फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   31 thousand children in dengue zone of malnutrition

31 हजार बच्चे कुपोषण के डेंजर जोन में

Sun, 12 Nov 2017 10:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sun, 12 Nov 2017 10:25 PM IST
विज्ञापन
31 thousand children in dengue zone of malnutrition
malnutrition
सिद्धार्थनगर। महात्मा बुद्ध की धरा पर नौनिहाल कुपोषण से जूझ रहे हैं। जागरूकता के अभाव में और सही खुराक न मिल पाने से पांच वर्ष तक के 31 हजार बच्चे रेड जोन में हैं। इन्हें स्वस्थ बनाना जिम्मेदारों के लिए बड़ी चुनौती है। लाख कोशिशों के बाद भी कुपोषण का यह आंकड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा। पिछले एक वर्ष से स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।
विज्ञापन

मासूमों के बचपन को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने के मकसद से बाल विकास विभाग की ओर से कई योजनाओं का संचालन हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से उन्हें कभी गर्म पका-पकाया भोजन तो कभी दूध, दही और पोषाहार का वितरण होता रहा है। बावजूद नतीजा सिफर है। अक्टूबर में वजन दिवस के दौरान जिले के 3112 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुए तौल के आंकड़ों पर गौर करें तो 31 हजार से अधिक बच्चे अति कुपोषित चिह्नित हुए हैं। इनमें कुपोषण का स्तर खतरनाक स्थिति में होने के कारण ही इन्हें रेड जोन में रखा गया है। इनके अलावा करीब 70 हजार बच्चे यलो जोन यानि कुपोषित श्रेणी में हैं।
विज्ञापन

इन्हें फिलहाल कोई खतरा नहीं, लेकिन सही देखभाल की लगातार जरूरत है। बच्चों में कुपोषण का यह हाल तब है, जब बाल विकास हमेशा से शासन की प्राथमिकता में रहा है। बचपन को स्वस्थ बनाने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने हौसला पोषण मिशन चलाया और नई सरकारी शबरी संकल्प योजना पर काम कर दी है। बावजूद रेड और यलो जोन में शामिल बच्चों को सामान्य स्तर पर लाने के लिए विभाग की कोशिशें बेअसर हो रही हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो हौसला पोषण मिशन शुरू होते ही दम तोड़ गया था। दिसंबर के बाद से इसमें कोई धनराशि नहीं आई। यही हाल पका-पकाया भोजन योजना का भी है। रही-सही कसर बाढ़ और कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं की हड़ताल ने पूरी कर दी है। आए दिन हड़ताल के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लटकने से मासूमों को न तो पोषाहार मिल रहा है और न ही उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल हो पा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे में कुपोषण मिटाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। जिला कार्यक्रम अधिकारी आरके त्रिपाठी भी इससे इनकार नहीं करते। हालांकि इस चुनौती से निपटने के लिए इरादे प्रबल हैं। बताया कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर ऐसी योजना बनाई जा रही है, जिससे माता के स्तर पर ही बच्चों का कुपोषण मिटाया जा सके। गर्भ में ही बच्चों की सही देखभाल और प्रसव के आधे घंटे बाद मां का दूध पिलाने पर जोर दिया जा रहा है। छह माह तक मां अपने बच्चे को केवल अपना दूध पिलाए तो भी कुपोषण का काफी हद तक समाधान संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed