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तिलकपुर तटबंध कटा, 20 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
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श्रावस्ती। बाढ़ के कहर के बीच सोमवार को मजगवां गांव के पास तिलकपुर तटबंध कट गया। इसके बाद 20 गांवों में पानी भर गया। इस तरह अब तक हरिहरपुररानी, गिलौला व इकौना सहित अन्य क्षेत्रों के 152 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। करीब सवा तीन लाख आबादी बाढ़ से जूझ रही है। वहीं, राप्ती बैराज पर जलस्तर घट जरूर रहा है, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर है। जमुनहा क्षेत्र के गांवों में भी पानी धीरे-धीरे घट रहा है। कई स्थानों पर मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाने से आवागमन प्रभावित है। प्रभावित ग्रामीण या तो परिवार सहित पलायन कर रहे हैं या घर की छतों पर डेरा जमाए हैं। राप्ती के साथ ही जंगली व पहाड़ी नाले भी कहर बरपा रहे हैं। प्रशासनिक मद सभी गांव तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
भिनगा कलेक्ट्रेट में स्थापित बाढ़ कंट्रोल रूम में आने वाले ज्यादातर फोन से या तो नाव की मांग की जा रही है। या फिर लंच पैकेट अथवा सर्दी जुकाम बुखार आदि दवा की मांग हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो छह अक्तूबर को 19, सात को 76, आठ को 71, नौ को 75 व 10 को दोपहर तक 28 फोन आए थे। इनमें से जहां अधिकांश लोगों ने लंच पैकेट व नाव की व्यवस्था करने की बात कही थी। जबकि शेष ने दवा की मांग की थी।
राप्ती की बाढ़ के कारण तिलकपुर-भंगहा मार्ग पर दरार आ गई थी। जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं भंगहा-मल्हीपुर, जमुनहा-बहराइच मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण इस पर आवागमन रोक दिया गया है। वहीं लक्ष्मननगर, पिपरा पुल व जरकुसहा के पास फोरलेन सड़क व पुल के अप्रोच में दरार आ जाने के कारण इन मार्गों पर भी एहतियात बरतने को कहा गया है। जबकि बौद्ध परिपथ पर कटरा, भिनगा-परसा, भिनगा-तालबघौड़ा, लक्ष्मनपुर-इकौना, भिनगा-इकौना मार्ग पर बाढ़ का पानी आने के कारण यह सड़क क्षतिग्रस्त है या नहीं इसका आकलन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से इन मार्गों पर वाहनों का आवागमन रोका गया है। हालांकि बौद्ध परिपथ पर बड़े वाहनों का आवागमन बहाल है।
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बाढ़ के कारण सीएचसी मल्हीपुर, भंगहा, गिलौला, पीएचसी कटरा में बाढ़ का पानी आने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। यहां अस्पताल परिसर सहित कई केंद्रों पर वार्डों में भी पानी आ जाने से यहां आने वाले मरीज व तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण निजी अस्पताल भी बंद हो गए हैं। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए कंट्रोल रूम का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिले में राप्ती की विनाशलीला जारी है। तिलकपुर तटबंध कट जाने के कारण हरिहरपुररानी क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। जिसका ग्रामीणों को जरा भी अंदाजा नहीं था। रात में अचानक आई बाढ़ के कारण ज्यादातर लोग अपनी गृहस्थी संभाल मुख्य मार्ग पर डेरा जमाए हुए हैं। वहीं जिनका घर पक्का था वह परिवार सहित घर की छतों पर आशियाना बनाए हुए हैं। जिनके सामने भोजन-पानी का संकट उत्पन्न है।
राप्ती में आई बाढ़ के कारण कई गांवों का रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध है। जहां जाने के लिए नाव अथवा मोटर बोट का ही सहारा है। देखा जाए तो जिले में बाढ़ पीड़ितों के लिए 13 मोटरबोट व पांच नावें ही मौजूद हैं। इनके सहारे 152 गांवों में नियमित दोनों समय भोजन पहुंचा पाना असंभव है। ऐसे में प्रभावित परिवार राहत के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं। वहीं अधिकारी व जनप्रतिनिधि जहां तक वाहन जा सकते हैं। वहीं तक जाकर लोगों को राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं।
बाढ़ से जन हानि न हो ऐसे में मौसम की परवाह किए बगैर फ्लड पीएसी व एनडीआरएफ की टीम लगातार लोगों की मदद कर रही है। टीम गांवों में जाकर जहां लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रही है। वहीं अपने साथ लंच पैकेट भी ले जा रही है। ताकि जरूरतमंदों को राहत पहुंचा रही है। इतना ही नहीं भूख से व्याकुल बाढ़ में फंसे छोटे पालतू मवेशियों बकरी आदि को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
बाढ़ से तिलकपुर के निकट परसा तिलकपुर तटबंध के कटने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। राप्व्ती की लहरें इस तटबंध को संगजमपुरवा, वीरपुर लौकिहा, अतरपरी, शाहपुर कला, खझुहा झुनझुनिया, लखाही खास, मोहम्मदपुर कला व मुजेहना गांव के निकट काटने को बेताब है। जिसे देखते हुए संगमपुरवा में सहायक अभियंता ओम प्रकाश चौहान व अवर अभियंता संगम लाल को तैनात किया गया है। जबकि वीरपुर लौकिहा से शाहपुर कला तक सहायक अभियंता कृष्ण मुरारी लाल, जूनियर अभियंता राजाराम व बृजेश कुमार को तैनात किया गया है। जबकि खजुहा झुनझुनिया से अंधरपुरवा तटबंध तक की जिम्मेदारी सहायक अभियंता संत कुमार, जूनियर इंजीनियिर सत्य प्रकाश तथा राहुल अरोड़ा को सौंपी गई है।
