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वियतनाम से आए 300 अनुयायियों ने की पूजा
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली, श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 300 व लंका के 25 सदस्यीय दल ने पारंपरिक रीतिरिवाज से गंध कुटि पर प्रार्थना की। इस दौरान अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
गंध कुटि पर पूजन के दौरान वियतनाम से आए बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है। इसके संस्थापक भगवान बुद्ध, शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे। बुद्ध राजा शुद्धोदन के पुत्र थे और इनका जन्म लुंबिनी नामक ग्राम (नेपाल) में हुआ था। वह छठीं से पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक जीवित थे। उनके गुजरने के बाद अगली पांच शताब्दियों में बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जंबू महाद्वीप में भी फैल गया। आज बौद्ध धर्म में तीन मुख्य संप्रदाय हैं। थेरवाद, महायान और वज्रयान।
बौद्ध धर्म को पैंतीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है। गौतम बुद्ध ने जिस ज्ञान की प्राप्ति की थी उसे ‘बोधि’ कहते हैं। माना जाता है कि बोधि पाने के बाद ही संसार से छुटकारा पाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने कौशांबी कुटी ,शिवली स्तूप ,आनंद बोधि, राहुल कुटी ,संघाराम विहार, अंगुलिमाल आदि का भ्रमण किया।
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गंध कुटि पर पूजन के दौरान वियतनाम से आए बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहा कि बौद्ध धर्म भारत की श्रमण परंपरा से निकला धर्म और दर्शन है। इसके संस्थापक भगवान बुद्ध, शाक्यमुनि (गौतम बुद्ध) थे। बुद्ध राजा शुद्धोदन के पुत्र थे और इनका जन्म लुंबिनी नामक ग्राम (नेपाल) में हुआ था। वह छठीं से पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व तक जीवित थे। उनके गुजरने के बाद अगली पांच शताब्दियों में बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला और अगले दो हजार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जंबू महाद्वीप में भी फैल गया। आज बौद्ध धर्म में तीन मुख्य संप्रदाय हैं। थेरवाद, महायान और वज्रयान।
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बौद्ध धर्म को पैंतीस करोड़ से अधिक लोग मानते हैं और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म है। गौतम बुद्ध ने जिस ज्ञान की प्राप्ति की थी उसे ‘बोधि’ कहते हैं। माना जाता है कि बोधि पाने के बाद ही संसार से छुटकारा पाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने कौशांबी कुटी ,शिवली स्तूप ,आनंद बोधि, राहुल कुटी ,संघाराम विहार, अंगुलिमाल आदि का भ्रमण किया।
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