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धान की कटाई को तैयार नहीं मजदूर

Fri, 28 Oct 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Oct 2022 11:09 PM IST
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श्रावस्ती। जिले के धान किसानों पर मौसम की तिहरी मार पड़ रही है। पहले सूखा फिर बाढ़ झेल चुके धान किसानों के सामने अब बची फसल को सुरक्षित करने में दिक्कत आ रही है। खेतों में जलभराव की वजह से फसल को काट कर सुरक्षित करना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। पानी में डूबी फसल मजदूर काटने को तैयार नहीं हैं।
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किसानों की ओर से आधी फसल देने की बात कहने के बावजूद मजदूर धान काटने से किनारा किए हुए हैं। ऐसे में किसान खेतों में चारपाई रखकर इसी पर फसल सुखा रहे हैं। इसके अलावा सड़क, दीवार, छप्पर, टिनशेड व छत आदि पर रखकर भी फसल सुखाई जा रही है। जमुनहा के गौसपुर, ददौरा, नासिरगंज, खलीफतपुर, चौगोई, उत्मापुर, तुलसीपुर, माल भौखारा, चंदर्खा बुजुर्ग, ककंधू, धुमबोझी, सहित सिरसिया व इकौना क्षेत्र के खेतों में यह नजारा देखा जा सकता है।
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वहीं, जिले में तमाम किसान तोरिया काट कर गेहूं की बोआई करते थे। तोरिया की बोआई करने का अंतिम समय 15 अक्तूबर बीत चुका है। यदि किसान अब तोरिया की बोआई करते भी हैं तो आगामी दिनों पड़ने वाले कोहरे व पाले के कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में किसान अब सरसों की खेती कर नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं। सरसों की बोआई सात नवंबर तक हर हाल में हो जानी चाहिए।
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देखा जाए तो अभी खेतों में पानी भरा है और धान की फसल भी लगी हुई है। ऐसे में नवंबर माह के प्रथम सप्ताह में ज्यादातर किसानों के लिए सरसों की बोआई कर पाना संभव नहीं होगा। ऐसे में किसान अब गेहूं के साथ सह फसली के रूप में सरसों की बोआई करने को विवश होंगे। खेतों में पानी भरा होने के कारण इस बार रबी की बोआई प्रभावित होगी जिसका असर पैदावार पर पड़ेगा। संवाद
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