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Siddharthnagar News: 17 वर्ष बाद हुई सुनवाई, 11 एकड़ भूमि से बेदखल होंगे कब्जेदार

Tue, 17 Oct 2023 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 17 Oct 2023 12:47 AM IST
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17 people encroachment on goverment land erased
फोटो--
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बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी ने दिया जमीन खाली करने का आदेश, चकबंदी विभाग में सांठगांठ से दर्ज हुआ था खतौनी में नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में हुए फैसले से बांसी तहसील के हाटा गांव में 11 एकड़ सरकारी भूमि से बेदखली का आदेश हुआ है। वर्ष 2006 में भी इस भूमि के मामले में शिकायत हुई थी। इसमें 17 वर्ष बाद सुनवाई हुई तो अब फैसला आया है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि एकपक्षीय सुनवाई हुई है।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने खेदन लाल यादव, राम शंकर यादव, राधेश्याम पाण्डेय, हरिद्वार, बालमुकुंद सहित कुल छह लोगों के खिलाफ बेदखली का आदेश दिया है। इसमें 25 काश्तकारों की बेदखली का मामला चल रहा है। वर्ष 2006 में भी ग्रामीणों ने शिकायत की थी तो मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया था।
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इस मामले में ग्रामीणों ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की थी तो सुनवाई में तेजी आई। करीब डेढ़ माह चली सुनवाई में जांच के बाद ये तथ्य सामने आए कि ग्राम सभा की भूमि पर खेदन लाल 2.6 बीघे, बाल मुकुंद ने पांच बीघे, रामकुमार ने 5.5 बीघे, राधेश्याम ने पौने छह बीघे, रामकुमार ने साढ़े नौ बीघे एवं हरिद्वार ने पांच बीघे जमीन पर फर्जी तरीके से अपना नाम दर्ज करा लिया है। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी मेघ वरण ने सभी का नाम खतौनी से खारिज करते हुए भूमि से बेदखल करने का आदेश पारित किया है।
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बेदखली के आदेश के विरोध में करेंगे अपील
बांसी। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सिद्धार्थनगर के फैसले से हाटा गांव के कृषक काफी परेशान हैं। इनका कहना है कि यह फैसला बिना हमारा पक्ष सुने और सबूत देखे राजनैतिक दबाव में आकर किया गया है। बंदोबस्त अधिकारी ने हाटा गांव के छह लोगों के कब्जे की लगभग 25 बीघा जमीन को बेदखल करने का आदेश दिया है। हालांकि, बेदखल किए गए काश्तकार इस फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना बना रहे हैं। काश्तकार राम कुमार का कहना है कि 29 वर्ष पूर्व सीओ चकबंदी के आदेश से इन्हें इन खेत का मालिकाना हक मिला था। इसे एक झटके में बिना सबूत देखे बंदोबस्त अधिकारी ने बेदखल करने का आदेश दे दे दिया है, जो न्याय संगत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके कब्जे के खेत को बंजर व सरकारी बताया जा रहा है। यह खेत चरथरी गांव के जमींदारों का था, जो उनके पूर्वजों को चरवाही व लगान अदा करने पर मिला था।



सिद्धार्थनगर ब्यूरो से 16 अक्तूबर को आने वाली समस्याएं
आदरणीय सर,
सिद्धार्थनगर से 16 अक्तूबर को शाम चार बजे तक 9, पांच बजे तक 20, छह बजे तक 26, सात बजे तक 36 और इसके बाद 49 फाइलें आईं। मैंने 10:40 तक पेज छोड़ दिए थे। आसपास का पेज 11:18 बजे छूटा। इससे संस्करण छोड़ने में 48 मिनट की देर हुई।
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