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तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है...
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पुलिस लाइंस भिनगा में मुख्यमंत्री को पुष्प भेंट करते अधिकारी।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। अब तक जिले में हुए विकास कार्यों को देखने के लिए मंगलवार को सीएम जिले के दौरे पर आए। इस दौरान विकास की हकीकत देखने के लिए किसी गांव या स्कूल जाने के बजाए वह कलेक्ट्रेट सभागार में बहराइच व श्रावस्ती के अधिकारियों की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को फाइलों में देखते रहे। इसके बाद वह देवी पाटन मंदिर के लिए रवाना हो गए। इस पर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई। लोग सीएम के इस दौरे को अदम गोंडवी की पंक्ति तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे हैं यह दावा किताबी है... से जोड़ कर देख रहे हैं।
भारत नेपाल सीमा से सटे होने के कारण बहराइच व श्रावस्ती को तराई क्षेत्र कहा जाता है। जैसा नाम है वैसा यहां विकास का खाका भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, ग्रामीण विकास सहित कई मुद्दों मे श्रावस्ती फिसड्डी है। इसीलिए विगत दो वर्षों से नीति आयोग ने इन दोनों जिलों के विकास की जिम्मेदारी लेते हुए इसे विशिष्ट जिले का दर्जा दिया है।
दोनों जिलों का विकास हो इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें चिंतित है। इसी लिए विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने बहराइच व श्रावस्ती में एक वर्ष के अंदर कराए गए कार्यों की समीक्षा कलेक्ट्रेट में की। उन्होंने किसी भी कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं किया।
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अधिकारियों ने जिन फाइलों को समीक्षा के लिए उनके सामने रखा उसी में वह भी आंकड़ों की बाजीगरी को देख कर विकास को टटोलते रहे। दो घंटे चली इस बैठक में अधिकारियों ने उन्हें चमकते विकास की तस्वीर दिखाई। वह सब कुछ देख कर लगभग संतुष्ट भी रहे। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर लोग असंतुष्ट रहे।
चौक चौराहों पर इसको लेकर चर्चा का दौर भी शुरू हुआ। बुद्धजीवियों की माने तो यह दौरा महज कागजी था। यदि कागज में ही विकास की तस्वीर देखनी थी तो मुख्यमंत्री लाखों रुपये खर्च कराकर श्रावस्ती ही क्यों आए। वह लखनऊ में ही इन अधिकारियों को बुला कर कागजी गुणा-गणित की तस्वीर देख सकते थे। चर्चा के दौरान कुछ लोग अदम गोंडवी की की रचना तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे हैं यह दावा किताबी है का भी जिक्र करते नजर आए।
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भारत नेपाल सीमा से सटे होने के कारण बहराइच व श्रावस्ती को तराई क्षेत्र कहा जाता है। जैसा नाम है वैसा यहां विकास का खाका भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, ग्रामीण विकास सहित कई मुद्दों मे श्रावस्ती फिसड्डी है। इसीलिए विगत दो वर्षों से नीति आयोग ने इन दोनों जिलों के विकास की जिम्मेदारी लेते हुए इसे विशिष्ट जिले का दर्जा दिया है।
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दोनों जिलों का विकास हो इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें चिंतित है। इसी लिए विकास कार्यों की समीक्षा करने के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने बहराइच व श्रावस्ती में एक वर्ष के अंदर कराए गए कार्यों की समीक्षा कलेक्ट्रेट में की। उन्होंने किसी भी कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं किया।
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अधिकारियों ने जिन फाइलों को समीक्षा के लिए उनके सामने रखा उसी में वह भी आंकड़ों की बाजीगरी को देख कर विकास को टटोलते रहे। दो घंटे चली इस बैठक में अधिकारियों ने उन्हें चमकते विकास की तस्वीर दिखाई। वह सब कुछ देख कर लगभग संतुष्ट भी रहे। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर लोग असंतुष्ट रहे।
चौक चौराहों पर इसको लेकर चर्चा का दौर भी शुरू हुआ। बुद्धजीवियों की माने तो यह दौरा महज कागजी था। यदि कागज में ही विकास की तस्वीर देखनी थी तो मुख्यमंत्री लाखों रुपये खर्च कराकर श्रावस्ती ही क्यों आए। वह लखनऊ में ही इन अधिकारियों को बुला कर कागजी गुणा-गणित की तस्वीर देख सकते थे। चर्चा के दौरान कुछ लोग अदम गोंडवी की की रचना तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे हैं यह दावा किताबी है का भी जिक्र करते नजर आए।