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तीन साल में सिर्फ 30 बच्चों को मिली शुल्क प्रतिपूर्ति

Tue, 03 Sep 2019 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2019 11:09 PM IST
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Only 30 children get reimbursement fee in three years
श्रावस्ती। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति मिलती है। इससे बच्चे अपने मनचाहे स्कूलों में पढ़ सकते हैं। इस योजना के तहत औसतन दस हजार रुपये प्रति वर्ष एक बच्चे को मिलता है।
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जिले में तीन वर्ष में मात्र तीस बच्चे ही इस योजना का लाभ पा सके, जबकि प्रति वर्ष 2640 बच्चों को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। योजन का लाभ गरीबों को नहीं मिलने के पीछे अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरतने की बात सामने आ रही है।
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गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गरीबों के बच्चों के सपनों को उड़ान देने के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है। इस योजना के तहत जिले के प्रत्येक निजी विद्यालय में बच्चे अपना दाखिला ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें निजी स्कूलों को शुल्क देने के लिए प्रतिमाह 450 रुपये व बच्चों के ऊपर आने वाले खर्च का वार्षिक पांच हजार रुपये दिया जाता है।
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इस पांच हजार में बच्चों का ड्रेस, कापी किताब, व अन्य सामग्री खरीदी जाती है। यह पैसा बच्चों के खाते में सीधे बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भेजा जाता है। स्कूल का चयन वैसे तो अभिभावकों की ओर से ही किया जाता है, लेकिन यदि आवेदकों की संख्या अधिक हो तो लाटरी सिस्टम से नाम चयन की व्यवस्था है।
जिले में यह योजना गरीब बच्चों के सपनों को उड़ान नहीं दे पा रही है। 2017-18 से लेकर अब तक इस योजना के तहत मात्र तीस बच्चों को ही इसका लाभ मिला। यही नहीं जिस स्कूल में बच्चों को दाखिला दिया गया, उसका भी स्तर निमभन ही था। यह संयोग कहें या फिर अधिकारी की मिली भगत कि वर्ष 2016 से जब से यह योजना प्रारंभ की गई, तभी से लगातार एक ही स्कूल के लिए आवेदन आए।
तीन साल में इनको मिला लाभ
वर्ष कुल छात्र स्कूल
2019-20 07 सभी नानकून प्राथमिक विद्यालय भिनगा
2018-19 14 तेरह नानकून प्राथमिक विद्यालय व एक बीएस एक्सीलेंट
2017-18 09 07 नानकून प्राथमिक विद्यालय 01 श्रावस्ती ज्ञान मंदिर व
01 एपीएम सनराइज
2640 बच्चों को मिलना चाहिए था लाभ
जिले में कुल 264 बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। योजना का लाभ कक्षा एक में मौजूदा छात्र संख्या के पच्चीस प्रतिशत बच्चों को ही मिलता है। प्रत्येक कक्षा में औसतन चालीस बच्चे ही दाखिला लेते हैं। ऐसे में कक्षा एक को ही देखा जाए तो कुल 10560 बचे जिले में पंजीकृत हैं। इनमें से 2640 को इस योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए।
यहां हुई लापरवाही
शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन की दो प्रणाली है। नगरीय क्षेत्र के अभिभावक ऑनलाइन आवेदन करके अपने आसपास एक किलोमीटर परिधि के स्कूल का चयन कर सकते हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में लोग ऑफलाइन आवेदन खंड शिक्षाधिकारी के माध्यम से कर सकते है। लेकिन योजना का प्रचार प्रसार गांव स्तर की किसी भी बैठक में कभी नहीं हुआ। न ही शिक्षक व बीईओ ने ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को उपलब्ध कराई। इसीलिए आज तक ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। यहीं नहीं इकौना क्षेत्र से भी कभी आवेदन प्राप्त नहीं हुए।

सीडीओ अवनीश राय ने कहा कि यह एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका लाभ खास तौर पर ग्रामीण स्तर तक पहुंचना चाहिए था। कहां चूक हुई, जिसके कारण आवेदन नहीं आए। यह जांच का विषय है। मामले में बीएसए से जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही इस योजना के प्रचार प्रसार पर भी बल दिया जाएगा।
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