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नेपाल से कारोबार बढ़ाने के लिए बघौड़ा से बनेगा व्यापारिक मार्ग
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श्रावस्ती। नेपाल से व्यापार बढ़ाने के लिए बघौड़ा मार्ग को ट्रेडमार्ग बनाया जाएगा। इसके लिए खुफिया एजेंसियों की ओर से एनओसी भी हो चुकी है। इस मार्ग से नेपाल में रहने वाले मधेशियों को देश में भारत में रहने वाले अपनों से मिलने का सुगम रास्ता मिलेगा। जबकि इस रास्ते से काठमांडू जाना आसान होगा।
नेपाल में भारतीय मूल (मधेशी) की संख्या करीब तीन लाख के आसपास है। इनमें से 60 से 70 हजार मधेशी बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती से जुड़े हैं। इन मधेशियों से यहां रोटी बेटी का संबंध है। सहालग के समय बेटियों की डोली सरहद पार आती जाती रहती है। अभी तक पारंपरिक तौर पर रास्ते के रूप में केवल बहराइच का रुपईडिहा व सिद्धार्थ नगर का बढ़नी बार्डर ही प्रमुख ट्रेडमार्ग (व्यापारिक रास्ता) है। इसी रास्ते से अधिकृत रूप से नेपाल से आवागमन होता है।
सीमित व्यापारिक मार्ग की यह समस्या अब जल्द ही खत्म होने वाली है। श्रावस्ती के बघौड़ा से नेपालगंज के लिए ट्रेड मार्ग बनाए जाने का प्रस्ताव जल्द ही जमीनी तौर पर साकार होगा। इस रास्ते से नेपाल तक सुगम आवागमन के साथ ही काठमांडू तक सड़क मार्ग से सीधे पहुंचना भी आसान बनेगा। यहां से नेपालगंज का एयरपोर्ट भी नजदीक होगा। इस मार्ग का चौड़ीकरण कर विकसित करने की स्वीकृति नेपाल सरकार भी दे चुकी है।
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बघौड़ा व्यापारिक मार्ग का लाभ स्थानीय लोगों के साथ ही लखीमपुर, पीलीभीत, बलरामपुर बहराइच सहित सीमावर्ती जिलों में रहने वालों को भी होगा। केंद्र सरकार ने पहले ही इंडो नेपाल सीमा के समानांतर टू लेन सड़क का निर्माण शुरू करा रखा है। श्रावस्ती सहित कई अन्य जनपदों में इसका अधिकांश हिस्सा बन कर तैयार भी हो गया है। केवल वन क्षेत्र में निर्माण कार्य बचा है। यह सड़क मार्ग भारत नेपाल सीमा को जोड़ती हुई एक रिंग रोड की तरह बन रहा है। इससे पीलीभीत, लखीमूपुर सहित अन्य जिले के लोग जो व्यापार के लिए रुपईडिहा बार्डर तक जाकर लंबी दूरी तय करते थे अब नए प्रस्तावित मार्ग के बन जाने से सीधे काठमांडू तक का सफर कर सकेंगे।
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नेपाल में भारतीय मूल (मधेशी) की संख्या करीब तीन लाख के आसपास है। इनमें से 60 से 70 हजार मधेशी बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती से जुड़े हैं। इन मधेशियों से यहां रोटी बेटी का संबंध है। सहालग के समय बेटियों की डोली सरहद पार आती जाती रहती है। अभी तक पारंपरिक तौर पर रास्ते के रूप में केवल बहराइच का रुपईडिहा व सिद्धार्थ नगर का बढ़नी बार्डर ही प्रमुख ट्रेडमार्ग (व्यापारिक रास्ता) है। इसी रास्ते से अधिकृत रूप से नेपाल से आवागमन होता है।
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सीमित व्यापारिक मार्ग की यह समस्या अब जल्द ही खत्म होने वाली है। श्रावस्ती के बघौड़ा से नेपालगंज के लिए ट्रेड मार्ग बनाए जाने का प्रस्ताव जल्द ही जमीनी तौर पर साकार होगा। इस रास्ते से नेपाल तक सुगम आवागमन के साथ ही काठमांडू तक सड़क मार्ग से सीधे पहुंचना भी आसान बनेगा। यहां से नेपालगंज का एयरपोर्ट भी नजदीक होगा। इस मार्ग का चौड़ीकरण कर विकसित करने की स्वीकृति नेपाल सरकार भी दे चुकी है।
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बघौड़ा व्यापारिक मार्ग का लाभ स्थानीय लोगों के साथ ही लखीमपुर, पीलीभीत, बलरामपुर बहराइच सहित सीमावर्ती जिलों में रहने वालों को भी होगा। केंद्र सरकार ने पहले ही इंडो नेपाल सीमा के समानांतर टू लेन सड़क का निर्माण शुरू करा रखा है। श्रावस्ती सहित कई अन्य जनपदों में इसका अधिकांश हिस्सा बन कर तैयार भी हो गया है। केवल वन क्षेत्र में निर्माण कार्य बचा है। यह सड़क मार्ग भारत नेपाल सीमा को जोड़ती हुई एक रिंग रोड की तरह बन रहा है। इससे पीलीभीत, लखीमूपुर सहित अन्य जिले के लोग जो व्यापार के लिए रुपईडिहा बार्डर तक जाकर लंबी दूरी तय करते थे अब नए प्रस्तावित मार्ग के बन जाने से सीधे काठमांडू तक का सफर कर सकेंगे।