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मॉडल स्कूलों में न शिक्षक हैं न किताबें
siddharthnagar/ रवि शुक्ल
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:40 PM IST
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परसा। कान्वेंट स्कूलों से बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से सत्र 2018-19 में बढ़नी ब्लॉक के परसा स्टेशन, पिकौरा, पड़रिया, रामनगर, मोहनकोला, गोल्हौरा के प्राथमिक स्कूलों को मॉडल स्कूल (इंगलिश मीडियम) का दर्जा दिया गया। एक अप्रैल से शिक्षण सत्र भी शुरू हो गया। बावजूद इसके यहां न तो अब तक बच्चों को किताबें पहुंचीं और न ही बच्चों में यूनिफॉर्म का वितरण हुआ। पिकौरा, रामनगर व पड़रिया में तो प्रशिक्षित शिक्षकों की भी तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में ये स्कूल नाम के ‘मॉडल’ स्कूल रह गए हैं।
हाल यह है मॉडल स्कूलों के नाम से यहां बड़ी संख्या में बच्चों ने प्रवेश ले लिया। अभिभावकों को इस बात से उत्साहित थे कि बगैर भारी भरकम फीस दिए उनके बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के बाद भी अब तक संबंधित विद्यालयों में न तो पुस्तकें उपलब्ध हुईं हैं न यूनिफॉर्म। नतीजतन प्रतिदिन सुबह बगैर यूनिफॉर्म के बच्चे कॉपियां लेकर स्कूल आ-जा रहे हैं। वहीं विद्यालयों में तैनात शिक्षक कुछ संख्या में मौजूद पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं। अभिभावक अमित व सतीश कुमार ने कहा कि पुस्तकें न उपलब्ध होने के चलते कोर्स पिछड़ता जा रहा है।
नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी अभी पुस्तकें नहीं उपलब्ध हो पाई हैं। अनिल अग्रहरि व सगीर चौधरी ने कहा कि सिर्फ विद्यालय के बाहर इंग्लिश मीडियम का बोर्ड लगा देना बड़ी बात नहीं है। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी गंभीरता दिखानी चाहिए। अभी तक न तो नौनिहालों को पुस्तकें उपलब्ध हो सकी हैं और न ही ड्रेस और न अध्यापक। बीएसए राम सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी है। किताबें जल्द आने वाली हैं। आते ही किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। वहीं तीन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं वहां जल्द शिक्षक तैनात कर दिए जाएंगे।
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हाल यह है मॉडल स्कूलों के नाम से यहां बड़ी संख्या में बच्चों ने प्रवेश ले लिया। अभिभावकों को इस बात से उत्साहित थे कि बगैर भारी भरकम फीस दिए उनके बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के बाद भी अब तक संबंधित विद्यालयों में न तो पुस्तकें उपलब्ध हुईं हैं न यूनिफॉर्म। नतीजतन प्रतिदिन सुबह बगैर यूनिफॉर्म के बच्चे कॉपियां लेकर स्कूल आ-जा रहे हैं। वहीं विद्यालयों में तैनात शिक्षक कुछ संख्या में मौजूद पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं। अभिभावक अमित व सतीश कुमार ने कहा कि पुस्तकें न उपलब्ध होने के चलते कोर्स पिछड़ता जा रहा है।
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नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी अभी पुस्तकें नहीं उपलब्ध हो पाई हैं। अनिल अग्रहरि व सगीर चौधरी ने कहा कि सिर्फ विद्यालय के बाहर इंग्लिश मीडियम का बोर्ड लगा देना बड़ी बात नहीं है। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भी गंभीरता दिखानी चाहिए। अभी तक न तो नौनिहालों को पुस्तकें उपलब्ध हो सकी हैं और न ही ड्रेस और न अध्यापक। बीएसए राम सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी है। किताबें जल्द आने वाली हैं। आते ही किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी। वहीं तीन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं वहां जल्द शिक्षक तैनात कर दिए जाएंगे।
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