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डीडीसी सदस्यों की सुरक्षा की चिंता या फिर सत्ता के लिए हो रही उनकी रखवाली
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श्रावस्ती। जिला पंचायत सदस्यों की सुरक्षा के लिए शासन की ओर से एक एक गनर देने पर सियासत शुरू हो गई है। विपक्ष इस सुरक्षा व्यवस्था को सत्ता पत्र के दबाव में सदस्यों की रखवाली करना मान रहा है। तो इसे कुछ निजता का हनन बताते हुए। प्रशासन पर सत्ता को जिताने के लिए उठाया गया कदम करार दे रहे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को मतदान होना है। इसके लिए समाजवादी पार्टी ने अपने सदस्य के नाम की घोषणा पहले ही कर दी थी। लेकिन सत्ता पक्ष भाजपा की ओर से अध्यक्ष के नाम की सूची बुधवार तक जारी नहीं की गई थी। इसी बीच प्रशासन ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को शासन के निर्देश पर एसपी अरविंद कुमार मौर्या ने जिले के सभी 22 सदस्यों को एक एक गनर दिया है। प्रशासन का दावा है कि सदस्यों को यह सुरक्षा व्यवस्था इसलिए दी गई है कि कोई भी व्यक्ति व नेता इन पर अपने पक्ष में मतदान का दबाव न बना सके। यह पुलिस की सुरक्षा चुनाव होने तक सदस्यों को मुहैया रहेगी। हालांकि इसे लेकर कई तरह की चर्चा शुरू हो गई है। सपा इसे सरकार द्वारा प्रशासन के माध्यम से जिला पंचायत सदस्यों पर दबाव में लेने वाला कदम बताया। दावा किया कि सपा समर्थित कई सदस्य पुलिस की सुरक्षा नहीं लेना चाहते हैं। इसके बावजूद उन्हें यह व्यवस्था दी गई है। अगर प्रशासन को सुरक्षा की इतनी फिक्र थी तो निर्वाचित होने पर ही सुरक्षा दे दी जाती। सिर्फ चुनाव तक ही क्यों, पूरे कार्यकाल के लिए दी जाती तो बात समझ में आती। वहीं सदस्यों का भी मानना है कि यह सुरक्षा व्यवस्था उन्हें केवल इसलिए मिली है कि वह किसी से बात करें और कहीं भी आएं जाएं। इसकी जानकारी प्रशासन को भी रहे। इससे उनकी निजता प्रभावित होती है।
कुछ जानकार सदस्यों का कहना है कि अभी तक हमेशा से होता था कि ज्यादातर निर्वाचित सदस्य जिसे मतदान करना चाहते थे। वह उनके साथ कुछ दिनों के लिए अपने घर से दूर हो जाते थे। ताकि अन्य किसी व्यक्ति पार्टी व नेता का दबाव उन पर न पड़ सके। यह सभी मतदान के एक दिन पूर्व या फिर मतदान के दिन आते थे। लेकिन जैसे ही अधिसूचना जारी हुई। इसके बाद सभी सदस्यों को सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर गनर दे दिया। ऐसे में वह बिना प्रशासन के संज्ञान में कहीं आ जा नहीं सकते। इसका फायदा सत्ता पक्ष को ही होगा। इसीलिए शायद सत्ता पक्ष अपने उम्मीदवार का नाम भी देर से ही घोषित कर रही है। ताकि बिना भागदौड़ के ही उनका घोषित उम्मीदवार अध्यक्ष बन जाए। अध्यक्ष बनाने में इन सुरक्षा कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को मतदान होना है। इसके लिए समाजवादी पार्टी ने अपने सदस्य के नाम की घोषणा पहले ही कर दी थी। लेकिन सत्ता पक्ष भाजपा की ओर से अध्यक्ष के नाम की सूची बुधवार तक जारी नहीं की गई थी। इसी बीच प्रशासन ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को शासन के निर्देश पर एसपी अरविंद कुमार मौर्या ने जिले के सभी 22 सदस्यों को एक एक गनर दिया है। प्रशासन का दावा है कि सदस्यों को यह सुरक्षा व्यवस्था इसलिए दी गई है कि कोई भी व्यक्ति व नेता इन पर अपने पक्ष में मतदान का दबाव न बना सके। यह पुलिस की सुरक्षा चुनाव होने तक सदस्यों को मुहैया रहेगी। हालांकि इसे लेकर कई तरह की चर्चा शुरू हो गई है। सपा इसे सरकार द्वारा प्रशासन के माध्यम से जिला पंचायत सदस्यों पर दबाव में लेने वाला कदम बताया। दावा किया कि सपा समर्थित कई सदस्य पुलिस की सुरक्षा नहीं लेना चाहते हैं। इसके बावजूद उन्हें यह व्यवस्था दी गई है। अगर प्रशासन को सुरक्षा की इतनी फिक्र थी तो निर्वाचित होने पर ही सुरक्षा दे दी जाती। सिर्फ चुनाव तक ही क्यों, पूरे कार्यकाल के लिए दी जाती तो बात समझ में आती। वहीं सदस्यों का भी मानना है कि यह सुरक्षा व्यवस्था उन्हें केवल इसलिए मिली है कि वह किसी से बात करें और कहीं भी आएं जाएं। इसकी जानकारी प्रशासन को भी रहे। इससे उनकी निजता प्रभावित होती है।
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कुछ जानकार सदस्यों का कहना है कि अभी तक हमेशा से होता था कि ज्यादातर निर्वाचित सदस्य जिसे मतदान करना चाहते थे। वह उनके साथ कुछ दिनों के लिए अपने घर से दूर हो जाते थे। ताकि अन्य किसी व्यक्ति पार्टी व नेता का दबाव उन पर न पड़ सके। यह सभी मतदान के एक दिन पूर्व या फिर मतदान के दिन आते थे। लेकिन जैसे ही अधिसूचना जारी हुई। इसके बाद सभी सदस्यों को सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर गनर दे दिया। ऐसे में वह बिना प्रशासन के संज्ञान में कहीं आ जा नहीं सकते। इसका फायदा सत्ता पक्ष को ही होगा। इसीलिए शायद सत्ता पक्ष अपने उम्मीदवार का नाम भी देर से ही घोषित कर रही है। ताकि बिना भागदौड़ के ही उनका घोषित उम्मीदवार अध्यक्ष बन जाए। अध्यक्ष बनाने में इन सुरक्षा कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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