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राप्ती पर पक्का तटबंध बना रहा नेपाल

Thu, 18 Feb 2021 10:49 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Feb 2021 10:49 PM IST
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Nepal remains a solid embankment on Rapti
श्रावस्ती। राप्ती नदी का उद्गम नेपाल में है। यह नदी श्रावस्ती के गणेशपुर गांव के बगल से जिले में प्रवेश करती है। कुछ वर्ष पूर्व डायवर्ट होकर नदी नेपाल की ओर मुड़ गई थी। इसे पुन: भारत की ओर मोड़ने के लिए नेपाल नोमेंस लैंड सीमा से लगभग ढाई किोमीटर दूर सोनबरसा पिपरहवा गांव के बीच पक्का तटबंध बना रहा है। तटबंध बनते ही भारत में राप्ती बाढ़ के रूप में तबाही मचाने लगेगी। इससे भयभीत ग्रामीणों ने गुरुवार डीएम को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम जमुनहा को सौंपा। जिसमें ग्रामीणों ने भारतीय क्षेत्र में भी तटबंध बना कर नदी की धारा को डायवर्ट करने की मांग उठाई है।
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राप्ती का उद्गम दक्षिण हिमालय नेपाल राष्ट्र है। यहां से राप्ती नदी चल कर श्रावस्ती के गणेशपुर गांव के पास जिले में प्रवेश करती है। राप्ती का स्वरूप प्रति वर्ष बदलने के कारण कुछ दिनों पूर्व नदी ने डायवर्ट होकर पुन: नेपाल की ओर अपना रुख कर लिया था। इसी के बाद श्रावस्ती जिले में राप्ती की विभीषिका कम हो गई थी। नदी का पानी नेपाल से आने के बाद कई भागों में वितरित हो जाता था। लेकिन अभी हाल में ही नेपाल ने लगभग ढाई किलोमीटर दूर नेपाल के सोनबरसा से पिपरहवा के बीच एक पक्के तटबंध का निर्माण कर रहा है।
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इससे पूर्व इस स्थान पर नेपाल के ग्राम विकास समिति ने एक कच्चे तटबंध का निर्माण किया था। यह तटबंध नेपाल के मटहिया गांव तक बनना है। जहां से नोमेंस लैंड की दूरी मात्र एक किलोमीटर ही रह जाती है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस तटबंध का निर्माण यदि पूरा हो गया तो राप्ती नदी एक बार फिर डायवर्ट होकर भारत की ओर अपना रुख करेगी।
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ऐसी स्थिति में बेलरी, गंगाभागड़, गणेशपुर भागड़, रामपुर भागड़, घुमना, घुमनी, बांसगढ़ी, शिवपुर भागड़, दयालनी सहित कई अन्य गांव नदी के मुहाने पर आ जाएंगे। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों ने डीएम को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम जमुनहा जेपी चौहान को सौंपा है। जिसमें ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि नेपाल में बन रहे तटबंध के ठीक सामने जहां नदी का डायवर्जन हो सकता है। वहां भारतीय क्षेत्र में भी तटबंध का निर्माण हो। ताकि बाढ़ की स्थिति में राप्ती नदी से गांव में तबाही न होकर पानी का डायवर्जन होकर मूल नदी या फिर नहरों में भेजा जा सके। ज्ञापन देने वालों में विशाल सोनी, मोहम्मद मुबारक, उबैद अंसारी, संजय जायसवाल, दीपक, अमित वर्मा, परिमल, राजेश कुमार सहित काफी संख्या में ग्रामीणों के नाम शामिल हैं।
नेपाल व भारत के बीच राप्ती में आने वाली बाढ़ को लेकर कई बार उच्च स्तरीय बैठकें भी हो चुकी हैं। इन होने वाली बैठकों में 90 के दशक में समझौता हुआ था कि दोनों देश राप्ती नदी से दो किलोमीटर की परिधि में कोई भी पक्के तटबंध का निर्माण नहीं करेंगे। इसी समझौते के बाद भारत ने उस समय बन रहे कलकलवा संतलिया तटबंध का निर्माण न केवल रोक दिया गया था। बल्कि उसके पक्के करने की योजना भी स्थगित कर दी गई थी। लेकिन नेपाल की ओर से बनाए जाने वाले इस तटबंध का असर दोनों देशों के आम जनजीवन पर पड़ेगा।

नेपाल क्षेत्र में बन रहे पक्के तटबंध के संबंध में सिंचाई खंड एक के एसडीओ विष्णू प्रसाद का कहना है कि इस संबंध में डीएम द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच करके रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। वहीं मामले में एडीएम योगानंद पांडे का कहना है कि इस समस्या के संबंध में उच्च स्तरीय वार्ता होगी।
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