जिला प्रशासन की ओर से इकौना तहसील क्षेत्र में 6555, जमुनहा क्षेत्र में 1238 व भिनगा तहसील क्षेत्र में 200 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने व प्रभावितों को राहत पहुंचाने का दावा किया गया है।
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भिनगा कलेक्ट्रेट में स्थापित बाढ़ कंट्रोल रूम में आने वाले ज्यादातर फोन से या तो नाव की मांग की जा रही है। या फिर लंच पैकेट अथवा सर्दी जुकाम बुखार आदि दवा की मांग हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो छह अक्तूबर को 19, सात को 76, आठ को 71, नौ को 75 व 10 को दोपहर तक 28 फोन आए थे। इनमें से जहां अधिकांश लोगों ने लंच पैकेट व नाव की व्यवस्था करने की बात कही थी। जबकि शेष ने दवा की मांग की थी।
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राप्ती की बाढ़ के कारण तिलकपुर-भंगहा मार्ग पर दरार आ गई थी। जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं भंगहा-मल्हीपुर, जमुनहा-बहराइच मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण इस पर आवागमन रोक दिया गया है। वहीं लक्ष्मननगर, पिपरा पुल व जरकुसहा के पास फोरलेन सड़क व पुल के अप्रोच में दरार आ जाने के कारण इन मार्गों पर भी एहतियात बरतने को कहा गया है। जबकि बौद्ध परिपथ पर कटरा, भिनगा-परसा, भिनगा-तालबघौड़ा, लक्ष्मनपुर-इकौना, भिनगा-इकौना मार्ग पर बाढ़ का पानी आने के कारण यह सड़क क्षतिग्रस्त है या नहीं इसका आकलन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से इन मार्गों पर वाहनों का आवागमन रोका गया है। हालांकि बौद्ध परिपथ पर बड़े वाहनों का आवागमन बहाल है।
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बाढ़ के कारण सीएचसी मल्हीपुर, भंगहा, गिलौला, पीएचसी कटरा में बाढ़ का पानी आने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। यहां अस्पताल परिसर सहित कई केंद्रों पर वार्डों में भी पानी आ जाने से यहां आने वाले मरीज व तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण निजी अस्पताल भी बंद हो गए हैं। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए कंट्रोल रूम का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिले में राप्ती की विनाशलीला जारी है। तिलकपुर तटबंध कट जाने के कारण हरिहरपुररानी क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। जिसका ग्रामीणों को जरा भी अंदाजा नहीं था। रात में अचानक आई बाढ़ के कारण ज्यादातर लोग अपनी गृहस्थी संभाल मुख्य मार्ग पर डेरा जमाए हुए हैं। वहीं जिनका घर पक्का था वह परिवार सहित घर की छतों पर आशियाना बनाए हुए हैं। जिनके सामने भोजन-पानी का संकट उत्पन्न है।
राप्ती में आई बाढ़ के कारण कई गांवों का रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध है। जहां जाने के लिए नाव अथवा मोटर बोट का ही सहारा है। देखा जाए तो जिले में बाढ़ पीड़ितों के लिए 13 मोटरबोट व पांच नावें ही मौजूद हैं। इनके सहारे 152 गांवों में नियमित दोनों समय भोजन पहुंचा पाना असंभव है। ऐसे में प्रभावित परिवार राहत के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं। वहीं अधिकारी व जनप्रतिनिधि जहां तक वाहन जा सकते हैं। वहीं तक जाकर लोगों को राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं।
बाढ़ से जन हानि न हो ऐसे में मौसम की परवाह किए बगैर फ्लड पीएसी व एनडीआरएफ की टीम लगातार लोगों की मदद कर रही है। टीम गांवों में जाकर जहां लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रही है। वहीं अपने साथ लंच पैकेट भी ले जा रही है। ताकि जरूरतमंदों को राहत पहुंचा रही है। इतना ही नहीं भूख से व्याकुल बाढ़ में फंसे छोटे पालतू मवेशियों बकरी आदि को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
बाढ़ से तिलकपुर के निकट परसा तिलकपुर तटबंध के कटने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। राप्व्ती की लहरें इस तटबंध को संगजमपुरवा, वीरपुर लौकिहा, अतरपरी, शाहपुर कला, खझुहा झुनझुनिया, लखाही खास, मोहम्मदपुर कला व मुजेहना गांव के निकट काटने को बेताब है। जिसे देखते हुए संगमपुरवा में सहायक अभियंता ओम प्रकाश चौहान व अवर अभियंता संगम लाल को तैनात किया गया है। जबकि वीरपुर लौकिहा से शाहपुर कला तक सहायक अभियंता कृष्ण मुरारी लाल, जूनियर अभियंता राजाराम व बृजेश कुमार को तैनात किया गया है। जबकि खजुहा झुनझुनिया से अंधरपुरवा तटबंध तक की जिम्मेदारी सहायक अभियंता संत कुमार, जूनियर इंजीनियिर सत्य प्रकाश तथा राहुल अरोड़ा को सौंपी गई है।
जिला प्रशासन की ओर से इकौना तहसील क्षेत्र में 6555, जमुनहा क्षेत्र में 1238 व भिनगा तहसील क्षेत्र में 200 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने व प्रभावितों को राहत पहुंचाने का दावा किया गया है।