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जालसाजी कर शिक्षक की नौकरी करने वाले की जमानत अर्जी खारिज
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श्रावस्ती। दूसरे के दस्तावेजों पर शिक्षक की नौकरी करने वाले की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। इस मामले की सुनवाई सोमवार को जिला सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में हुई। बेसिक शिक्षा विभाग में दूसरों के नाम पर शिक्षक की नौकरी करने वाले कई शिक्षकों के खिलाफ विभाग ने पहले ही एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी में एक शिक्षक कन्हैया सिंह के भी मामले का खुलासा हुआ था। कन्हैया सिंह की नियुक्ति एक जुलाई 2011 में बतौर सहायक अध्यापक सिरसिया में हुई थी।
18 अप्रैल को उन्हें प्रोन्नत करते हुए सिरसिया में ही प्रधानाध्यापक बना दिया गया था। इसी के बाद विभाग को शक हुआ। बीएसए ने कन्हैया सिंह को अभिलेख लेकर कार्यालय में आने के लिए कई नोटिस भेजा। इसके बाद वह कार्यालय आने के बजाए फरार हो गया। इस पर बीएसए ने उसे फर्जी शिक्षक मानते हुए सिरसिया थाने में एबीएसए को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था।
इस एफआईआर के बाद जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पुलिस को उसका बैंक खाता, जिसमें वेतन का पैसा जाता था, उसमें लगे मोबाइल नंबर से जब फर्जी शिक्षक को खोजना प्रारंभ किया गया तो पता चला कि जो कन्हैया सिंह के स्थान पर नौकरी कर रहा था, वह वास्तव में बलरामपुर जनपद के थाना उतरौला के ग्राम देवरिया निवासी क्रांति कुमार उपाध्याय है, जो कन्हैया सिंह का अभिलेख लगाकर नौकरी कर रहा था।
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इसकी पुष्टि उसकी शिक्षामित्र पत्नी सुमन शर्मा के अभिलेखों से भी हुई। पति के रूप में उसका फोटो चस्पा पाया गया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने क्रांति कुमार को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक कर रहे थे। सोमवार को इस मामले में सरकार की पैरवी कर रहे डीजीसी क्रिमिनल केपी सिंह के विरोध व तथ्यों के बाद न्यायालय ने आरोपी शिक्षक की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
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18 अप्रैल को उन्हें प्रोन्नत करते हुए सिरसिया में ही प्रधानाध्यापक बना दिया गया था। इसी के बाद विभाग को शक हुआ। बीएसए ने कन्हैया सिंह को अभिलेख लेकर कार्यालय में आने के लिए कई नोटिस भेजा। इसके बाद वह कार्यालय आने के बजाए फरार हो गया। इस पर बीएसए ने उसे फर्जी शिक्षक मानते हुए सिरसिया थाने में एबीएसए को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था।
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इस एफआईआर के बाद जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पुलिस को उसका बैंक खाता, जिसमें वेतन का पैसा जाता था, उसमें लगे मोबाइल नंबर से जब फर्जी शिक्षक को खोजना प्रारंभ किया गया तो पता चला कि जो कन्हैया सिंह के स्थान पर नौकरी कर रहा था, वह वास्तव में बलरामपुर जनपद के थाना उतरौला के ग्राम देवरिया निवासी क्रांति कुमार उपाध्याय है, जो कन्हैया सिंह का अभिलेख लगाकर नौकरी कर रहा था।
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इसकी पुष्टि उसकी शिक्षामित्र पत्नी सुमन शर्मा के अभिलेखों से भी हुई। पति के रूप में उसका फोटो चस्पा पाया गया था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने क्रांति कुमार को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक कर रहे थे। सोमवार को इस मामले में सरकार की पैरवी कर रहे डीजीसी क्रिमिनल केपी सिंह के विरोध व तथ्यों के बाद न्यायालय ने आरोपी शिक्षक की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।