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Shravasti News: अनाथपिंडक का पौराणिक महल उपेक्षित

Fri, 04 Apr 2025 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Fri, 04 Apr 2025 11:38 PM IST
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The legendary palace of Anathapinaka neglected
तपोस्थली ​स्थित अनाथपिंडक।
कटरा (श्रावस्ती)। महात्मा बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में स्थित अनाथ पिंडक उपेक्षित है। कभी इसी स्थान पर श्रावस्ती के सेठ सुदत्त उर्फ अनाथपिंडक तथागत भगवान बुद्ध को पहली बार लेकर आए थे। सुरक्षा व संरक्षण के अभाव में आज यह स्थान व अनाथ पिंडक का महल उपेक्षित है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक 24 वर्ष श्रावस्ती में ही व्यतीत किए थे।
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बौद्ध ग्रंथों में अनाथपिंडक की बुद्ध से पहली मुलाकात बिहार राज्य के नालंदा स्थित राजगिर में होने का वर्णन मिलता है, जो अनाथपिंडक का ननिहाल था। वहीं से बुद्ध को लेकर वह श्रावस्ती आए। श्रावस्ती प्राचीन काल के 16 महानगरों में से एक थी। यहां के सेठ सुदत्त, जिन्हें अनाथपिंडक कहा जाता है, उनका महल था जो अंगुलिमाल स्तूप के सामने स्थित है। यहीं बुद्ध ने पहली बार श्रावस्ती में कदम रखा था। यह स्थान बुद्ध को काफी पसंद आ गया। तब सेठ सुदत्त ने श्रावस्ती के राजा प्रसेनजीत के पुत्र जेत कुमार के सामने 1800 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं बिछा कर बाग को खरीदा था। हालांकि बाद में राजा प्रसेनजित ने वह स्वर्ण मुद्राएं भगवान बुद्ध को भेंट कर दीं। इसी के बाद से इस स्थान का नाम जेतवन पड़ा। यहां तथागत ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, गंध कुटी, सभामंडप, कौशंब कुटी, शिवली स्तूप, सूर्य कुंड, आनंद कुटी का निर्माण कराया। साथ ही यही संघाराम बुद्ध विहार का निर्माण कराया गया। यह परिसर काफी ऊंचा था। यहां कभी अचरावती (अब राप्ती नदी) की बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा। यही नहीं बौद्ध काल में ही 365 एकड़ में फैले श्रावस्ती नगर को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए चारों तरफ बंधे का निर्माण कराया गया था, जिसके अवशेष आज भी मौजूद हैं।
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