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सत्यापन में साढ़े 18 हजार कार्ड रद्द
Updated Thu, 14 Sep 2017 10:59 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में लगभग 88 हजार लोग ऐसे हैं, जो गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न लंबे समय से डकारते आ रहे हैं। अपात्र होने के बावजूद इनका चयन कहीं अंत्योदय कार्डधारक के रूप में कर लिया गया था तो कहीं पात्र गृहस्थी के लाभार्थी के रूप में। गांव-गांव सत्यापन के दौरान इनकी पोल खुली है। पात्र गृहस्थी श्रेणी के 17537 और अंत्योदय श्रेणी के 818 कार्ड (कुल 87892 यूनिट) अपात्र मिलने पर रद्द कर दिए गए हैं।
गरीबों को जीवन-यापन के लिए सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए अंत्योदय व पात्र गृहस्थी श्रेणी बनाई गई है। इन श्रेणियों में शामिल कार्डधारकों को न्यूनतम दर पर राशन, तेल कोटे की दुकानों के माध्यम से वितरित करने की व्यवस्था है। जिले में 82510 अंत्योदय व 345891 पात्र गृहस्थी श्रेणी के मरीजों की संख्या है। गरीबों की इस सूची में तमाम ऐेसे लोगों के भी नाम शामिल कर लिए गए थे, जो अपात्र हैं। हर माह वह गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न डकारते आ रहे हैं। डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया के दौरान योगी सरकार ने राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से गांव-गांव में कार्डधारकों के सत्यापन का निर्देश दिया था।
31 अगस्त तक चले सत्यापन के बाद जारी हुई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस सूची में पात्र गृहस्थी श्रेणी के 17537 कार्ड ऐसे हैं, जो अपात्रों को दिए गए हैं। अंत्योदय कार्डधारकों की श्रेणी में 818 अपात्रों का नाम शामिल मिला। इन कार्डधारकों के नाम पर हर माह सैकड़ों क्विंटल खाद्यान्न आवंटित होता रहा है। अपात्रों के जरिए गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न डकारकर बिचौलिए मालामाल होते रहे हैं। इस बाबत डीएसओ नरेंद्र तिवारी का कहना है कि सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए सभी कार्डों को निरस्त कर दिया गया है। उनके स्थान पर अंत्योदय श्रेणी में 818 व पात्र गृहस्थी श्रेणी में 19901 नए कार्डधारक चिह्नित किए गए हैं। अब इन्हें ही खाद्यान्न दिया जाएगा।
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अपात्रों के हिस्से जाता रहा सैकड़ों क्ंिवटल खाद्यान्न
जनवरी 2016 से प्रभारी खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर गौर करें तो अंत्योदय श्रेणी में प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो व पात्र गृहस्थी में प्रति यूनिट 5 किलो तक खाद्यान्न देने की व्यवस्था रही है। जिले में अंत्योदय के 818 कार्डों पर 3475 व पात्र गृहस्थी के 17537 अपात्र कार्डों पर 84317 यूनिट अंकित है। इस लिहाज से हर माह सैकड़ों क्ंिवटल खाद्यान्न अपात्रों के हिस्से में जाता रहा है। एक तरफ पात्र गरीब समय से खाद्यान्न न मिलने से भूखे पेट सोते रहे हैं तो दूसरी ओर अपात्र गरीबों के हिस्से के खाद्यान्न से मजे लूटते आ रहे हैं।
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गरीबों को जीवन-यापन के लिए सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए अंत्योदय व पात्र गृहस्थी श्रेणी बनाई गई है। इन श्रेणियों में शामिल कार्डधारकों को न्यूनतम दर पर राशन, तेल कोटे की दुकानों के माध्यम से वितरित करने की व्यवस्था है। जिले में 82510 अंत्योदय व 345891 पात्र गृहस्थी श्रेणी के मरीजों की संख्या है। गरीबों की इस सूची में तमाम ऐेसे लोगों के भी नाम शामिल कर लिए गए थे, जो अपात्र हैं। हर माह वह गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न डकारते आ रहे हैं। डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया के दौरान योगी सरकार ने राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से गांव-गांव में कार्डधारकों के सत्यापन का निर्देश दिया था।
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31 अगस्त तक चले सत्यापन के बाद जारी हुई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस सूची में पात्र गृहस्थी श्रेणी के 17537 कार्ड ऐसे हैं, जो अपात्रों को दिए गए हैं। अंत्योदय कार्डधारकों की श्रेणी में 818 अपात्रों का नाम शामिल मिला। इन कार्डधारकों के नाम पर हर माह सैकड़ों क्विंटल खाद्यान्न आवंटित होता रहा है। अपात्रों के जरिए गरीबों के हिस्से का खाद्यान्न डकारकर बिचौलिए मालामाल होते रहे हैं। इस बाबत डीएसओ नरेंद्र तिवारी का कहना है कि सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए सभी कार्डों को निरस्त कर दिया गया है। उनके स्थान पर अंत्योदय श्रेणी में 818 व पात्र गृहस्थी श्रेणी में 19901 नए कार्डधारक चिह्नित किए गए हैं। अब इन्हें ही खाद्यान्न दिया जाएगा।
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अपात्रों के हिस्से जाता रहा सैकड़ों क्ंिवटल खाद्यान्न
जनवरी 2016 से प्रभारी खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर गौर करें तो अंत्योदय श्रेणी में प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो व पात्र गृहस्थी में प्रति यूनिट 5 किलो तक खाद्यान्न देने की व्यवस्था रही है। जिले में अंत्योदय के 818 कार्डों पर 3475 व पात्र गृहस्थी के 17537 अपात्र कार्डों पर 84317 यूनिट अंकित है। इस लिहाज से हर माह सैकड़ों क्ंिवटल खाद्यान्न अपात्रों के हिस्से में जाता रहा है। एक तरफ पात्र गरीब समय से खाद्यान्न न मिलने से भूखे पेट सोते रहे हैं तो दूसरी ओर अपात्र गरीबों के हिस्से के खाद्यान्न से मजे लूटते आ रहे हैं।