक खोलकर लगातार पानी निकाले जाने के बावजूद नदी में पानी बढ़ने का सिलसिला जारी है।
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जिले में शनिवार से ही झमाझम बारिश का दौर शुरू है। इसके बाद से नदियों के जलस्तर में वृद्धि शुरू हुई थी। नेपाल के पहाड़ों पर भी निरंतर बारिश से भारी मात्रा में पानी जिले की नदियों में आ रहा है। इसका ऱ्असर बढ़ते जलस्तर के रूप में साफ नजर आ रहा है। रविवार की शाम से शुरू हुई झमाझाम बारिश सोमवार को प्ूरे दिन जारी रही। बारिश की यह मात्रा 100 एमएम से अधिक बताई जा रही है। हालात पर गौर करें तो भले ही नदियां खतरे के निशान से अभी नीचे हैं, लेकिन लगातार भारी बारिश और जलस्तर में तेजी से वृद्धि के चलते बाढ़ का खतरा भी बढ़ता दिख रहा है। महज 12 घंटे में ही बूढ़ी राप्ती का जलस्तर दो मीटर बढ़ गया है, जबकि इसी अवधि में कूड़ा नदी डेढ़ मीटर बढ़ गई है। नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों की बेचैनी बढने लगी है। कई स्थानों पर कटान भी शुरू हो गया है।
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बर्डपुुर। कूड़ा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि से नदी तट पर बसे दर्जनों गांवों में खतरा बढ़ गया है। विकासखंड के तिघरा, सेमरी, तिलसड़ी, दलदलहां, महदेइयां, लखईचक, बलुआ, सेमरहनी, केवटलिया गांवों के करीब तक नदी का पानी पहुंचने से लोगों की नींद उड़ गई है। जलस्तर में वृद्धि ऐसी ही रही तो इन गांवों में कभी भी पानी घुस सकता है। खतरे के बावजूद अब तक बचाव के कोई इंतजाम नहीं हुए हैं। सबसे बुरी स्थिति सेमरी और तिघरा गांव की है। यहां बाढ़ की स्थिति में पहुंचने के लिए कोई मार्ग ही नहीं है। ऐसे में ग्रामीण आसन्न खतरे को लेकर भयभीत बने हुए हैं।
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अब तक नहीं मिला मुआवजा
लगातार हो रहे कटान से सेमरी, तिघरा, तिलसड़ी गांव का अस्तित्व मिटने के कगार पर है। जिनके आशियाने नदी मे विलीन हो गए, उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिल सका। कई लोग मुआवजे के आस मे परलोक सिधार गए। स्व.रामधनी दास का कुटी व मकान पांच वर्ष पहले नदी मे विलीन हो गया। बृजुदास, गिरधारी, दोस मोहम्मद, बृजलाल, तोखई, नरेश, टिरर आदि के मकान वर्षों पहले नदी में डूबे थे। इन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है।


डीएम ने सभी एसडीएम से मांगी रिपोर्ट
हालात को देखते हुए डीएम कुणाल सिल्कू ने अलर्ट जारी कर दिया है। सभी एसडीएम को निर्देश दिया है कि वह अपने क्षेत्रों में जाकर मौके की स्थिति का जायजा लें। बाढ़ चौकी, शरणालय, बंधों की स्थिति सहित अन्य व्यवस्थाओं का हाल देख मंगलवार की शाम तक रिपोर्ट करें। डीएम ने बताया कि जिले में नदियों का जलस्तर अभी खतरे के निशान के नीचे है। कंटोल रूम स्थापित हो चुका है। पल-पल के हालात पर नजर रखी जा रही है। सभी एसडीएम को अपने क्षेत्र में जाकर रिपोर्ट करने को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।

नदियों का जलस्तर
नदी जलस्तर 9 जुलाई 10 जुलाई
बूढ़ी राप्ती 81.16 मीटर 83.44 मीटर
कूड़ा नदी 84 मीटर 85.70 मीटर
राप्ती नदी 82.49 मीटर 82.62 मीटर
बानगंगा 91.70 मीटर 91 मीटर
जमुआर 81.33 मीटर 81.62 मीटर
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