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Siddharthnagar News: निरीक्षण में गैरहाजिर मिले 17 शिक्षक-शिक्षामित्र, रोका वेतन
Thu, 11 Sep 2025 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 11 Sep 2025 11:48 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बीआरसी नौगढ़ केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण का बृहस्पतिवार को बीएसए ने निरीक्षण किया। इस दौरान 17 शिक्षक और शिक्षामित्र गैरहाजिर मिले। उन्होंने सभी का वेतन रोक दिया। साथ ही संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
निरीक्षण के दौरान बीएसए शैलेश कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का अहम माध्यम है। ऐसे में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे भी अगर कोई शिक्षक या शिक्षा मित्र प्रशिक्षण में अनुपस्थित मिला तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के बाद शिक्षकों और शिक्षा मित्रों में हड़कंप मच गया। बीएसए ने बताया कि अब प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सघन मॉनिटरिंग की जाएगी। बीएसए शैलेश कुमार ने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा एक से तीन तक के बच्चों में पढ़ने, लिखने और गणना करने की बुनियादी क्षमता विकसित करना है।
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इसके माध्यम से बच्चों में भाषाई दक्षता, गणितीय समझ और सीखने की रुचि को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि आगे की कक्षाओं में वे आसानी से नई जानकारियां आत्मसात कर सकें।
भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 तक पहुंचने पर बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता हासिल कर लें।
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निरीक्षण के दौरान बीएसए शैलेश कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का अहम माध्यम है। ऐसे में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे भी अगर कोई शिक्षक या शिक्षा मित्र प्रशिक्षण में अनुपस्थित मिला तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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निरीक्षण के बाद शिक्षकों और शिक्षा मित्रों में हड़कंप मच गया। बीएसए ने बताया कि अब प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सघन मॉनिटरिंग की जाएगी। बीएसए शैलेश कुमार ने बताया कि एफएलएन प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा एक से तीन तक के बच्चों में पढ़ने, लिखने और गणना करने की बुनियादी क्षमता विकसित करना है।
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इसके माध्यम से बच्चों में भाषाई दक्षता, गणितीय समझ और सीखने की रुचि को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि आगे की कक्षाओं में वे आसानी से नई जानकारियां आत्मसात कर सकें।
भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 तक पहुंचने पर बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता हासिल कर लें।