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वज्रपात के दौरान बरतें सावधानी
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श्रावस्ती। जिले में आए दिन बरसात हो रही है। इसके साथ ही कभी कभी गरज चमक के साथ बिजली भी गिर रही है। वहीं तेज बरसात के कारण पहाड़ी नालों सहित राप्ती का जल स्तर भी बढ़ घट रहा है। इससे बाढ़ व कटान का खतरा उत्पन्न है। नेपाल सीमा से सटा होने के कारण जिले में बाढ़, भूकंप, वज्रपात तथा आंधी आदि प्राकृतिक आपदा का खतरा भी रहता है। इससे सावधानी बरत कर खतरे से बचा जा सकता है।
इसके लिए शासन की ओर से आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि वज्रपात एक प्राकृतिक आपदा में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। यह विपरीत दिशा में जाते हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है, जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान होता है।
धरती पर बिजली पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती हैैै। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल-बगल से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय यदि कोई व्यक्ति उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है। बिजली का असर मानव शरीर पर कई गुना होता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्टअटैक होने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।
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आसमान में अंधेरा छा जाये और तेज हवा हो तो सतर्क हो जायें। यदि आप गड़गड़ाहट सुनते हैं तो समझ लें कि वज्रपात होने वाला है। जब तक बिल्कुल आवश्यक न हो बाहर न निकलें। इन परिस्थितियों में घर के अंदर रहे और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें। साइकिल, मोटर साइकिल, ट्रैक्टर आदि वाहनों से नीचे उतर जाएं। यह बिजली को आकर्षिक कर सकते हैं। अपने घर के बाहर खिड़कियों और दरवाजों को बंद कर दें। यह देख लें कि बच्चें व जानवर बाहर तो नहीं हैं।
बिजली के उपकरण को बंद कर दें। वज्रपात होने पर धातु के औजार जैसे कुदाल, कुल्हाड़ी, छाता, धातु का झूला, बगीचे की धातु की कुर्सी, छाते कैंची, चाकू आदि जैसी धातु की वस्तुओं से निकटता से बचे। वज्रपात होने पर दोनों पैरों और घुटनों को मोड़कर फर्श पर बैठ जाए। कान दोनों हाथों से बंद कर लें, इससे सुरक्षित रहेंगे।
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इसके लिए शासन की ओर से आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि वज्रपात एक प्राकृतिक आपदा में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। यह विपरीत दिशा में जाते हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है, जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान होता है।
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धरती पर बिजली पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती हैैै। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल-बगल से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय यदि कोई व्यक्ति उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है। बिजली का असर मानव शरीर पर कई गुना होता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्टअटैक होने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।
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आसमान में अंधेरा छा जाये और तेज हवा हो तो सतर्क हो जायें। यदि आप गड़गड़ाहट सुनते हैं तो समझ लें कि वज्रपात होने वाला है। जब तक बिल्कुल आवश्यक न हो बाहर न निकलें। इन परिस्थितियों में घर के अंदर रहे और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें। साइकिल, मोटर साइकिल, ट्रैक्टर आदि वाहनों से नीचे उतर जाएं। यह बिजली को आकर्षिक कर सकते हैं। अपने घर के बाहर खिड़कियों और दरवाजों को बंद कर दें। यह देख लें कि बच्चें व जानवर बाहर तो नहीं हैं।
बिजली के उपकरण को बंद कर दें। वज्रपात होने पर धातु के औजार जैसे कुदाल, कुल्हाड़ी, छाता, धातु का झूला, बगीचे की धातु की कुर्सी, छाते कैंची, चाकू आदि जैसी धातु की वस्तुओं से निकटता से बचे। वज्रपात होने पर दोनों पैरों और घुटनों को मोड़कर फर्श पर बैठ जाए। कान दोनों हाथों से बंद कर लें, इससे सुरक्षित रहेंगे।