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नहीं निकला सूरज, छह डिग्री तापमान में ठंड से कांपे लोग

Tue, 17 Dec 2019 10:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2019 10:30 PM IST
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The sun did not come out, people shivering with cold in six degree temperature
श्रावस्ती ममें शीतलहरी के बीच गर्म कपड़ों में लिपटे बच्चे। - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। तराई में सोमवार रात से शीतलहर का प्रकोप जारी है। कोहरा फुहार बन कर गिर रहा है। वहीं तेज बर्फीली हवा के कारण मौसम का पारा लुढ़क कर छह डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। आर्द्रता बढ़ने के कारण लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से न तो अलाव जलवाए गए और न ही गरीबों को कंबल ही वितरित किया गया।
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जिले में मौसम का मिजाज पूरी तरह से ठंडा हो चुका है। मंगलवार को सूरज के दर्शन नहीं हुए। सोमवार देर शाम शुरू हुआ घने कोहरे का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। फुहार बन कर गिरे कोहरे से मार्ग व पेड़ों के नीचे कीचड़ व फिसलन की समस्या रही। सोमवार की शाम से करीब 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पश्चिमोत्तर बर्फीली हवा के कारण मंगलवार को आर्द्रता बढ़ कर 75 प्रतिशत पर पहुंच गई।
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वहीं तराई में मंगलवार को अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस रहा। अचानक शुरू शीत लहर के कारण लोगों को कड़ाके की ठंड से जूझना पड़ रहा है। इसका असर सिर्फ इंसान ही नहीं मवेशियों पर भी दिखा। दिन में भी लोग घरों में रुकने को मजबूर हो रहे।
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वहीं विद्यालय खुले होने के कारण बच्चों को ठंड में कांपते हुए जाना पड़ा। इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के मौसम विभाग के नोडल डॉ. एमबी सिंह बताते हैं कि तराई का तापमान अभी और गिर सकता है। लोग लापरवाही न बरतें, अन्यथा यह स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
नहीं जले अलाव, ठंड से बचने को जलाया कूड़ा
तराई में शीतलहर से जनजीवन बेहाल हो गया है। इसके बावजूद भिनगा व इकौना नगर, अस्पताल, न्यायालय परिसर, तहसील व कलेक्ट्रेट सहित जिले के प्रमुख कस्बों व बाजारों तथा चौक चौराहों पर अब तक अलाव नहीं जलवाया गया। ऐसे में मंगलवार को तहसील दिवस होने के कारण अपनी फरियाद लेकर आए फरियादी ठंड से बेहाल दिखे। इससे बचने के लिए फरियादियों को कागज व आसपास पड़े पॉलीथिन आदि को जला कर ठंड से बचने का प्रयास करते देखा गया। वहीं न्यायालय परिसर में लोग ठंड से कांपते रहे।
बिन कंबल कैसे कटे गरीबों की रात
पूस मास की कड़ाके की ठंड गरीबों पर भारी पड़ने लगी है। इसके बावजूद जिला व तहसील प्रशासन की ओर से कंबल वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कराई गई है। प्रशासन की हीलाहवाली के कारण गरीब, वृद्ध व बेसहारा लोग बिना गर्म कपड़े व कंबल के कांपते हुए रात बिताने को विवश देखे जा रहे हैं। यह कंबल वितरण प्रक्रिया कब प्रारंभ होगी, इसकी सही जानकारी देने से अभी अधिकारी भी कतरा रहे हैं।
संसाधन विहीन रैन बसेरों में कैसे कटे रात
जिले में लाखों रुपये खर्च कर बनवाए गए रैन बसेरे चारों तरफ से खुले हुए हैं। बरामदा नुमा बने इन रैन बसेरों में दीवार खिड़की व दरवाजा न होने के कारण सभी ओर से सर्द हवाएं लोगों को खुले में होने का अहसास दिला रही है। कुछ रैन बसेरों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी रैन बसेरे में न तो कंबल की व्यवस्था है और न ही अलाव के लिए लकड़ी की। ऐसे में गरीब इनका सहारा लेने से बेहतर होटल की भट्ठियों के सामने बैठ कर रात काटना बेहतर मान रहे हैं।

शीतलहर से लोगों को बचाने के लिए नगर निकाय व तहसीलों को अलाव जलाने का निर्देश व पैसा दिया जा चुका है। बुधवार से ऐसा ही रहा तो सभी जगह अलाव जलवा दिया जाएगा। रही बात कंबल वितरण व रैन बसेरों में असुविधा की तो तत्काल इसकी व्यवस्था कराई जाएगी। जिससे किसी को कोई परेशानी न होने पाएं। - योगानंद पांडेय, अपर जिलाधिकारी
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