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वन भूमि पर बनाई जा रही सड़क का निर्माण रोका
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श्रावस्ती। वन भूमि में बनाई जा रही भिनगा लक्ष्मनपुर सड़क को वन विभाग ने रोक दिया है। यह सड़क वन विभाग की एनओसी के बिना ही बनाई जा रही थी। इस रोड पर 29 करोड़ का खर्च होना था। वन विभाग का आरोप है कि बिना उसकी अनुमति व सहमति के ही उसके स्वामित्व की जमीन से मिट्टी निकाल कर उसी के क्षेत्र में पटाई की जाने लगी।
भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग अत्यंत जर्जर था। इस मार्ग के निर्माण के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जाने के बाद सरकार ने इसे टू-लेन रोड के बतौर बनाने की मंजूरी देते हुए 29 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया। बजट जारी होने के बावजूद लोक निर्माण विभाग की एक बड़ी चूक ने पूरी परियोजना को फिलहाल अधर में लटका दिया है। भिनगा से लक्ष्मनपुर के बीच करीब पांच किलोमीटर भिनगा रेंज की वन भूमि पड़ती है। इसमें खैर के पेड़ लगे हुए हैं।
यही नहीं इस सड़क के दूसरी पटरी पर ग्रामीण क्षेत्र है। वहां पर किसानों के अपने खेत हैं। सड़क निर्माण व चौड़ीकरण के लिए इस्टीमेट तैयार करते समय किसानों के साथ ही वन विभाग के स्वामित्व की भूमि पर सड़क बनवाने की कोई एनओसी नहीं ली गई। यही नहीं सड़क निर्माण में प्रयोग को ली गयी किसानों को भूमि का मुआवजा भी तय नहीं किया गया।
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ठेकेदार फर्म ने सड़क चौड़ीकरण का कार्य मिलते ही बिना किसी की अनुमति के ही वन विभाग की भूमि पर मिट्टी खोद कर पटाई का काम भी शुरू कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर डीएफओ सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने तत्काल प्रभाव से सड़क निर्माण का कार्य बंद करवाते हुए उसकी जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण की जानकारी भी अधिकारियों को भेजी। फिलहाल वन विभाग की एनओसी के बिना सड़क निर्माण की यह पूरी परियोजना बीच में ही अटक गयी है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसके हरित ने बताया कि वन भूमि की जमीन में किसी भी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाएगा। भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग का अधिकांश हिस्सा वन भूमि में ही निर्मित है। इसके लिए पहले सिंगल लेन ग्रामीण सड़क। जिसमें सड़क की चौड़ाई तीन मीटर व दोनों तरफ डेढ़ डेढ़ मीटर की पटरी बनी थी। इसका चौड़ीकरण होने पर सड़क की चौड़ाई सात मीटर व पटरियां डेढ़ डेढ़ मीटर प्रस्तावित थी।
वन भूमि में निर्माण कार्य के लिए पहले आवेदन दिया जाता है। यह आवेदन निर्धारित प्रारूप पर पीसीसीएफ कार्यालय होते हुए भारत सरकार जाता है। जहां वन एवं पर्यावरण मंत्रा की हाईपावर कमेटी इस पर निर्णय लेती है कि एनओसी दी जाए या न दी जाए। एनओसी मिलने की स्थिति में भूमि का मुआवजा व होने वाली हानि की भरपाई लोक निर्माण विभाग को वन विभाग में करना होगा। इस के बाद कोई निर्माण संभव है। इस प्रक्रिया में कम से कम तीन माह तो अधिकतम कई वर्ष लग सकते हैं।
प्रस्तावित भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग के दोनों ओर अधिकांश तौर से वन विभाग की भूमि है। जिस पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। कुछ हिस्से में कार्य भी किया गया। इसकी अनुमति वन विभाग से न मिलने के कारण ही इसे रोक दिया गया है। एनओसी लिए बिना किसी भी हालत में कोई काम नहीं होने दिया जाएगा।
एपी यादव, डीएफओ
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भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग अत्यंत जर्जर था। इस मार्ग के निर्माण के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जाने के बाद सरकार ने इसे टू-लेन रोड के बतौर बनाने की मंजूरी देते हुए 29 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया। बजट जारी होने के बावजूद लोक निर्माण विभाग की एक बड़ी चूक ने पूरी परियोजना को फिलहाल अधर में लटका दिया है। भिनगा से लक्ष्मनपुर के बीच करीब पांच किलोमीटर भिनगा रेंज की वन भूमि पड़ती है। इसमें खैर के पेड़ लगे हुए हैं।
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यही नहीं इस सड़क के दूसरी पटरी पर ग्रामीण क्षेत्र है। वहां पर किसानों के अपने खेत हैं। सड़क निर्माण व चौड़ीकरण के लिए इस्टीमेट तैयार करते समय किसानों के साथ ही वन विभाग के स्वामित्व की भूमि पर सड़क बनवाने की कोई एनओसी नहीं ली गई। यही नहीं सड़क निर्माण में प्रयोग को ली गयी किसानों को भूमि का मुआवजा भी तय नहीं किया गया।
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ठेकेदार फर्म ने सड़क चौड़ीकरण का कार्य मिलते ही बिना किसी की अनुमति के ही वन विभाग की भूमि पर मिट्टी खोद कर पटाई का काम भी शुरू कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर डीएफओ सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने तत्काल प्रभाव से सड़क निर्माण का कार्य बंद करवाते हुए उसकी जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण की जानकारी भी अधिकारियों को भेजी। फिलहाल वन विभाग की एनओसी के बिना सड़क निर्माण की यह पूरी परियोजना बीच में ही अटक गयी है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसके हरित ने बताया कि वन भूमि की जमीन में किसी भी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं किया जाएगा। विधिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाएगा। भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग का अधिकांश हिस्सा वन भूमि में ही निर्मित है। इसके लिए पहले सिंगल लेन ग्रामीण सड़क। जिसमें सड़क की चौड़ाई तीन मीटर व दोनों तरफ डेढ़ डेढ़ मीटर की पटरी बनी थी। इसका चौड़ीकरण होने पर सड़क की चौड़ाई सात मीटर व पटरियां डेढ़ डेढ़ मीटर प्रस्तावित थी।
वन भूमि में निर्माण कार्य के लिए पहले आवेदन दिया जाता है। यह आवेदन निर्धारित प्रारूप पर पीसीसीएफ कार्यालय होते हुए भारत सरकार जाता है। जहां वन एवं पर्यावरण मंत्रा की हाईपावर कमेटी इस पर निर्णय लेती है कि एनओसी दी जाए या न दी जाए। एनओसी मिलने की स्थिति में भूमि का मुआवजा व होने वाली हानि की भरपाई लोक निर्माण विभाग को वन विभाग में करना होगा। इस के बाद कोई निर्माण संभव है। इस प्रक्रिया में कम से कम तीन माह तो अधिकतम कई वर्ष लग सकते हैं।
प्रस्तावित भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग के दोनों ओर अधिकांश तौर से वन विभाग की भूमि है। जिस पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। कुछ हिस्से में कार्य भी किया गया। इसकी अनुमति वन विभाग से न मिलने के कारण ही इसे रोक दिया गया है। एनओसी लिए बिना किसी भी हालत में कोई काम नहीं होने दिया जाएगा।
एपी यादव, डीएफओ