{"_id":"5d9f76c08ebc3e93b434652c","slug":"odf-becomes-district-in-paper-people-going-open-defecation-srawasti-news-lko486137710","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागज में ओडीएफ हुआ जिला, खुले में शौंच जा रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागज में ओडीएफ हुआ जिला, खुले में शौंच जा रहे लोग
विज्ञापन
मोहम्मदपुर में निष्प्रयोज्य पड़ा शौचालय।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। प्रशासन की ओर से श्रावस्ती को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, जबकि हकीकत इससे कोसो दूर है। जिले के हजारों घरों में अब तक शौचालय नहीं बना है। वहीं कई घरों में बने शौचालयों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। कई जगहों पर शौचालय निष्प्रयोज्य होने के कारण लोग खुले में शौच जा रहे हैं। यदि हकीकत में जिला ओडीएफ होता तो दशहरा पर दिकौली निवासी रामधीरज का परिवार अनाथ न होता। वहीं इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी स्पष्ट न बता कर टाल मटोल कर रहे हैं।
अदम गोंडवी की पंक्तियां ‘कागजों में तुम्हारे शहर का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे और दावा किताबी है’ जिले में एकदम सटीक साबित हो रही है। प्रशासन की ओर से श्रावस्ती को खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, जबकि हकीकत इसके एकदम विपरीत है। सिर्फ गांवों में ही नहीं नगर में भी तमाम परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक शौचालय की सुविधा नहीं मिली है।
शौचालय के अभाव में लोग आज भी मार्ग की पटरियों व खेतों में शौच के लिए जा रहे हैं। ऐसा ही कुछ दशहरा पर सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली में भी हुआ। जहां खेत की बाड़ पर गिरी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से शौच के लिए खेत जा रहे रामधीरज की मौत हो गई थी। घटना में मृतक के दो बच्चे अनाथ हो गए।
विज्ञापन
ऐसा ही कई अन्य गांव में भी हुआ। जहां शौच के लिए जाते समय लोग सर्प दंश का शिकार हुए। वहीं कई महिलाओं व किशोरियों के साथ अपहरण व दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। इसके बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे है।
न नसीब हुई छत और न मिला शौचालय
दिकौली निवासी रामधीरज तीन भाई थे। इनका आपस में बटवारा भी हो गया था। रामधीरज को तमाम प्रयास के बाद भी आवास व शौचालय योजना का लाभ नहीं मिला। इस पर वह परिवारीजनों के साथ फूस की टटिया पर टीनशेड लगा कर जीवन यापन कर रहा था। रामधीरज की पत्नी आरती देवी ने बताया कि उसके पति ने कई बार आवास और शौचालय योजना का लाभ लेने के लिए प्रयास किया, लेकिन न तो प्रधान ने सुनी और न ही अधिकारियों ने। अगर घर में शौचालय का निर्माण होता तो शायद रामधीरज जिंदा होता।
निष्प्रयोज्य पड़े शौचालय, मवेशी बांध रहे ग्रामीण
गिलौला क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर में बने कई शौचालय निष्प्रयोज्य पड़े हैं। इनके चारों तरफ झाड़ियां उग आई है। गांव निवासी दुलारा देवी व राधा की माने तो उसे एक वर्ष पूर्व शौचालय निर्माण के लिए पैसा मिला था। इसे ग्राम प्रधान ने ले लिया था। उनकी ओर से शौचालय का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। वहीं पेशकार ने बताया की जमीनी विवाद के कारण शौचालय निष्प्रयोज्य पड़ा है। गांव में कई अन्य शौचालय अधूरे होने के कारण उसमें ग्रामीण मवेशी बांध रहे हैं वहीं ग्राम प्रधान बड़ेलाल कहते हैं कि शौचालय का पैसा लाभार्थी के खाते में दे दिया गया था। बार बार कहने पर भी लाभार्थी शौचालय नहीं बनवा रहे हैं।
