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मॉडीफाइड साइलेंसर लगाने वालों की अब खैर नहीं
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श्रावस्ती। मॉडीफाइड साइलेंसर लगवाना और ऐसे दो पहिया वाहन चलाना अब भारी पड़ेगा। ऐसी मोटर साइकिल व अन्य दो पहिया वाहन चालकों के साथ ही इसे लगाने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग मोटरयान नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई करेगा। न्यायालय की ओर से जारी आदेश के अनुपालन को लेकर ऐसे वाहनों की धरपकड़ को नियमित जांच पड़ताल भी होगी। इसे सफल बनाने के लिए परिवहन विभाग ने मोटर साइकिल सहित अन्य दो पहिया वाहनों को बेचने वाले डीलरों से भी सहयोग मांगा है। यह जानकारी बुधवार को उप संभागीय परिवहन अधिकारी राजीव कुमार ने दी। वह इस मसले पर वाहन विक्रेता डीलरों के साथ हुई एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में सुनवाई के बाद न्यायालय की ओर से बीस जुलाई को एक आदेश पारित किया गया है। जिसमें सेंट्रल मोटर व्हीकल्स ऐक्ट का कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत अगर कोई आदमी सड़क सुरक्षा, ध्वनि और हवा प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन करता है तो पहली बार में उससे जुर्माना वसूला जाएगा। दूसरी बार या उसके बाद भी उल्लंघन करने पर जुर्माना राशि दो गुना तक हो जाएगी। केंद्रीय मोटरयान नियमावली के विरुद्ध मॉडीफाइड साइलेंसर लगाना मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 52 और धारा 190(2) के तहत निर्धारित मानक से अधिक ध्वनि प्रदूषण का उल्लंघन है।
एआरटीओ ने बताया कि वाहन स्वामी द्वारा इस आदेश का उल्लंघन करने पर उससे पंद्रह हजार जुर्माना वसूला जा सकता है। साथ ही जिस वर्कशाप से मॉडीफाइड साइलेंसर युक्त वाहन की बिक्री अथवा रिपेयरिंग होगी, उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। यात्री माल कर अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि ध्वनि मानकों की बात करें तो ऑटोमोटिव मानक के तहत वाहनों की अधिकतम सीमा 80 डेसिबल है। मोडिफिकेशन के बाद यह बढ़कर 100 डेसिबल या इससे अधिक हो जाती है। मोटर साइकिल पटाका साउंड के लिए मॉडीफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। जो नियम विरुद्ध है। ऐसे वाहन स्वामियों पर कार्रवाई होगी।
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उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में सुनवाई के बाद न्यायालय की ओर से बीस जुलाई को एक आदेश पारित किया गया है। जिसमें सेंट्रल मोटर व्हीकल्स ऐक्ट का कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत अगर कोई आदमी सड़क सुरक्षा, ध्वनि और हवा प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन करता है तो पहली बार में उससे जुर्माना वसूला जाएगा। दूसरी बार या उसके बाद भी उल्लंघन करने पर जुर्माना राशि दो गुना तक हो जाएगी। केंद्रीय मोटरयान नियमावली के विरुद्ध मॉडीफाइड साइलेंसर लगाना मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 52 और धारा 190(2) के तहत निर्धारित मानक से अधिक ध्वनि प्रदूषण का उल्लंघन है।
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एआरटीओ ने बताया कि वाहन स्वामी द्वारा इस आदेश का उल्लंघन करने पर उससे पंद्रह हजार जुर्माना वसूला जा सकता है। साथ ही जिस वर्कशाप से मॉडीफाइड साइलेंसर युक्त वाहन की बिक्री अथवा रिपेयरिंग होगी, उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। यात्री माल कर अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि ध्वनि मानकों की बात करें तो ऑटोमोटिव मानक के तहत वाहनों की अधिकतम सीमा 80 डेसिबल है। मोडिफिकेशन के बाद यह बढ़कर 100 डेसिबल या इससे अधिक हो जाती है। मोटर साइकिल पटाका साउंड के लिए मॉडीफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल किया जाता है। जो नियम विरुद्ध है। ऐसे वाहन स्वामियों पर कार्रवाई होगी।
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