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Shravasti News: खेतों में गिरे पेड़ों के निस्तारण की प्रक्रिया आसान
Wed, 14 Oct 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 14 Oct 2026 11:36 PM IST
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श्रावस्ती। आंधी-तूफान और भारी बारिश से गिरे पेड़ों को हटाने और उनके बोटे बनाने की प्रक्रिया वन विभाग ने आसान कर दी है। इससे किसानों को निजी भूमि से गिरे पेड़ों को हटाने में राहत मिलेगी। इसके लिए किसानों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रभागीय वनाधिकारी या संबंधित रेंज कार्यालय में आवेदन करना होगा।
डीएफओ धनराज मीणा ने बताया कि आवेदन पत्र के साथ भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र और जीपीएस सहित स्पष्ट फोटो देना अनिवार्य है। इसके बाद क्षेत्रीय वनाधिकारी स्थल का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण रिपोर्ट उप प्रभागीय वनाधिकारी, भिनगा के माध्यम से प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय भेजी जाएगी। आवेदनों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों का बोटा बनाने के बाद आम, नीम, साल, महुआ, खैर और सागौन को छोड़कर अन्य प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन के लिए अनुमति नहीं लेनी होगी। इन छह प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति जरूरी होगी। यह छूट केवल प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों पर लागू होगी।
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29 प्रजातियों के कटान पर प्रतिबंध
डीएफओ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 29 प्रजातियों के वृक्षों को काटना प्रतिबंधित है। इनमें आम, नीम, साल, महुआ, पीपल, बरगद, अर्जुन, पलाश, बेल, इमली, जामुन, शीशम और सागौन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि काटे गए प्रत्येक पेड़ के स्थान पर वृक्ष स्वामी को 10 नए पौधे लगाने होंगे। साथ ही पांच वर्ष तक उनका रखरखाव भी करना होगा। वन विभाग की इस पहल से प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों के निस्तारण में किसानों को सुविधा मिलेगी और नियमों के तहत लकड़ी के परिवहन की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
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डीएफओ धनराज मीणा ने बताया कि आवेदन पत्र के साथ भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र और जीपीएस सहित स्पष्ट फोटो देना अनिवार्य है। इसके बाद क्षेत्रीय वनाधिकारी स्थल का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण रिपोर्ट उप प्रभागीय वनाधिकारी, भिनगा के माध्यम से प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय भेजी जाएगी। आवेदनों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों का बोटा बनाने के बाद आम, नीम, साल, महुआ, खैर और सागौन को छोड़कर अन्य प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन के लिए अनुमति नहीं लेनी होगी। इन छह प्रजातियों की लकड़ी के परिवहन के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति जरूरी होगी। यह छूट केवल प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों पर लागू होगी।
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29 प्रजातियों के कटान पर प्रतिबंध
डीएफओ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 29 प्रजातियों के वृक्षों को काटना प्रतिबंधित है। इनमें आम, नीम, साल, महुआ, पीपल, बरगद, अर्जुन, पलाश, बेल, इमली, जामुन, शीशम और सागौन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि काटे गए प्रत्येक पेड़ के स्थान पर वृक्ष स्वामी को 10 नए पौधे लगाने होंगे। साथ ही पांच वर्ष तक उनका रखरखाव भी करना होगा। वन विभाग की इस पहल से प्राकृतिक आपदा में गिरे पेड़ों के निस्तारण में किसानों को सुविधा मिलेगी और नियमों के तहत लकड़ी के परिवहन की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।