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लोक अदालत में 7862 केस निस्तारित
Updated Sun, 17 Sep 2017 10:51 PM IST
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सिद्धार्थनगर। दीवानी कचहरी, बाह्य न्यायालय, जिला जेल, राजस्व अदालतों में रविवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। 7862 मुकदमों को सुलह-समझौते के आधार पर समाप्त किया गया। मोटर दुर्घटना प्रतिकर के रूप में पीड़ित पक्षों को 36 लाख 3 हजार रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया। अर्थदंड के रूप में 2 लाख 13 हजार 390 रुपये वसूल किए गए। दो दंपति एक बार फिर से साथ रहने को राजी हुए।
इस दौरान यहां हुई गोष्ठी में जिला जज राजेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मध्यस्थता कोई नई चीज नहीं है। प्राचीन काल में श्रीकृष्ण ने भी महाभारत युद्ध को टालने के लिए मध्यस्थता के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया था। डीएम कुणाल सिल्कू ने कहा कि न्यायालय में बढ़ते मुकदमों की संख्या को दृष्टिगत मध्यस्थता प्रणाली कारगर है। इस दौरान दो वैवाहिक दंपति एक हुए। घरेलू हिंसा के मामले में सायदा खातून व पति मुमताज के बीच सीजेएम कोर्ट में चल रहे मुकदमे को सुलह-समझौते से समाप्त किया गया। इसी प्रकार एसीजेएम कोर्ट में चल रहे पुष्पा व रामकुमार के मामले में भी विवाद समाप्त कराया गया।
इस दौरान जिला जज राजेंद्र कुमार मोटर दुर्घटना के 9 मामलों का निस्तारण किया। विशेष न्यायाधीश इंद्रीश कुमार ने मोटर दुर्घटना के 4 समेत कुल 12 मामले निस्तारित किए। एडीजे बाह्य न्यायालय बांसी राजकुमार सिंह ने मोटर दुर्घटना के 4 मामले निस्तारित किए। सीजेएम संजय चौधरी ने फौजदारी के 834 मामले निस्तारित किए। सिविल जज (सीनियर डिविजन) महेंद्र कुमार ने फौजदारी के 16 समेत कुल 38 मामलों का निस्तारण किया। एफटीसी कोर्ट में न्यायाधीश मनोज कुमार ने 262 मामले निस्तारित किए। वाह्य न्यायालय डुमरियागंज सिविल जज (जूनियर डिविजन) अरविंद वर्मा ने 6 मामलों का निस्तारण किया। सिविल जज (जूनियर डिविजन) बांसी विनोद कुमार ने फौजदारी के 270 मामलों को निस्तारित किया। सिविल जज (जूनियर डिविजन) विवेक कुमार ने फौजदारी के 17 मामलों का निस्तारण किया। सभी तहसीलों में 3 हजार 719 मामले निस्तारित किए गए। पुलिस ने 2 हजार 678 मामले निस्तारित किए। सभी बैंकों के 12 मामलों को निस्तारित किया गया। इस दौरान सीओ सदर डीके सिंह, डीजीसी फौजदारी विनोद कुमार त्रिपाठी, अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन रामशंकर पांडेय, महामंत्री राधेश्याम मिश्रा, सत्येंद्र पांडेय, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन सत्यदेव सिंह आदि मौजूद रहे।
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इस दौरान यहां हुई गोष्ठी में जिला जज राजेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मध्यस्थता कोई नई चीज नहीं है। प्राचीन काल में श्रीकृष्ण ने भी महाभारत युद्ध को टालने के लिए मध्यस्थता के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया था। डीएम कुणाल सिल्कू ने कहा कि न्यायालय में बढ़ते मुकदमों की संख्या को दृष्टिगत मध्यस्थता प्रणाली कारगर है। इस दौरान दो वैवाहिक दंपति एक हुए। घरेलू हिंसा के मामले में सायदा खातून व पति मुमताज के बीच सीजेएम कोर्ट में चल रहे मुकदमे को सुलह-समझौते से समाप्त किया गया। इसी प्रकार एसीजेएम कोर्ट में चल रहे पुष्पा व रामकुमार के मामले में भी विवाद समाप्त कराया गया।
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इस दौरान जिला जज राजेंद्र कुमार मोटर दुर्घटना के 9 मामलों का निस्तारण किया। विशेष न्यायाधीश इंद्रीश कुमार ने मोटर दुर्घटना के 4 समेत कुल 12 मामले निस्तारित किए। एडीजे बाह्य न्यायालय बांसी राजकुमार सिंह ने मोटर दुर्घटना के 4 मामले निस्तारित किए। सीजेएम संजय चौधरी ने फौजदारी के 834 मामले निस्तारित किए। सिविल जज (सीनियर डिविजन) महेंद्र कुमार ने फौजदारी के 16 समेत कुल 38 मामलों का निस्तारण किया। एफटीसी कोर्ट में न्यायाधीश मनोज कुमार ने 262 मामले निस्तारित किए। वाह्य न्यायालय डुमरियागंज सिविल जज (जूनियर डिविजन) अरविंद वर्मा ने 6 मामलों का निस्तारण किया। सिविल जज (जूनियर डिविजन) बांसी विनोद कुमार ने फौजदारी के 270 मामलों को निस्तारित किया। सिविल जज (जूनियर डिविजन) विवेक कुमार ने फौजदारी के 17 मामलों का निस्तारण किया। सभी तहसीलों में 3 हजार 719 मामले निस्तारित किए गए। पुलिस ने 2 हजार 678 मामले निस्तारित किए। सभी बैंकों के 12 मामलों को निस्तारित किया गया। इस दौरान सीओ सदर डीके सिंह, डीजीसी फौजदारी विनोद कुमार त्रिपाठी, अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन रामशंकर पांडेय, महामंत्री राधेश्याम मिश्रा, सत्येंद्र पांडेय, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन सत्यदेव सिंह आदि मौजूद रहे।
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