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भले मकान तोड़ दें पर पहले नोटिस तो दीजिए
Fri, 11 Jan 2019 10:33 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 11 Jan 2019 10:33 PM IST
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डीएम की अनुपिस्थति में प्रशासनिक अधिकारी को दिया ज्ञापन।
- फोटो : अमर उजाला
ककहरवा क्ष्ाेत्र के छह से अधिक गांवों के लोगों ने शुक्रवार कलेक्ट्रेट पहुंचकर बिना नोटिस दिए ही एनएच-230(बस्ती-ककरहवा) बेघर करने का आरोप लगाया है। इस संबंध डीएम की अनुपस्थिति में कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन भी दिया।
शिव सागर सिंह की अगुवाई में दुल्हा दरम्यानी, दुल्हा खुर्द, दुल्हा सुमाली, भगवानपुर के लोगों ने बताया कि उनका मकान एनएच 230 पर स्थित है। गांव सड़क के किनारे होने के कारण बड़ी संख्या में लोग कई वर्षों मकान बनवाकर रहते हैं। वर्तमान में यहां हाईवे का कार्य शुरू हो गया है। यहां को लोगों को नोटिस दिए बिना ही गरीब लोगों के मकान तोड़ दिए जा रहे हैं। अब तक किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए और नोटिस देने के बाद ही मकान को तोड़ा जाए।
इस दौरान शब्बीर अहमद, वशीर अहमद, गंगा सागर, जितेंद्र, कुमकुम आदि मौजूद रहे। वहीं हाइवे का निर्माण कार्य करा रही कंपनी जेएसपी के एमडी विवेक गर्ग ने आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। कहा, जिन मकानों को तोड़ा गया है। वह पूरी तरह से अवैध थे। 15 दिन पूर्व जानकारी देकर अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। बावजूद अतिक्रमण नहीं हटा। ऐसे में अतिक्रमण हटवाना पड़ा।
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शिव सागर सिंह की अगुवाई में दुल्हा दरम्यानी, दुल्हा खुर्द, दुल्हा सुमाली, भगवानपुर के लोगों ने बताया कि उनका मकान एनएच 230 पर स्थित है। गांव सड़क के किनारे होने के कारण बड़ी संख्या में लोग कई वर्षों मकान बनवाकर रहते हैं। वर्तमान में यहां हाईवे का कार्य शुरू हो गया है। यहां को लोगों को नोटिस दिए बिना ही गरीब लोगों के मकान तोड़ दिए जा रहे हैं। अब तक किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए और नोटिस देने के बाद ही मकान को तोड़ा जाए।
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इस दौरान शब्बीर अहमद, वशीर अहमद, गंगा सागर, जितेंद्र, कुमकुम आदि मौजूद रहे। वहीं हाइवे का निर्माण कार्य करा रही कंपनी जेएसपी के एमडी विवेक गर्ग ने आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। कहा, जिन मकानों को तोड़ा गया है। वह पूरी तरह से अवैध थे। 15 दिन पूर्व जानकारी देकर अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। बावजूद अतिक्रमण नहीं हटा। ऐसे में अतिक्रमण हटवाना पड़ा।
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