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एसएनसीयू बेड कम होने से परेशानी
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जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती बच्चे का इलाज करते चिकित्सक। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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एसएनसीयू बेड कम होने से परेशानी
- मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में 15 बेड का बना है वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में बेड कम होने से मरीजों को दिक्कत होती है। बेड की संख्या कम होने से कभी-कभी एक बेड पर दो से तीन बच्चों का इलाज किया जाता है।
जिला अस्पताल पर बड़ी आबादी के इलाज का जिम्मा है। जिले के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग यहां इलाज कराने के लिए आते हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में 15 बेड का एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि कभी-कभी एक बेड पर दो से तीन मरीज के भर्ती करने की नौबत आ जाती है। ऐसे में इलाज करने में भी दिक्कत होती है। बेड की संख्या बढ़ जाए तो इलाज करने में आसानी होगी साथ ही बीमार बच्चे को भी लेटने में दिक्कत नहीं होगी।
नगर निवासी रामनेवास ने कहा कि अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में सुविधा की कमी नहीं है, लेकिन कभी-कभी बेड ही खाली नहीं रहते हैं। बेड को बढ़ा दिया जाए तो लोगों को लाभ मिलेगा। रामप्रकाश ने कहा कि बच्चे अधिक बीमार होते हैं, इसलिए उनके भर्ती करने की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए।
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बारिश के मौसम में बढ़ जाती है मरीजों की संख्या
15 बेड के एसएनसीयू वार्ड में सामान्य दिन में औसतन पांच से छह मरीज पहुंचते हैं। लेकिन बारिश शुरू होने के बाद मई से अक्तूबर माह तक 10 से 12 मरीज एक दिन में पहुंचते हैं। इस समय में झटके के साथ बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में एक बेड पर जहां छोटे बच्चे रहते हैं, उसपर दो से तीन को भर्ती करना पड़ता है।
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बीमारी को देखते हुए पहले से तैयार होने की जरूरत
संक्रामक की बीमारियों के बढ़ते खतरे और होने वाली दिक्कत से बचने के लिए महकमे के जिम्मेदारों को पहले से तैयार होने की जरूरत है। अगर बेड की संख्या पहले से ही बढ़ा दी जाए तो स्थिति मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद दिक्कत नहीं होगी।
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एसएनसीयू वार्ड में 15 बेड है। मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद समस्या आती है। यह संज्ञान में है। बेड के बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जिससे किसी भी मरीज को परेशानी न होने पाए।
- डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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- मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल में 15 बेड का बना है वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में बेड कम होने से मरीजों को दिक्कत होती है। बेड की संख्या कम होने से कभी-कभी एक बेड पर दो से तीन बच्चों का इलाज किया जाता है।
जिला अस्पताल पर बड़ी आबादी के इलाज का जिम्मा है। जिले के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग यहां इलाज कराने के लिए आते हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में 15 बेड का एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि कभी-कभी एक बेड पर दो से तीन मरीज के भर्ती करने की नौबत आ जाती है। ऐसे में इलाज करने में भी दिक्कत होती है। बेड की संख्या बढ़ जाए तो इलाज करने में आसानी होगी साथ ही बीमार बच्चे को भी लेटने में दिक्कत नहीं होगी।
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नगर निवासी रामनेवास ने कहा कि अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में सुविधा की कमी नहीं है, लेकिन कभी-कभी बेड ही खाली नहीं रहते हैं। बेड को बढ़ा दिया जाए तो लोगों को लाभ मिलेगा। रामप्रकाश ने कहा कि बच्चे अधिक बीमार होते हैं, इसलिए उनके भर्ती करने की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए।
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बारिश के मौसम में बढ़ जाती है मरीजों की संख्या
15 बेड के एसएनसीयू वार्ड में सामान्य दिन में औसतन पांच से छह मरीज पहुंचते हैं। लेकिन बारिश शुरू होने के बाद मई से अक्तूबर माह तक 10 से 12 मरीज एक दिन में पहुंचते हैं। इस समय में झटके के साथ बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में एक बेड पर जहां छोटे बच्चे रहते हैं, उसपर दो से तीन को भर्ती करना पड़ता है।
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बीमारी को देखते हुए पहले से तैयार होने की जरूरत
संक्रामक की बीमारियों के बढ़ते खतरे और होने वाली दिक्कत से बचने के लिए महकमे के जिम्मेदारों को पहले से तैयार होने की जरूरत है। अगर बेड की संख्या पहले से ही बढ़ा दी जाए तो स्थिति मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद दिक्कत नहीं होगी।
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एसएनसीयू वार्ड में 15 बेड है। मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद समस्या आती है। यह संज्ञान में है। बेड के बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जिससे किसी भी मरीज को परेशानी न होने पाए।
- डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर