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गलकटवा के निवासी योजनाओं से वंचित

Sun, 20 Sep 2020 08:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 08:48 PM IST
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Residents of Galkatwa denied plans
श्रावस्ती। नगर पालिका के परिसीमन के दौरान एक ग्राम पंचायत के मजरे में रह रहे तीन सौ लोगों का भविष्य अधर में लटक गया। प्रशासन की गलती का खामियाजा यहां के लोग भुगत रहे हैं। परिसीमन के दौरान जहां ग्राम पंचायत नगर पालिका में शामिल कर ली गई वहीं इस मजरे को छोड़ दिया गया। ऐसे में यह मजरा न तो नगर में है और न ही देहात में है। यहां के लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।
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मामला भिनगा तहसील क्षेत्र के ग्राम पूरेखैरी का है। नगर पालिका विस्तार के साथ ही पूरेखैरी के साथ टंड़वा बनकटवा व भिनगा देहात की ग्राम पंचायत को भंग कर उसे नगरीय क्षेत्र में मिला दिया गया था। इसके चलते 2016 से ही यहां प्रधान का पद समाप्त हो गया था। परिसीमन के बाद इन तीनों पंचायतों के सभी मजरे नगरीय क्षेत्र में मिला लिए गए थे, लेकिन पूरेखैरी का एक छोटा गांव गलकटवा इस दौरान छूट गया। इस गांव में लगभग तीन सौ आबादी रहती है।
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यहां के निवासी विगत नगर पालिका चुनाव में अपने मताधिकार से वंचित थे, जबकि मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए जारी अधिसूचना में भी इस गांव में बीएलओ की तैनाती नहीं होनी है। इसको लेकर गांव में ग्रामीण परेशान हैं। इसका कारण है कि ग्राम पंचायत भंग होने के बाद न तो वह नगर के निवासी रहे और न ही देहात के। ऐसी स्थिति में वह जनपद में किस व्यवस्था में हैं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। यही कारण है कि पंचायत भंग होने के बाद से उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मिलने वाली सुविधाएं जिसमें आवास, पेंशन शामिल हैं, वह नहीं मिली।
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नगर में उनका क्षेत्र नहीं जुड़ा होने के कारण वह प्रधानमंत्री नगरीय आवास सहित अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से उनकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। डीपीआरओ किरन ने बताया कि गलकटवा मजरे का परिसीमन होना है। उसे जल्द ही किसी पंचायत के साथ मिलाया जाएगा। उसकी पत्रावली तैयार हो रही है।

नगर व देहात के बीच में झूल रहे लोग
नगर पालिका के परिसीमन के बाद इन तीन ग्राम पंचायतों के साथ वर्गावर्गी, लक्ष्मनपुर इटवरिया व राजापुर रानी को भी आंशिक रूप से काट कर नगर में मिला लिया गया था। यही नहीं इस भूभाग की भूमि को भी नगर पालिका के अधीन कर दिया गया था। लेकिन यह भूभाग राजस्व अभिलेखों से नगर को स्थानांतरित नहीं किया गया। इसके चलते आज भी इस क्षेत्र की भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्रामीण क्षेत्र में दर्ज है। ऐसे में इन क्षेत्रों में घर बनवाने वाले लोग आज भी नगरीय क्षेत्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि उन्हें जमीन की खरीद व बिक्री पर नगर पालिका डेवलेपमेंट शुल्क अदा करना पड़ता है।
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