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शौचालय : सर्वे में जमीन पर नहीं दिखे कागजों के आंकड़े
siddharthnagar
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:50 PM IST
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शौचालय
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सिद्धार्थनगर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे इज्जत घरों के निर्माण की जांच में गड़बड़झाला सामने आया है। विशेष जांच टीम द्वारा 15 दिनों में 75 गांवों में किए गए सर्वे में कागजों मेें की गई रिपोर्टिंग और जमीनी सच में काफी अंतर मिला है। यह बात भी सामने आई है कि प्रोत्साहन राशि के चेक देने के नाम पर दो-दो हजार रुपये प्रति लाभार्थी लिए गए। पूरे खेल में विभाग से लेकर प्रधान तक के शामिल होने के आरोप हैं। जांच टीम में सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के लिए जागरूकता और खुले में शौच की आदत को समाप्त करने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में इज्जत घर बनाए जाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए 12 हजार और शहरी क्षेत्र के लोगों को आठ हजार रुपये दिए जाते हैं। जांच टीम के सूत्रों की माने तो 15 दिन में जिले के 75 ऐसे गांव का सर्वे किया गया, जिन गांवों को खुले में शौच से मुक्त से घोषित किया जा चुका है। सर्वे में कई अनियमितताएं मिलीं। सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने शौचालयों की जांच करने और रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की पुष्टि की है।
जांच में मिलीे ये अनियमितताएं
- सूत्रों के अनुसार गांवों के निरीक्षण के दौरान लाभार्थियों से बात की गई तो कइयों ने चेक देने के लिए संबंधित प्रधान व विभाग द्वारा दो-दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति वसूले जाने का आरोप लगाया। कई ऐसे ग्रामीण भी मिले जो शौचालय का निर्माण पहले ही करा चुके थे। उन्हें शौचालय के नाम पर रुपये दिए गए, लेकिन तीन से चार हजार। बाकी रकम की बंदरबांट कर ली गई। कुछ गांव ऐसे भी मिले, जहां प्रधान ने ठेके पर शौचालय का निर्माण करवा दिया।
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2 लाख 90 हजार शौचालयों का हो चुका है निर्माण
- पंचायतीराज विभाग की माने तो जिले में 2 लाख 90 हजार शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसमें 2 लाख 30 हजार सरकार की ओर से दी गई सहायता राशि से बने हैं, जबकि 60 हजार लाभार्थी ऐसे थे, जिन्होंने पात्रता सूची में नाम होने के बाद भी अपनी रकम से शौचालय बनवाया।
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प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के लिए जागरूकता और खुले में शौच की आदत को समाप्त करने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में इज्जत घर बनाए जाने की कवायद शुरू की है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए 12 हजार और शहरी क्षेत्र के लोगों को आठ हजार रुपये दिए जाते हैं। जांच टीम के सूत्रों की माने तो 15 दिन में जिले के 75 ऐसे गांव का सर्वे किया गया, जिन गांवों को खुले में शौच से मुक्त से घोषित किया जा चुका है। सर्वे में कई अनियमितताएं मिलीं। सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी गई है। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने शौचालयों की जांच करने और रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की पुष्टि की है।
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जांच में मिलीे ये अनियमितताएं
- सूत्रों के अनुसार गांवों के निरीक्षण के दौरान लाभार्थियों से बात की गई तो कइयों ने चेक देने के लिए संबंधित प्रधान व विभाग द्वारा दो-दो हजार रुपये प्रति व्यक्ति वसूले जाने का आरोप लगाया। कई ऐसे ग्रामीण भी मिले जो शौचालय का निर्माण पहले ही करा चुके थे। उन्हें शौचालय के नाम पर रुपये दिए गए, लेकिन तीन से चार हजार। बाकी रकम की बंदरबांट कर ली गई। कुछ गांव ऐसे भी मिले, जहां प्रधान ने ठेके पर शौचालय का निर्माण करवा दिया।
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2 लाख 90 हजार शौचालयों का हो चुका है निर्माण
- पंचायतीराज विभाग की माने तो जिले में 2 लाख 90 हजार शौचालयों का निर्माण हो चुका है। इसमें 2 लाख 30 हजार सरकार की ओर से दी गई सहायता राशि से बने हैं, जबकि 60 हजार लाभार्थी ऐसे थे, जिन्होंने पात्रता सूची में नाम होने के बाद भी अपनी रकम से शौचालय बनवाया।