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शिक्षण कार्य को बेहतर बनाने में जुटे निजी संगठन
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श्रावस्ती। शिक्षा के आधुनिकीकरण व शिक्षकों के गुणवत्ता संवर्धन के लिए कई बड़े गैर सरकारी संगठन अपने खर्च पर काम कर रहे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम भी इलाके के कई निजी व सरकारी स्कूलों में दिखने लगा है। इससे यहां के बच्चे अब ककहरा से निकल कर डिजिटल लर्निंग भी करने लगे हैं।
नीति आयोग ने जिले को अति पिछड़ा जिला घोषित करते हुए शिक्षा व स्वास्थ्य में काम करने की सलाह दी थी। इसी के बाद आकांक्षी जिले में कई गैर सरकारी संगठन अपने खर्च पर काम काज को आगे आए। यह सब विगत कई साल से जिले में चल रहा है।
इसके तहत पिरामल फाउंडेशन शैक्षिक गुणवत्ता के साथ शिक्षकों को पढ़ाने की नई तकनीक पर कार्य कर रहा है। शिवनादर फाउंडेशन स्कूलों के डिजिटलाइजेशन के साथ कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को डिजिटल लर्निंग सामग्री उपलब्ध करा रहा है। यह एप स्मार्ट कक्षाओं में चलाया जा रहा है। इसमें कार्टून व सरल भाषा में बच्चों को सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा सेव द चिलड्रेन गिलौला में शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन, विद्यालय अनुरक्षण एवं भौतिक वातावरण में परिवर्तन पर कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही यूनीसेफ, कदम प्लस, साइट सेवक, नंदी फाउंडेशन सरीखे कई अन्य गैर सरकारी संगठन भी शिक्षा के प्रचार प्रसार में जुटे हैं।
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नीति आयोग ने जिले को अति पिछड़ा जिला घोषित करते हुए शिक्षा व स्वास्थ्य में काम करने की सलाह दी थी। इसी के बाद आकांक्षी जिले में कई गैर सरकारी संगठन अपने खर्च पर काम काज को आगे आए। यह सब विगत कई साल से जिले में चल रहा है।
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इसके तहत पिरामल फाउंडेशन शैक्षिक गुणवत्ता के साथ शिक्षकों को पढ़ाने की नई तकनीक पर कार्य कर रहा है। शिवनादर फाउंडेशन स्कूलों के डिजिटलाइजेशन के साथ कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को डिजिटल लर्निंग सामग्री उपलब्ध करा रहा है। यह एप स्मार्ट कक्षाओं में चलाया जा रहा है। इसमें कार्टून व सरल भाषा में बच्चों को सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा सेव द चिलड्रेन गिलौला में शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन, विद्यालय अनुरक्षण एवं भौतिक वातावरण में परिवर्तन पर कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही यूनीसेफ, कदम प्लस, साइट सेवक, नंदी फाउंडेशन सरीखे कई अन्य गैर सरकारी संगठन भी शिक्षा के प्रचार प्रसार में जुटे हैं।
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