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Shravasti News: मातृत्व सुख से वंचित कर सकता है धूम्रपान

Wed, 13 Mar 2024 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Wed, 13 Mar 2024 01:33 AM IST
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Smoking can deprive you of the joy of motherhood
धूम्रपान निषेध दिवस (13 मार्च) पर विशेष
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मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। धूम्रपान अथवा तंबाकू का किसी दूसरे रूप में सेवन से गर्भवती और उसके गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (2019-21) के अनुसार जिले में 15 साल की उम्र तक की 13.8 प्रतिशत किशोरियां किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं।
सीएमओ डाॅ. एपी सिंह ने बताया कि जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं, उन्हें गर्भधारण करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। धूम्रपान शरीर में विटामिन-सी की मात्रा को कम करता है। जो कि आयरन के अवशोषण में अहम भूमिका निभाता है। इससे गर्भवती में खून की कमी भी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क व फेफड़े के ऊतकों के नष्ट होने की संभावना भी रहती है। साथ ही कुछ शोध से पता चला है कि नवजात को जन्मजात विकृति जैसे होंठ कटे भी हो सकते हैं। साथ ही गर्भपात होने की संभावना रहती है। गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, समय से पहले बच्चे का जन्म, मृत बच्चे का जन्म, जन्मजात विकृति, कम वजन के बच्चे का जन्म व प्रीक्लेम्पसिया भी हो सकती है। वर्ष 2021 के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हेल्थ एंड साइंस में प्रकाशित शोध के अनुसार महिला द्वारा किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन उसके और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। तंबाकू और उसके उत्पादों के सेवन से होने वाली मृत्यु और बीमारी को रोकने के लिए गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
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धूम्रपान से यह होती समस्या
गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिला के गर्भवती होने के पहले तीन महीने के भीतर गर्भपात हो सकता है। कई बार गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद भी गर्भपात हो सकता है। धूम्रपान के दौरान तंबाकू के धुएं में मौजूद हानिकारक केमिकल्स भू्रण के विकास को रोकने और उसे नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। गर्भावस्था में धूम्रपान करने से मां के शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा नहीं पहुंचती है। इससे शिशु को सांस संबंधी परेशानी हो सकती है। उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।
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धूम्रपान रोकने को है कानून
प्रति वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को धूम्रपान निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1984 में हुई थी। सरकार ने इससे लोगों को बचाने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानून कोटपा-2003 बनाया था। जिसकी धारा 5 के अनुसार किसी भी तंबाकू उत्पाद का विज्ञापन या प्रायोजन, नाबालिगों द्वारा तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। शैक्षणिक संस्थानों के 300 फीट के दायरे में तंबाकू उत्पाद नहीं बेचे जा सकते। कानून की धारा 4 के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। कोई सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता है तो उसे 200 रुपये जुर्माना का प्रावधान है। -प्रवीण कुमार यादव, एएसपी
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