{"_id":"62a8d01432e2f04b233dedd1","slug":"shravasti-srawasti-news-lko635201870","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब तक महज 1138 किसानों ने केंद्रों पर बेचा गेहूं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब तक महज 1138 किसानों ने केंद्रों पर बेचा गेहूं
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श्रावस्ती। गेहूं खरीद के नियम व उसका रेट इस बार किसानों को क्रय केंद्र की ओर आकर्षित नहीं कर पाया। यही कारण रहा कि जिले से मात्र 1138 किसानों ने ही अपनी फसल क्रय केंद्रों तक बेचने के लिए पहुंचाई। इसी कारण खरीद की लक्ष्य समय सीमा समाप्त होते होते मात्र 14.80 फीसदी पर पहुंचा। यही नहीं जिन किसानों ने अपनी उपज बेची उनको भी अभी तक पूरा भुगतान नहीं हा पाया।
गेहूं खरीद का समर्थन मूल्य इस बार सरकार की ओर से 2015 रुपये था, इसमें 20 रुपये गेहूं की उतराई व छनाई शामिल था। यानी कि भुगतान चाहे जब हो लेकिन किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल तौलाई के समय ही नगद देना पड़ता। इसके अलावा सरकार की ओर से कई सख्त नियम बनाए गए। जिसमें फसल खरीदने की मात्रा, छनाई सहित कई नियम थे। जबकि गेहूं खरीद के लिए बाजार खुलते समय ही मंडी का रेट 2100 रुपये के पार था।
वहां न तो इतने नियम सख्त थे और न ही भुगतान प्रक्रिया में लेट लतीफी। यही कारण था कि किसानों का रुझान शुरू से क्रय केंद्र की तरफ नहीं था। इसका असर खरीद तिथि समाप्ति के अंतिम दिन तक दिखाई दिया। 15 जून को खरीद बंद होने से पहले जिले में मात्र 14.80 फीसदी ही खरीद हो पाई। यह खरीद जनपद के महज 1138 किसानों से की गई।
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क्रय केंद्रों पर जो किसान अपनी फसल बेचने के लिए पहुंचे। उनके भुगतान की प्रक्रिया भी चिंताजनक थी। यही कारण रहा कि जिले में अभी भी एक करोड़ सत्तर लाख तीस हजार रुपये किसानों का बकाया है। जिसके भुगतान के लिए वह क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
किसान मंशाराम यादव ने बताया कि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना अपने आप में कठिन काम था। वहां का रेट 2015 रुपये था, जबकि बाजार 2100 रुपये। यही नहीं सफाई के नाम पर शोषण तो जल्दी खरीद के लिए कमीशन खोरी आम बात थी। यही कारण था कि क्रय केंद्र में बेचने के बजाए बाजार में बेचा। जहां तौल होते ही तुरंत पैसा मिल गया। किसान कमलेश कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से जान बूझकर इस बार समर्थन मूल्य कम रखा गया। ताकि किसान क्रय केंद्र पर आए न। बाजार में उन्हें 2050 का रेट मिला। किसान जानकी प्रसाद का कहना है कि सरकार ने शुरुआती दौर में ही गेहूं बेचने की मात्रा तय कर दी थी। इसलिए मजबूरी में हमें बाजार जाना पड़ा, वहां क्रय केंद्र से अच्छा रेट मिला और समस्या भी नहीं हुई।
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गेहूं खरीद का समर्थन मूल्य इस बार सरकार की ओर से 2015 रुपये था, इसमें 20 रुपये गेहूं की उतराई व छनाई शामिल था। यानी कि भुगतान चाहे जब हो लेकिन किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल तौलाई के समय ही नगद देना पड़ता। इसके अलावा सरकार की ओर से कई सख्त नियम बनाए गए। जिसमें फसल खरीदने की मात्रा, छनाई सहित कई नियम थे। जबकि गेहूं खरीद के लिए बाजार खुलते समय ही मंडी का रेट 2100 रुपये के पार था।
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वहां न तो इतने नियम सख्त थे और न ही भुगतान प्रक्रिया में लेट लतीफी। यही कारण था कि किसानों का रुझान शुरू से क्रय केंद्र की तरफ नहीं था। इसका असर खरीद तिथि समाप्ति के अंतिम दिन तक दिखाई दिया। 15 जून को खरीद बंद होने से पहले जिले में मात्र 14.80 फीसदी ही खरीद हो पाई। यह खरीद जनपद के महज 1138 किसानों से की गई।
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क्रय केंद्रों पर जो किसान अपनी फसल बेचने के लिए पहुंचे। उनके भुगतान की प्रक्रिया भी चिंताजनक थी। यही कारण रहा कि जिले में अभी भी एक करोड़ सत्तर लाख तीस हजार रुपये किसानों का बकाया है। जिसके भुगतान के लिए वह क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
किसान मंशाराम यादव ने बताया कि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना अपने आप में कठिन काम था। वहां का रेट 2015 रुपये था, जबकि बाजार 2100 रुपये। यही नहीं सफाई के नाम पर शोषण तो जल्दी खरीद के लिए कमीशन खोरी आम बात थी। यही कारण था कि क्रय केंद्र में बेचने के बजाए बाजार में बेचा। जहां तौल होते ही तुरंत पैसा मिल गया। किसान कमलेश कुमार ने बताया कि सरकार की ओर से जान बूझकर इस बार समर्थन मूल्य कम रखा गया। ताकि किसान क्रय केंद्र पर आए न। बाजार में उन्हें 2050 का रेट मिला। किसान जानकी प्रसाद का कहना है कि सरकार ने शुरुआती दौर में ही गेहूं बेचने की मात्रा तय कर दी थी। इसलिए मजबूरी में हमें बाजार जाना पड़ा, वहां क्रय केंद्र से अच्छा रेट मिला और समस्या भी नहीं हुई।