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Shravasti News: थाईलैंड से गंधुकुटी पहुंचे अनुयायियों ने की प्रार्थना

Sat, 17 May 2025 02:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Sat, 17 May 2025 02:04 AM IST
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The followers who reached Gandhukuti from Thailand prayed
गंधकुटी में प्रार्थना करते थाईलैंड से आए अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से आए अनुयायियों ने अपने रीति-रिवाज में भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर प्रार्थना की।
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इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि बौद्ध काल में शिक्षा मनुष्य के सर्वांगीण विकास का साधन थी। इसका उद्देश्य मात्र पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं था, बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य का भी विकास करना था। बौद्ध युग में शिक्षा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक उत्थान का सर्वप्रमुख माध्यम थी। बौद्ध साहित्य में व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना शिक्षा का महत्व, उद्देश्य बताया गया है। चरित्र व आचरणहीन व्यक्ति की सर्वत्र निंदा की गई है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति विश्व की सर्वाधिक रोचक तथा महत्वपूर्ण सभ्यताओं में एक है। इस सभ्यता के संपूर्ण ज्ञान के लिए इसकी शिक्षा पद्धति का अध्ययन आवश्यक है। प्राचीन भारतीयों ने शिक्षा को आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया है। भौतिक तथा आध्यात्मिक उत्थान व समाज के विभिन्न उत्तर-दायियों के निर्वाह में शिक्षा की महत्ता को सदा स्वीकार किया गया है। वैदिक युग से ही इसे प्रकाश का स्रोत माना गया है। जो मानव के विभिन्न क्षेत्रों को आलोकित करते हुए सही दिशा निर्देश देता है। इस मौके पर काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे। (संवाद)
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