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सरयू नहर परियोजना तैयार, पीएम कर सकते हैं उद्घाटन
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राप्ती योजक नहर के शुभारंभ की तैयारी में नहर की पटरियों का हो रहा समतलीकरण
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। 44 साल के लंबे अंतराल के बाद सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का कार्य अब पूरा हो गया है। इस परियोजना का शुभारंभ होने से 14 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचने के लिए पानी मुहैया हो सकेगा। इसका फायदा यूपी समेत आसपास के अन्य राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा। इसका शुभारंभ इस माह के अंत अथवा अगले माह के पहले सप्ताह में पीएम नरेंद्र मोदी से कराने की तैयारी चल रही है।
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का कार्य पूरा होने में 44 वर्ष लगे। शुरुआत में यह एक राज्य परियोजना थी। इसका निर्माण कुछ जिलों में सिंचाई के साधन बढ़ाने के लिए किया जाना था। धीरे-धीरे इस परियोजना में कई अन्य जिलों के शामिल हो जाने से इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया गया। वैसे तो इस परियोजना से यूपी समेत अन्य राज्यों के 14 जिले लाभांवित होंगे लेकिन इसका सर्वाधिक फायदा पूर्वांचल के आठ जिलों को मिलेगा। इस परियोजना के तहत ही राप्ती मुख्य नहर को शामिल किया गया है। इस परियोजना की कुल लंबाई 1,25,600 किलोमीटर है। इसी मुख्य नहर को राप्ती लिंक चैनल से जोड़ा गया है। इसका 21.4 किलोमीटर लंबा उद्गम स्थल श्रावस्ती है। इस परियोजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री से कराने की तैयारी चल रही है।
कई बार बदला नाम
इस परियोजना का नाम प्रारंभ में घाघरा कैनाल था। वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले में सिंचाई क्षमता में विस्तार के लिए यह परियोजना प्रारंभ हुई। वर्ष 1982 में परियोजना का विस्तार पूर्वांचल के ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी क्षेत्र में करते हुए नौ और जिलों को भी इसमें शामिल किया गया। उस समय इस परियोजना का नाम ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी कर दिया गया। इसी के बाद भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देकर इसका नाम बदलकर सरयू परियोजना रख दिया।
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इस तरह है परियोजना की नहर प्रणाली
बहराइच में घाघरा नदी पर निर्मित गिरजापुरी बैराज के बाएं से 360 क्यूसेक क्षमता की सरयू योजक नहर (17.035 किमी) निकाली गई है। इससे सरयू नदी पर निर्मित सरयू बैराज के अपस्ट्रीम दाएं किनारे में पानी लाया गया है। सरयू बैराज के बाएं बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की 63.15 किमी की सरयू नहर निकाली गई है। सरयू मुख्य नहर के किमी 21.4 दाएं बैक से इमामगंज शाखा प्रणाली निकाली गयी है। सरयू मुख्य नहर के बाएं किनारे से राप्ती योजक नहर 21.4 किमी लंबाई में बनाया गया है। यह राप्ती (श्रावस्ती जिला) नदी पर निर्मित राप्ती बैराज के अपस्ट्रीम में राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगी। इसका उपयोग 125.682 किमी लंबी राप्ती मुख्य नहर के लिए किया गया है। सरयू मुख्य नहर के किमी 63.150 से दो शाखा प्रणाली बस्ती व गोंडा निकाली गई है। बस्ती शाखा से 4.20 लाख हेक्टेयर एवं गोंडा शाखा से 3.96 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी। राप्ती के मुख्य नहर के टेल से कैम्पियरगंज शाखा राप्ती मुख्य नहर प्रणाली से 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
वर्ष 2013 में शामिल हुआ श्रावस्ती-गोंडा
सरयू परियोजना का कार्य 1982-1983 में प्रारंभ हुआ। 10 फरवरी 2000 में इस परियोजना के तहत नहर का कार्य 9,205.00 किलोमीटर कराया गया। इसमें नाला 9000 किमी एवं नलकूप कार्य 3600 का निर्माण हुआ है। वर्ष 2013 में इस परियोजना के तहत बस्ती में 299.83 किमी, संतकबीर नगर में 76-90 किमी, बहराइच में 219.94 किमी, गोरखपुर में 1976.09 किमी, बलरामपुर में 300.59 किमी, सिद्धार्थनगर में 905.51 किमी ड्रेन प्रस्तावित किया गया था। इसका कार्य भी पूरा हो चुका है। सरयू परियोजना कमांड में श्रावस्ती, गोंडा की स्थिति का उल्लेख नहीं था। ऐसी स्थिति में सरयू परियोजना के अंतर्गत 9000 किमी ड्रेन के बाद वर्ष 2013 में श्रावस्ती व गोंडा को इस परियोजना में शामिल किया गया। 2014 में इस परियोजना के तहत ड्रेन की लंबाई में वृद्धि की गई।
