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Shravasti News: न्यायालयों में मुकदमों का भार, न्यायिक अधिकारियों की कुर्सी खाली

Tue, 13 Jun 2023 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Tue, 13 Jun 2023 12:12 AM IST
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The burden of cases in the courts, the chair of judicial officers is vacant
श्रावस्ती। कई न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों का पद रिक्त होने के कारण मुकदमों का निस्तारण धीमी रफ्तार से हो रहा है। जिससे न्यायालयों पर मुकदमों का भार बढ़ता जा रहा है।
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जनपद न्यायालय सहित सोलह न्यायालयों में सिविल के 7509 व क्रिमिनल के 42967 मामले विचाराधीन हैं। काफी समय से अपर जिला जज रेप एंड पॉक्सो, अपर जिला जज चौदहवां वित्त, अपर सीनियर डिवीजन, सीनियर डिवीजन त्वरित न्यायालय और अपर जूनियर डिवीजन का पद रिक्त है। जिनके न्यायालय का संचालन प्रभारियों के सहारे हो रहा है।
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ऐसे में जहां प्रभारी न्यायाधीशों के पास अपने न्यायालयों के मुकदमों का अधिभार है। वहीं अतिरिक्त न्यायालयों का भी कार्य उन्हें देखना पड़ रहा है। ऐसे में मुकदमों की संख्या अधिक होने से सुनवाई में भी देर हो रही है। इससे न्याय की आस में न्यायालयों की शरण में आने वाले फरियादियों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
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लोक अदालतों में बढ़ी आस्था
न्यायालयों पर लंबे समय से न्याय क लिए चक्कर लगाने वाले पक्षकार बार बार तारीख मिलने से परेशान हो रहे हैं। ऐसे में उनकी त्वरित न्याय मिलने की आस भी टूटने लगती है। इस कारण पक्षकार नफा व नुकसान भूलकर ज्यादातर मामलों में सुलह व जुर्म स्वीकार कर लेना ही मुनासिब समझ रहे हैं। ऐसे में वह अपने मामलों के निस्तारण के लिए न्यायालयों पर लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत का सहारा ले रहे हैं। जहां सुलह समझौता, जुर्म स्वीकारोक्ति व जुर्माना अदा कर मुकदमों से मुक्ति लेने में ही अपनी भलाई मान रहे हैं।
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