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सामाजिक उत्थान के लिए संस्कारवान शिक्षा की जरूरत
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इकौना के आर्य समाज मंदिर में पूजा अर्चना के बाद भारतीय नववर्ष का स्वागत करते हुए निकाला गया जुलूस
- फोटो : SRAWASTI
इकौना (श्रावस्ती)। भारतीय नववर्ष का शनिवार को नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया। इस मौके पर इकौना के आर्य समाज मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में नववर्ष के स्वागत में पूजन अर्चन के बाद हिंदू संगठन व व्यापारियों की ओर से एक जुलूस भी निकाला गया। श्रावस्ती विधायक समेत कई गणमान्य लोगों ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी की।
अपने संबोधन में विधायक रामफेरन पांडे ने कहा कि महाराजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित संवत्सर से युग, समय, यज्ञ व वैवाहिक कार्यों की गणना की जाती है। अफसोस जताया कि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण नव संवत्सर अज्ञानता के आगोश में सिमटता जा रहा है। यह संस्कृति व सभ्यता के लिए खतरनाक संकेत है। इस लिए सामाजिक उत्थान के लिए संस्कारवान शिक्षा की अहम जरूरत आन पढ़ी है।
भारतीय हिंदू महासंघ के कन्हैया कसौंधन ने कहा कि शिक्षा के साथ ही संस्कार की भी आवश्यकता होती है। यह संस्कार केवल शिक्षा के मंदिरों में ही मिल सकती है। भगौती प्रसाद मिश्रा सेवा हॉस्पिटल ले प्रबंधक डा. रमेश मिश्रा ने कहाकि भारत के अखड़ंता और एकता को सहेजने के लिए सभी भारतीय को एक होना होगा। पश्चिम देशों की सभ्यता को दर किनार कर भारतीय परम्पराओं को अपनाना होगा।
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अपने संबोधन में विधायक रामफेरन पांडे ने कहा कि महाराजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित संवत्सर से युग, समय, यज्ञ व वैवाहिक कार्यों की गणना की जाती है। अफसोस जताया कि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण नव संवत्सर अज्ञानता के आगोश में सिमटता जा रहा है। यह संस्कृति व सभ्यता के लिए खतरनाक संकेत है। इस लिए सामाजिक उत्थान के लिए संस्कारवान शिक्षा की अहम जरूरत आन पढ़ी है।
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भारतीय हिंदू महासंघ के कन्हैया कसौंधन ने कहा कि शिक्षा के साथ ही संस्कार की भी आवश्यकता होती है। यह संस्कार केवल शिक्षा के मंदिरों में ही मिल सकती है। भगौती प्रसाद मिश्रा सेवा हॉस्पिटल ले प्रबंधक डा. रमेश मिश्रा ने कहाकि भारत के अखड़ंता और एकता को सहेजने के लिए सभी भारतीय को एक होना होगा। पश्चिम देशों की सभ्यता को दर किनार कर भारतीय परम्पराओं को अपनाना होगा।
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