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बन कर तैयार हो गई है। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री की मौजूदगी में किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए नवंबर माह के अंतिम सप्ताह अथवा दिसंबर के प्रथम सप्ताह का समय मान कर विभागीय स्तर पर उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना का शुभारंभ होने से 14 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचने के लिए पानी मुहैया हो सकेगा। -अजय कुमार, अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड-6
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सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना का कार्य पूरा होने में 44 वर्ष लगे। शुरुआत में यह एक राज्य परियोजना थी। इसका निर्माण कुछ जिलों में सिंचाई के साधन बढ़ाने के लिए किया जाना था। धीरे-धीरे इस परियोजना में कई अन्य जिलों के शामिल हो जाने से इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया गया। वैसे तो इस परियोजना से यूपी समेत अन्य राज्यों के 14 जिले लाभांवित होंगे लेकिन इसका सर्वाधिक फायदा पूर्वांचल के आठ जिलों को मिलेगा। इस परियोजना के तहत ही राप्ती मुख्य नहर को शामिल किया गया है। इस परियोजना की कुल लंबाई 1,25,600 किलोमीटर है। इसी मुख्य नहर को राप्ती लिंक चैनल से जोड़ा गया है। इसका 21.4 किलोमीटर लंबा उद्गम स्थल श्रावस्ती है। इस परियोजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री से कराने की तैयारी चल रही है।
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कई बार बदला नाम
इस परियोजना का नाम प्रारंभ में घाघरा कैनाल था। वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले में सिंचाई क्षमता में विस्तार के लिए यह परियोजना प्रारंभ हुई। वर्ष 1982 में परियोजना का विस्तार पूर्वांचल के ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी क्षेत्र में करते हुए नौ और जिलों को भी इसमें शामिल किया गया। उस समय इस परियोजना का नाम ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी कर दिया गया। इसी के बाद भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देकर इसका नाम बदलकर सरयू परियोजना रख दिया।
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इस तरह है परियोजना की नहर प्रणाली
बहराइच में घाघरा नदी पर निर्मित गिरजापुरी बैराज के बाएं से 360 क्यूसेक क्षमता की सरयू योजक नहर (17.035 किमी) निकाली गई है। इससे सरयू नदी पर निर्मित सरयू बैराज के अपस्ट्रीम दाएं किनारे में पानी लाया गया है। सरयू बैराज के बाएं बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की 63.15 किमी की सरयू नहर निकाली गई है। सरयू मुख्य नहर के किमी 21.4 दाएं बैक से इमामगंज शाखा प्रणाली निकाली गयी है। सरयू मुख्य नहर के बाएं किनारे से राप्ती योजक नहर 21.4 किमी लंबाई में बनाया गया है। यह राप्ती (श्रावस्ती जिला) नदी पर निर्मित राप्ती बैराज के अपस्ट्रीम में राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगी। इसका उपयोग 125.682 किमी लंबी राप्ती मुख्य नहर के लिए किया गया है। सरयू मुख्य नहर के किमी 63.150 से दो शाखा प्रणाली बस्ती व गोंडा निकाली गई है। बस्ती शाखा से 4.20 लाख हेक्टेयर एवं गोंडा शाखा से 3.96 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी। राप्ती के मुख्य नहर के टेल से कैम्पियरगंज शाखा राप्ती मुख्य नहर प्रणाली से 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
वर्ष 2013 में शामिल हुआ श्रावस्ती-गोंडा
सरयू परियोजना का कार्य 1982-1983 में प्रारंभ हुआ। 10 फरवरी 2000 में इस परियोजना के तहत नहर का कार्य 9,205.00 किलोमीटर कराया गया। इसमें नाला 9000 किमी एवं नलकूप कार्य 3600 का निर्माण हुआ है। वर्ष 2013 में इस परियोजना के तहत बस्ती में 299.83 किमी, संतकबीर नगर में 76-90 किमी, बहराइच में 219.94 किमी, गोरखपुर में 1976.09 किमी, बलरामपुर में 300.59 किमी, सिद्धार्थनगर में 905.51 किमी ड्रेन प्रस्तावित किया गया था। इसका कार्य भी पूरा हो चुका है। सरयू परियोजना कमांड में श्रावस्ती, गोंडा की स्थिति का उल्लेख नहीं था। ऐसी स्थिति में सरयू परियोजना के अंतर्गत 9000 किमी ड्रेन के बाद वर्ष 2013 में श्रावस्ती व गोंडा को इस परियोजना में शामिल किया गया। 2014 में इस परियोजना के तहत ड्रेन की लंबाई में वृद्धि की गई।
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बन कर तैयार हो गई है। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री की मौजूदगी में किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए नवंबर माह के अंतिम सप्ताह अथवा दिसंबर के प्रथम सप्ताह का समय मान कर विभागीय स्तर पर उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना का शुभारंभ होने से 14 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचने के लिए पानी मुहैया हो सकेगा। -अजय कुमार, अधिशासी अभियंता सरयू नहर खंड-6