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...तो संयुक्त जिला अस्पताल में हो जाएगा दवाओं का टोटा

Sun, 15 Jul 2018 11:31 PM IST
siddharthnagar
siddharthnagar Updated Sun, 15 Jul 2018 11:31 PM IST
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...तो संयुक्त जिला अस्पताल में हो जाएगा दवाओं का टोटा
सिद्धार्थनगर। पूरे जिले के मरीजों के सेहत का ख्याल रखने वाला संयुक्त जिला अस्पताल अस्वस्थ होता दिख रहा है। दवाओं की उपलब्धता के मामले में नए नियम आड़े आ रहे है। चिकित्सालय में 452 दवाओं एवं सामग्रियों के सापेक्ष 162 ही उपलब्ध हैं। एक सप्ताह में दवाओं की आपूर्ति न हुई तो एंटीबायोटिक, पैरासिटामॉल, दर्द और गैस की दवा के लिए मरीजों को बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।
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सूबे में योगी आदित्य नाथ की अगुवाई में सरकार बनने के बाद दवाओं की खरीद के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन क्रय आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके बाद 45 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। आपूर्ति होने तक किसी भी स्तर पर दवा की खरीदारी नहीं हो सकती है। धनराशि की कटौती भी कर ली जाती है। यह अलग बात है कि 45 दिन में आपूर्ति न होने पर रकम वापस हो जाती है। संयुक्त जिला अस्पताल को 452 दवाओं को क्रय करने आदेश हैं, पर मौजूद समय में 162 ही उपलब्ध हैं। लिहाजा एक सप्ताह के भीतर क्रय आदेश के बाद भी पूर्ति न होने की दशा में एंटीबायोटिक, पैरासिटामाल, दर्द, गैस की दवाओं व मरहम का स्टाक खत्म हो जाएगा।
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बजट में भी विडंबना
दवाओं व सामग्रियों के मद में संयुक्त जिला अस्पताल व मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सीएमडी स्टोर को मिलने वाली धनराशि में बड़े पैमाने पर विसंगति हैं। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, सर्जिकल वार्ड, जनरल वार्ड, प्लास्टर रूम, आपरेशन थियेटर, पीआईसीयू एनएससीयू, एक्सरे विभाग, अल्ट्रासाउंड जैसे स्थानों पर दवाओं व सामग्रियों की उपलब्धता के नाम पर एक वित्तीय वर्ष में बजट लगभग एक करोड़ रुपये दिए जाते हैं। जबकि सीएचसी, पीएचसी पर प्राय: सामान्य मरीजों के उपचार आदि के लिए दो से पांच करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इसे विडंबना ही कहा जाएगा।
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संयुक्त जिला अस्पताल में उपलब्ध साधन और संसाधन में ही आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रयास किया जाता है। शासन स्तर से दवाओं के क्रय संबंधी नए नियमों में शिथिलता मिलनी चाहिए। दवाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके बारे में उच्चाधिकारियों को समय-समय पर मौखिक और लिखित रूप से अवगत भी कराया जा रहा है।
- डॉ. रोचस्मति पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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