{"_id":"5d9a28228ebc3e017768bc3f","slug":"people-s-eyes-were-moist-after-seeing-leela-of-sitaharan-srawasti-news-lko485550632","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीताहरण की लीला देख लोगों की आंखें हुईं नम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीताहरण की लीला देख लोगों की आंखें हुईं नम
विज्ञापन
श्रावस्ती। भिनगा के राजर्षि ठाकुर द्वारा मैदान में चल रही रामलीला में शनिवार को सीताहरण व जटायु से रावण का युद्ध की कथा का मंचन किया गया। इस दौरान सीता की करुण वेदना सुन उपस्थित जनसमुदाय की आंखें नम हो गई।
रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि सूपर्णखा ने बताया कि लक्ष्मण ने उसकी नाक काटी है। यह सुन खर दूषण क्रोधित हो जाते हैं, और अपनी सेना के संग राम और लक्ष्मण के साथ भयंकर युद्ध करते हैं। इस दौरान खर-दूषण मारे जाते हैं। उनकी मौत से क्रोधित हो रावण अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है और उसे सीता हरण के लिए तैयार करता है।
रावण के डर से मारीच सोने का हिरण बनकर चित्रकूट आता है। जिसे देखकर माता सीता भगवान राम से कहती हैं हे प्रभु मुझे वह हिरण बहुत अच्छा लग रहा है वह मुझे चाहिए। सीता की बात सुनकर श्रीराम अपना धनुष लेकर उस सोने के हिरण के पीछे चले जाते हैं। हिरन उनको लेकर काफी दूर निकल जाता है तभी सीता व लक्ष्मण को राम की करुण वेदना सुनाई पड़ती है। जिसे सुन लक्ष्मण कुटिया के सामने रेखा खींच कर राम के पास चले जाते हैं।
विज्ञापन
इसी बीच साधु का भेष बनाकर रावण सीता की कुटिया के बाहर भिक्षा मांगने पहुंचता है और सीता से लक्ष्मण रेखा से बाहर आने की बात कहता है। जैसे ही सीता बाहर निकलती हैं, रावण उनका हरण कर लेता है। रास्ते में जटायु से उसका युद्ध होता है माता सीता को बचाने के दौरान रावण तलवार से जटायु के पंख काट देता है। इससे जटायु नीचे गिर जाता है। लीला मंचन के दौरान माता सीता की करुण वेदना सुन उपस्थित जन समुदाय की आंख नम हो जाती है।
विज्ञापन
रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि सूपर्णखा ने बताया कि लक्ष्मण ने उसकी नाक काटी है। यह सुन खर दूषण क्रोधित हो जाते हैं, और अपनी सेना के संग राम और लक्ष्मण के साथ भयंकर युद्ध करते हैं। इस दौरान खर-दूषण मारे जाते हैं। उनकी मौत से क्रोधित हो रावण अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है और उसे सीता हरण के लिए तैयार करता है।
विज्ञापन
रावण के डर से मारीच सोने का हिरण बनकर चित्रकूट आता है। जिसे देखकर माता सीता भगवान राम से कहती हैं हे प्रभु मुझे वह हिरण बहुत अच्छा लग रहा है वह मुझे चाहिए। सीता की बात सुनकर श्रीराम अपना धनुष लेकर उस सोने के हिरण के पीछे चले जाते हैं। हिरन उनको लेकर काफी दूर निकल जाता है तभी सीता व लक्ष्मण को राम की करुण वेदना सुनाई पड़ती है। जिसे सुन लक्ष्मण कुटिया के सामने रेखा खींच कर राम के पास चले जाते हैं।
विज्ञापन
इसी बीच साधु का भेष बनाकर रावण सीता की कुटिया के बाहर भिक्षा मांगने पहुंचता है और सीता से लक्ष्मण रेखा से बाहर आने की बात कहता है। जैसे ही सीता बाहर निकलती हैं, रावण उनका हरण कर लेता है। रास्ते में जटायु से उसका युद्ध होता है माता सीता को बचाने के दौरान रावण तलवार से जटायु के पंख काट देता है। इससे जटायु नीचे गिर जाता है। लीला मंचन के दौरान माता सीता की करुण वेदना सुन उपस्थित जन समुदाय की आंख नम हो जाती है।