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Shravasti News: बूढ़ी राप्ती के पुनर्जीवित होने से आसपास के किसानों को मिलेगी राहत
Fri, 11 Jul 2025 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:01 AM IST
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अमर उजाला में प्रकाशित समाचार। संवाद
श्रावस्ती। बूढ़ी राप्ती नदी अपने पुराने स्वरूप में लाई जाएगी। इसमें मनरेगा योजना व संबंधित विभागों सहित जनता का सहयोग लिया जाएगा। इससे न सिर्फ आसपास के किसानों को सुविधा होगी बल्कि भूगर्भ जलस्तर में भी सुधार होगा। ‘अमर उजाला’ की खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम व सीडीओ ने बृहस्पतिवार को नदी के पुनरुद्धार की शुरुआत की।
‘अमर उजाला’ ने 26 जून के अंक में ‘बूढ़ी राप्ती को भागीरथ का इंतजार’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से सचित्र प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर बृहस्पतिवार को डीएम अजय कुमार द्विवेदी व सीडीओ शाहिद अहमद ने भिनगा के हरिहरपुररानी स्थित बूढ़ी राप्ती के तट पर पूजन किया। इसके बाद फावड़ा चलाकर नदी के पुनरुद्धार कार्यक्रम की शुरुआत की।
डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विलुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में बूढ़ी राप्ती नदी के पुनरुद्धार के लिए रिमोट सेंसिंग के माध्यम से नदी के संरेखण को चिह्नित किया गया है। बरसात बाद मनरेगा व जन सहयोग से नदी के पुनरुद्धार का कार्य वृहद स्तर पर होगा। जिससे अगले वर्ष बरसात से पूर्व बूढ़ी राप्ती नदी अपने मूल स्वरूप में लौट सके।
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नदी की कुल लंबाई 67.03 किलोमीटर व कैचमेंट एरिया 18356.64 हेक्टेयर है। बूढ़ी राप्ती नदी 16.91 किलोमीटर लंबाई में पूर्ण रूप से अवरोधित है। अवशेष 51.12 किलोमीटर नदी का स्वरूप विद्यमान है।
54 ग्रामों से गुजरती है बूढ़ी राप्ती नदी
प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह पुनरुद्धार कार्य कराया जा रहा है। इससे आसपास के किसानों को राहत मिलेगी। यह नदी हरिहरपुररानी के ग्राम मोहम्मदपुर से निकलती है। जो 54 ग्रामों से होते हुए इकौना के ग्राम-बंदरहा व गोविंद चौराहे के पास राप्ती नदी में गिरती है। रिमोट सेंसिंग के वर्ष 2014 एवं 2024 के डाटा से स्पष्ट हुआ कि नदी के प्रवाह क्षेत्र में वृहद परिवर्तन नहीं हुआ है। नदी के कैचमेंट के अनुसार पुनर्जीवन हेतु सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। सर्वेक्षण के पश्चात कैचमेंट एरिया में होने वाली वर्षा एवं अन्य ड्रेनों के प्रवाह को शामिल करते हुए नदी की सफाई के लिए मिट्टी की मात्रा का आकलन करते हुए बूढ़ी राप्ती के पुनर्जीवन का कार्य कराया जाएगा।
- अजय कुमार द्विवेदी, डीएम
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‘अमर उजाला’ ने 26 जून के अंक में ‘बूढ़ी राप्ती को भागीरथ का इंतजार’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से सचित्र प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर बृहस्पतिवार को डीएम अजय कुमार द्विवेदी व सीडीओ शाहिद अहमद ने भिनगा के हरिहरपुररानी स्थित बूढ़ी राप्ती के तट पर पूजन किया। इसके बाद फावड़ा चलाकर नदी के पुनरुद्धार कार्यक्रम की शुरुआत की।
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डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विलुप्त हो रही नदियों को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में बूढ़ी राप्ती नदी के पुनरुद्धार के लिए रिमोट सेंसिंग के माध्यम से नदी के संरेखण को चिह्नित किया गया है। बरसात बाद मनरेगा व जन सहयोग से नदी के पुनरुद्धार का कार्य वृहद स्तर पर होगा। जिससे अगले वर्ष बरसात से पूर्व बूढ़ी राप्ती नदी अपने मूल स्वरूप में लौट सके।
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नदी की कुल लंबाई 67.03 किलोमीटर व कैचमेंट एरिया 18356.64 हेक्टेयर है। बूढ़ी राप्ती नदी 16.91 किलोमीटर लंबाई में पूर्ण रूप से अवरोधित है। अवशेष 51.12 किलोमीटर नदी का स्वरूप विद्यमान है।
54 ग्रामों से गुजरती है बूढ़ी राप्ती नदी
प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह पुनरुद्धार कार्य कराया जा रहा है। इससे आसपास के किसानों को राहत मिलेगी। यह नदी हरिहरपुररानी के ग्राम मोहम्मदपुर से निकलती है। जो 54 ग्रामों से होते हुए इकौना के ग्राम-बंदरहा व गोविंद चौराहे के पास राप्ती नदी में गिरती है। रिमोट सेंसिंग के वर्ष 2014 एवं 2024 के डाटा से स्पष्ट हुआ कि नदी के प्रवाह क्षेत्र में वृहद परिवर्तन नहीं हुआ है। नदी के कैचमेंट के अनुसार पुनर्जीवन हेतु सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। सर्वेक्षण के पश्चात कैचमेंट एरिया में होने वाली वर्षा एवं अन्य ड्रेनों के प्रवाह को शामिल करते हुए नदी की सफाई के लिए मिट्टी की मात्रा का आकलन करते हुए बूढ़ी राप्ती के पुनर्जीवन का कार्य कराया जाएगा।
- अजय कुमार द्विवेदी, डीएम