9694 शौचालयों का भेजा प्रस्ताव
जिले के सभी घरों को शौचालय मुहैया कराया जा चुका है। कुछ लोग जो घरों से बाहर थे अथवा परिवार में बटवारा होने के बाद अलग हुए हैं, सिर्फ वहीं शौचालय के लाभ से वंचित हैं। मृतक रामधीरज को आवास के साथ शौचालय मिलना था। उसकी ओर से आधार कार्ड नहीं दिए जाने से उसे योजना का लाभ नहीं मिला। ऐसे लोगों को योजना का लाभ देने के लिए 9694 शौचालयों का प्रस्ताव भेजा गया है। पैसा मिलते ही सभी को योजना का लाभ दिलाया जाएगा। - राजकुमार त्रिपाठी, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण
विज्ञापन
अदम गोंडवी की पंक्तियां ‘कागजों में तुम्हारे शहर का मौसम गुलाबी है, मगर यह आंकड़े झूठे और दावा किताबी है’ जिले में एकदम सटीक साबित हो रही है। प्रशासन की ओर से श्रावस्ती को खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, जबकि हकीकत इसके एकदम विपरीत है। सिर्फ गांवों में ही नहीं नगर में भी तमाम परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक शौचालय की सुविधा नहीं मिली है।
विज्ञापन
शौचालय के अभाव में लोग आज भी मार्ग की पटरियों व खेतों में शौच के लिए जा रहे हैं। ऐसा ही कुछ दशहरा पर सोनवा थाना क्षेत्र के दिकौली में भी हुआ। जहां खेत की बाड़ पर गिरी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से शौच के लिए खेत जा रहे रामधीरज की मौत हो गई थी। घटना में मृतक के दो बच्चे अनाथ हो गए।
विज्ञापन
ऐसा ही कई अन्य गांव में भी हुआ। जहां शौच के लिए जाते समय लोग सर्प दंश का शिकार हुए। वहीं कई महिलाओं व किशोरियों के साथ अपहरण व दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। इसके बावजूद प्रशासन चुप्पी साधे है।
न नसीब हुई छत और न मिला शौचालय
दिकौली निवासी रामधीरज तीन भाई थे। इनका आपस में बटवारा भी हो गया था। रामधीरज को तमाम प्रयास के बाद भी आवास व शौचालय योजना का लाभ नहीं मिला। इस पर वह परिवारीजनों के साथ फूस की टटिया पर टीनशेड लगा कर जीवन यापन कर रहा था। रामधीरज की पत्नी आरती देवी ने बताया कि उसके पति ने कई बार आवास और शौचालय योजना का लाभ लेने के लिए प्रयास किया, लेकिन न तो प्रधान ने सुनी और न ही अधिकारियों ने। अगर घर में शौचालय का निर्माण होता तो शायद रामधीरज जिंदा होता।
निष्प्रयोज्य पड़े शौचालय, मवेशी बांध रहे ग्रामीण
गिलौला क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर में बने कई शौचालय निष्प्रयोज्य पड़े हैं। इनके चारों तरफ झाड़ियां उग आई है। गांव निवासी दुलारा देवी व राधा की माने तो उसे एक वर्ष पूर्व शौचालय निर्माण के लिए पैसा मिला था। इसे ग्राम प्रधान ने ले लिया था। उनकी ओर से शौचालय का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। वहीं पेशकार ने बताया की जमीनी विवाद के कारण शौचालय निष्प्रयोज्य पड़ा है। गांव में कई अन्य शौचालय अधूरे होने के कारण उसमें ग्रामीण मवेशी बांध रहे हैं वहीं ग्राम प्रधान बड़ेलाल कहते हैं कि शौचालय का पैसा लाभार्थी के खाते में दे दिया गया था। बार बार कहने पर भी लाभार्थी शौचालय नहीं बनवा रहे हैं।
9694 शौचालयों का भेजा प्रस्ताव
जिले के सभी घरों को शौचालय मुहैया कराया जा चुका है। कुछ लोग जो घरों से बाहर थे अथवा परिवार में बटवारा होने के बाद अलग हुए हैं, सिर्फ वहीं शौचालय के लाभ से वंचित हैं। मृतक रामधीरज को आवास के साथ शौचालय मिलना था। उसकी ओर से आधार कार्ड नहीं दिए जाने से उसे योजना का लाभ नहीं मिला। ऐसे लोगों को योजना का लाभ देने के लिए 9694 शौचालयों का प्रस्ताव भेजा गया है। पैसा मिलते ही सभी को योजना का लाभ दिलाया जाएगा। - राजकुमार त्रिपाठी, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण