{"_id":"59beb0ff4f1c1b23688b51b5","slug":"11505669375-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"म्यांमार में कत्लेआम बंद कराया जाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
म्यांमार में कत्लेआम बंद कराया जाए
Updated Sun, 17 Sep 2017 10:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले और उत्पीड़न के खिलाफ तहफ्फूज-ए-मिल्लत और एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया। नगर में जुलूस निकालकर म्यांमार के खिलाफ नारे लगाए। भारत में आए शरणार्थियों को शांति कायम होने तक पनाह देने की मांग की। प्रधानमंत्री को संबोधित आठ सूत्री ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
बेलसड़ ईदगाह से जुलूस लेकर प्रदर्शनकारी नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सिद्धार्थ तिराहा पहुंचे। नगरपालिका कार्यालय के पास जमकर नारेबाजी करते हुए म्यांमार सरकार को कोसा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एआईएमआईएम के प्रदेश मुख्य महासचिव अली अहमद ने कहा कि म्यांमार में इंसानियत का कत्ल हो रहा है। दहशतगर्द लगातार हिंदू-मुसलमानों को मौत के घाट उतार रहे हैं। इसके बावजूद उन पर अंकुश के लिए कोई पहल नहीं हो रहा। जान बचाकर भारत आ रहे शरणार्थियों की भी अनदेखी हो रही है। उन्हें भोजन-पानी जैसी अन्य सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
भारत सरकार को म्यांमार पर दबाव बनाना चाहिए। म्यांमार एंबेसी को सील कर उनके अंबेसडर को वापस भेजा जाए। प्रदर्शनकारियों ने आन सान शू को मिला शांति का नोबल पुरस्कार वापस लेने, संयुक्त राष्ट्र महासंघ से म्यांमार के फौजी जनरल को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में मुकदमा चलाकर सजा देने, जान बचाकर भारत में आ रहे म्यांमार के निवासियों के लिए रिफ्यूजी कैंप खोलने, शरणार्थी का दर्जा देने, बच्चों को दूध-पानी, खाना उपलब्ध कराने आदि की मांग की। प्रदर्शन में एमआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष हामिद हुसैन, तहफ्फुज-ए-मिल्लत के प्रेसिडेंट मौलाना शफात, सादिक शेख, जामा मस्जिद तेतरी के इमाम सुहेल अहमद, मौलाना सेराजुद्दीन, मु.नसीम, गुलाम नबी आजाद, फैयाज अहमद आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बेलसड़ ईदगाह से जुलूस लेकर प्रदर्शनकारी नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सिद्धार्थ तिराहा पहुंचे। नगरपालिका कार्यालय के पास जमकर नारेबाजी करते हुए म्यांमार सरकार को कोसा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे एआईएमआईएम के प्रदेश मुख्य महासचिव अली अहमद ने कहा कि म्यांमार में इंसानियत का कत्ल हो रहा है। दहशतगर्द लगातार हिंदू-मुसलमानों को मौत के घाट उतार रहे हैं। इसके बावजूद उन पर अंकुश के लिए कोई पहल नहीं हो रहा। जान बचाकर भारत आ रहे शरणार्थियों की भी अनदेखी हो रही है। उन्हें भोजन-पानी जैसी अन्य सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
विज्ञापन
भारत सरकार को म्यांमार पर दबाव बनाना चाहिए। म्यांमार एंबेसी को सील कर उनके अंबेसडर को वापस भेजा जाए। प्रदर्शनकारियों ने आन सान शू को मिला शांति का नोबल पुरस्कार वापस लेने, संयुक्त राष्ट्र महासंघ से म्यांमार के फौजी जनरल को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में मुकदमा चलाकर सजा देने, जान बचाकर भारत में आ रहे म्यांमार के निवासियों के लिए रिफ्यूजी कैंप खोलने, शरणार्थी का दर्जा देने, बच्चों को दूध-पानी, खाना उपलब्ध कराने आदि की मांग की। प्रदर्शन में एमआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष हामिद हुसैन, तहफ्फुज-ए-मिल्लत के प्रेसिडेंट मौलाना शफात, सादिक शेख, जामा मस्जिद तेतरी के इमाम सुहेल अहमद, मौलाना सेराजुद्दीन, मु.नसीम, गुलाम नबी आजाद, फैयाज अहमद आदि शामिल रहे।
विज्ञापन